सियासत

फिर विवादों में विवादों का चैंपियन

कुमार दुष्यंत
हरिद्वार विवादों और अपने कारनामों से सुर्खियों में बने रहने वाले खानपुर विधायक कुंवर प्रणवसिंह का नया कारनामा मार्केट में आ गया है। इस बार उन पर हरिद्वार जिला पंचायत के वित्त एवं अपर मुख्य अधिकारी को बंधक बनाकर लाखों रुपये के चैकों पर जबरन साईन कराने के आरोप लगे हैं।हालांकि चैंपियन खुद पर लगे इन आरोपों का खंडन कर रहे हैं।लेकिन जिला पंचायत का घटनाक्रम व पंचायत अधिकारी आरके त्रिपाठी के आरोप चैंपियन के खंडन के खिलाफ जा रहे हैं।
गैरसैंण में चल रहे महत्वपूर्ण विधानसभा सत्र को छोडकर शुक्रवार दोपहर चैंपियन अपनी पत्नी रानी देवयानी व जिला पंचायत की संचालन समिति के दो अन्य सदस्यों अमीलाल व मौहम्मद सत्तार के साथ अचानक जिला पंचायत कार्यालय पहुंच गये व अपर मुख्य अधिकारी एवं वित्त अधिकारी को सभागार में बुलाकर सभागार के दरवाजे बंद कर वहां अपने शस्त्रधारी गनरों को बैठा दिया।आरोप है कि इसके बाद उनके द्वारा वित्त अधिकारी एवं अपर मुख्य अधिकारी आरके त्रिपाठी से जबरन लाखों रुपये के कई चैकों पर साईन कराने की कोशिश की गयी।

कुंवर प्रणवसिंह चैंपियन विधानसभा से कहीं बड़े जिला पंचायत के खिलाडी हैं।पिछले कई वर्षों से उनकी पत्नी देवयानी सिंह जिला पंचायत सदस्य चली आ रही हैं।गत दिसंबर में शासन ने अध्यक्ष सविता चौधरी को निलंबित कर जिला पंचायत का संचालन कुंवर प्रणवसिंह की पत्नी रानी देवयानी, अमीलाल वाल्मीकि व सत्तार की कमेटी को सौंप दिया था।क्योंकि संचालन कमेटी के सदस्य सत्तार से कमेटी की पटरी नहीं बैठ रही थी।इसलिए शुरू से ही संचालन समिति में विवाद बना हुआ है।बसपा नेता व पूर्व विधायक शहजाद के भाई सत्तार को कमेटी से हटाने की मांग को लेकर ही पिछले दिनों चैंपियन को भाजपा की अनुशासन समिति से माफी मांगनी पड़ी थी।

लेकिन अब चैंपियन की सत्तार से सुलह हो चुकी है।जिसके बाद वह सत्तार, अमीलाल व पत्नी देवयानी सिंह के साथ कल जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे थे।जहां उनकी मौजूदगी के कारण ये सब बखेडा खड़ा हो गया।
चर्चा ये भी है कि कुंवर प्रणवसिंह सिंह पत्नी देवयानी द्वारा प्रस्तावित करीब पौने चार करोड़ रुपये के कामों को करवाना चाहते हैं।सत्तार से खटपट के चलते उनके यह काम अटके हुए थे।साथ ही पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी आरके त्रिपाठी ने शासन से पंचायत के वित्तीय अधिकारों को सौंपने को लेकर शासन को पत्र लिखा हुआ है।जिसपर शासन द्वारा जल्द ही निर्णय लिए जाने की संभावना है।

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