एक्सक्लूसिव राजकाज

खुलासा: डीएम की माफी और मातृसदन के मौन का राज !

 कुमार दुष्यंत
हरिद्वार। विगत काफी समय से हरिद्वार का मातृसदन  और स्वामी शिवानंद जिलाधिकारी के खिलाफ मुखर नहीं हैं। अब वह कभी-कभी मुख्य सचिव को गरिया लेते हैं।
 इससे  ऐसा लग रहा था कि जिला प्रशासन व मातृसदन के बीच पिछले डेढ महीने से चल रहे विवाद अब समापन की ओर है। लंबे समय से अख्तियार इस खामोशी  का राज जानने के लिए पत्रकार जब  मातृसदन गए तो मातृसदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद ने कहा कि डीएम दीपक रावत ने उनसे माफी मांगते हुए उन्हें क्षमा कर देने का आग्रह किया है। जब उनसे पूछा गया कि DM की ओर से आया वह व्यक्ति कौन था तो वह बता नहीं पाए।
मातृसदन के संत आत्मबोधानंद को अनशन से उठाकर देहरादून सीएमआई में भर्ती करा देने के बाद से ही जिला प्रशासन व मातृसदन में तनातनी चली आ रही थी।मातृसदन के संत द्वारा डीएम को गंगा सेवा सम्मान दिये जाने का खुला विरोध किये जाने के बाद तो दोनों ओर से मुकदमें बाजी का दौर शुरु हो गया था।
जिला प्रशासन द्वारा इसके बाद जहां आश्रम व आश्रम के संतों पर शांति भंग करने, सरकारी भूमि से पेड काटने, ग्राम सभा की भूमि कब्जाने आदि के मामले दर्ज किये गये तो मातृसदन ने सीधे डीएम दीपक रावत पर हमला बोलते हुए उन पर अपने गनर के साथ आश्रम के संत को जान से मारने की कोशिश सहित करीब आधा दर्जन धाराओं में मुकदमें दर्ज कराए थे।
हरिद्वार का मातृसदन आश्रम अपनी खनन विरोधी व पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
हरिद्वार में खनन खोलने के निर्णय के बाद मातृसदन द्वारा तेजतर्रार डीएम दीपक रावत को पुन: ट्रेनिंग पर भेजने की मांग से लग रहा था कि आश्रम व डीएम का विवाद दूर तक जाएगा।
जब जिलाधिकारी दीपक रावत से इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने इस तरह के किसी भी वार्तालाप से साफ इनकार कर दिया। जिला सूचना अधिकारी अर्चना घोष ने भी डीएम की ओर से स्वामी शिवानंद को कोई माफी प्रस्ताव भेजने का खंडन किया है।
     गौरतलब है कि स्वामी शिवानंद के खिलाफ पहली बार किसी जिलाधिकारी ने मुखरता दिखाई है। अब तक जितने भी जिलाधिकारी रहे। वह मातृसदन के आगे हमेशा नतमस्तक नजर आए, लेकिन  वर्तमान जिलाधिकारी दीपक रावत के खिलाफ जब वही पुराना रवैया अपनाया गया तो दीपक रावत ने भी मातृसदन की कई जांच शुरू करवा दी और कुछ मुकदमे भी दर्ज करा दिए।
 माना जा रहा है कि इससे मातृसदन बैकफुट पर है।जब कुछ पत्रकारों को मातृ सदन में स्वामी शिवानंद डीएम के माफी मांगने की बात कह रहे थे, उसी दौरान वहां पर सिंचाई विभाग के कुछ अधिकारी आ गए और उनसे कहने लगे कि उन्हें सिंचाई विभाग की जमीन पर काटे गए शीशम के पेड़ों की पैमाइश करने के लिए भेजा गया है। वहीं पर यह सवाल खड़ा हो गया कि अगर माफी जैसी कोई बात हुई है तो फिर पैमाइश करने के लिए यह अधिकारी क्यों आए हैं !दरअसल जिस भूमि से मातृसदन ने पेड़ काटे हैं, वह भूमि सिंचाई विभाग की है। सिंचाई विभाग ने उनके खिलाफ शीशम के पेड़ काटने का आरोप लगाया है।जिस भूमि से पेड़ काटे गए हैं, वह भूमि मातृ सदन की नहीं है,  दूसरा अधिकारियों के अनुसार वह पेड़ भी हरे थे, तीसरा शीशम के सूखे पेड़ काटने के लिए भी अनुमति की जरूरत होती है।
