एक्सक्लूसिव पर्यटन

वाह:अपने चिन्यालीसौड़ मे भी ‘बीच कल्चर’।सन बाथ, मड बाथ..

चिन्यालीसौड़ में विकसित होगा बीच कल्चर।
आयुर्वेद से आरोग्य तक- मिलेगी प्राकृतिक चिकित्सा।
विदेशियों को बुलाकर आयोजित होगा इवेंट।
गिरीश गैरोला
हिमालयन नदियों का जल ही नही इसकी मिट्टी और रेत भी अब लोगों को लंबा जीवन का वरदान देने में सक्षम होंगे। डीएम उत्तरकाशी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि गर्मियों के समय जल स्तर कम होने के बाद चिन्यालीसौड़ में टिहरी झील से उभर आये  रेत के टीलों पर प्राकृतिक चिकित्सा के जरिये स्वस्थ और लंबा जीवन जीने के गुर सिखाए जाएंगे। इसके लिए जल्द ही विदेशियों के एक ग्रुप को बुलाकर एक इवेंट आयोजित किया जाएगा, ताकि इस स्थान को पर्यटन के साथ प्राकृतिक चिकित्सा के लिए प्रमोट किया जा सके।
ऐसा नही है कि केवल विदेशी ही इस विधि का लाभ ले रहे हैं, भारत मे वर्षो से ऋषि मुनि नदी के किनारे मिट्टी में इस तरह का स्नान करते आये हैं। घर गांवों मे भी स्नान से पूर्व पूरे बदन पर तेल मालिश कर खुली धूप में स्नान लेने की परंपरा कायम है।
आयुर्वेद विभाग के वरिष्ठ डॉ जनानंद नौटियाल ने बताया कि आधुनिकता के साथ इंसान का मिट्टी से रिश्ता टूट सा गया है। जिसका खामियाजा उसे शारीरिक दुर्बलता और बीमारियों के रूप में भुगतान पड़ रहा है।
 उन्होंने बताया कि मनुष्य का शरीर पांच भौतिक तत्वों से बना हुआ है। जिसमे पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश तत्व शामिल है। इंसान जब मिट्टी के संपर्क में आता है तो पृथ्वी तत्व की कमी को अपने आप पूर्ति कर लेता है। उन्होंने बताया कि विदेशियों के बीच पर ‘सनबाथ’ लेना भी कहीं न कहीं इसी विधि पर आधारित है।
अपने देश और प्रदेश में करीब 70% लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। क्योंकि बंद कमरों से उन्हें धूप में आने का समय ही नही मिलता। बाकी रही सही कसर ऐसी कल्चर ने पूरी कर दी है,जिसके चलते बच्चे बूढों और औरतों में विटामिन डी की कमी के चलते कई बीमारियां पैदा हो रही हैं।
सूर्य स्नान भी आयुर्वेद का मंत्र है, जिसमे मनुष्य को धूप से विटामिन की कमी पूरी हो जाती है। पूर्व में मनुष्य की दिनचर्या और काम काज में मिट्टी से जुड़ाव और सूर्य की किरणों से संपर्क बना हुआ था, जो अब बिल्कुल नही है। इसलिए पर्यटन के रूप में ही सही इंसान की ये जरूरत पूरी होगी तो दवाओं पर उसकी निर्भरता कुछ तो कम होगी।
उत्तरकाशी के डीएम डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि गर्मियों में टिहरी झील का विस्तार कम होने पर चिन्यालीसौड़ के पास रेत के टीले उभर आते हैं। इन पर बीच तैयार कर आयुर्वेद से आरोग्य के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने का प्लान तैयार किया गया है। जिसे बृहद प्रचार-प्रसार देने के लिए विदेशियों को आमंत्रित कर एक इवेंट के रूप में आयोजित  किया जाएगा, ताकि हिमालयी नदियों के जल के साथ इसकी मिट्टी भी लोगों को आरोग्य के साथ पर्यटन का भी लाभ दे सके।
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