पर्यटन

चार धाम यात्रा मार्ग पर हैं कई रिफ्रेश प्वाइंट।

रिफ्रेश पॉइंट पर मार्ग की थकान से मिल सकती है राहत।
गिरीश गैरोला
देवभूमि उत्तराखंड की प्राकृतिक खूबसूरती फिल्मी पर्दे पर मन मोह लेती है। किंतु जब पर्यटक खुद इसके दीदार के लिए पहाड़ो में आता है तो यहां तीखे मोड़ों वाली ऊबड़खाबड़ सड़क के चलते इतना थक जाता है कि इस खूबसूरती के दर्शन नही कर पाता। इसके बाद भी नदियों के किनारे इतने खूबसूरत स्थल यहाँ मौजूद हैं कि थोड़ा विकसित कर उन्हें पर्यटकों के लिए रिफ्रेश पॉइंट्स बनाया जा सकता है। इससे यात्रियों और पर्यटकों को मार्ग की थकान भूल कर कुछ देर प्रकृति से निकटता का अनुभव तो होगा ही, सफर की थकान भी दूर होगी।
ऐसा ही एक पॉइंट गंगोत्री राजमार्ग पर उत्तरकाशी से 14 किमी दूर गंगोत्री की तरफ हीना नामक जगह पर मौजूद है। यहाँ मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना प्रथम के बैराज से अतिरिक्त पानी एक झरने की शक्ल में गिरता है। गर्मियों में चलने वाली चार धाम यात्रा के दौरान इस झरने की ठण्डी ठंडी फुहार सड़क तक भी पहुंचती है और यही वजह है कि पर्यटक खूद ब खुद अपनी गाड़ियों से उतर कर थोड़ी देर यहां मस्ती करते हैं। झरने के पास बैठने के लिए पॉइंट बनाकर थोड़ा विकसित किया जाय तो यह स्थान बेहतरीन रिफ्रेश पॉइंट बन सकता है।
इसी तरह सड़क से लगे हुए गंगा नदी के किनारे किनारे चलती सड़क के पास कई अन्य स्थलों को भी चयनित किया जा सकता है।
गौर करने वाली बात ये है कि बड़े शहरों से आलीशान जिंदगी से ऊबकर पर्यटक कुछ दिन पहाड़ों का रुख इसलिए करता है कि प्रकृति के पास कुछ समय बिताकर उसे शारीरिक और मानसिक ऊर्जा मिलती है और होटल के बंद कमरों की बजाय वह ऐसे ही प्रकृति के निकट रिफ्रेश पॉइंट पर समय बिताना चाहता है।
गंगोत्री ,यमनोत्री ,केदारनाथ और बद्रीनाथ  चार धाम की यात्रा तो पुरखों ने विरासत के रूप में हमे मिली है, किन्तु यह हमारी नई पीढ़ी  पर निर्भर करता है कि हम चार धाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों और पर्यटकों को कितनी देर तक इन खूबसूरत स्थलों पर रोक कर रख  सकते हैं । सूबे  के पर्यटन विभाग के अलावा खुद पर्यटन व्यवसाइयों को इस पहल के लिए आगे आना होगा तभी पर्यटन प्रदेश का सपना साकार हो सकेगा।

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