पर्वतजन के सूत्रों के अनुसार मातृसदन  के खिलाफ एक और जांच शुरू की गई है। जिसमें उन्होंने गंगा की 3000 वर्ग मीटर भूमि कब्जाई हुई है। इसके अलावा एक पुराने पंचायती रास्ते को कब्जाने और बंद करने के मामले में भी उन पर जांच शुरू हो गई है।
देखें तो मातृसदन को पहली बार मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। मातृ सदन के खिलाफ नियम विरुद्ध भूमि एक्सचेंज का भी मामला खुल सकता है। इसमें उन्होंने नियम विरुद्ध पंचायती जमीन से अपनी जमीन एक्सचेंज करा ली थी।
मातृसदन की शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों का एक फिक्स पैटर्न है। मातृसदन कभी भी पुलिस के खिलाफ नहीं बोलते। जबकि हर चौकी और बैरियर पर पुलिस की तैनाती रहती है।
बिना पुलिस की मिलीभगत के अवैध खनन संभव ही नहीं है। ऐसे में इस बात का भी पता चलता है कि बाबा अपनी पुरानी जांचों और मामलों के खुलने के डर से पुलिस के खिलाफ कभी भी स्टैंड नहीं लेते।  वह सिर्फ सीएम,डीएम, मुख्य सचिव तक बयानबाजी का दायरा सीमित रखते हैं।
हरिद्वार में  कुछ स्टोन क्रेशर ऐसे हैं, जिनके खिलाफ  बाबा कभी नहीं बोलते। उनके आश्रम से लगे हुए  बंसल स्टोन क्रेशर के खिलाफ बाबा कभी मुखर नहीं रहे। इनके स्वामित्व में कुल 3 स्टोन क्रेशर हैैं और इन स्टोन क्रेशरों के भूमि चयन और भूमि पूजन तक में मातृ सदन शामिल रहा है।
स्टोन क्रेशरों को बंद कराने को लेकर  मातृ सदन का तर्क भले ही गंगा और पर्यावरण तक सीमित रहता है किंतु इस बात से मातृसदन भी अनजान नहीं होगा कि हरिद्वार में  खनन बंद होने से सहारनपुर के  खनन व्यापारियों को मनमाने दामों पर खनन सामग्री बेचने की खुली छूट मिल जाती है।
  सवाल उठता है कि यदि बाबा वाकई पर्यावरण हितैषी हैं तो वह स्टोन क्रेशर के भूमि पूजन और चयन से लेकर शीशम के पेड़ काटने जैसे मामलों में खुद को क्यों नहीं रोक पाते !
पर्वतजन की जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के समय के कुछ मामले भी दोबारा से खुल सकते हैं। इससे बाबा की मुसीबतें बढ़नी तय है। इन्हीं सब मुसीबतों को भांपकर आजकल बाबा शिवानंद ने जिलाधिकारी के खिलाफ मौन साध लिया है और पूछने पर पत्रकारों को कह रहे हैं कि डीएम ने माफी मांग ली है, इसलिए वह खामोश हैं।
सवाल उठता है कि यदि वाकई DM ने कोई आपराधिक कृत्य किया है तो सिर्फ माफी मांग लेने भर से मातृसदन की सभी आपत्तियों का समाधान कैैैैसे हो सकता है !
यदि मामला माफी तक ही सीमित है तो फिर क्या मातृसदन की लड़ाई मात्र अपने सम्मान तक सीमित थी, अथवा वह पर्यावरण जैसे वृहद विषयों को लेकर वाकई मुखर हैं !
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