एक्सक्लूसिव खुलासा

धमाका : विदेश दौरों पर ऐश : वेतन को नहीं कैश। न कायदा, न फायदा।

अफसरों की विदेश दौरों पर ऐश : विभाग में वेतन को नहीं कैश । विभागों में भले ही वेतन को पैसे नहीं हैं, लेकिन इन विभागों के मुखिया विभागीय खर्चों पर विदेश दौरों पर जमकर पैसा लूटा रहे हैं। 

हाल ही में 6 से 11 मई के दौरे से प्रदेश के कृषि मंत्री के साथ कृषि सचिव और कृषि निदेशक इजराइल के दौरे से लौटकर आए हैं।  मंत्री और  निदेशक तो कुछ साल इस पद पर रहेंगे और राज्य को फायदा भी मिल सकता है किंतु कृषि सचिव के दौरे का फायदा तभी इस राज्य के लिए है, जब उन्हें कम से कम 1 साल तक इस पद पर रहने दिया जाए। तभी इस दौरे की सार्थकता है।
 किंतु इसी बीच आज सोमवार को मेक्सिको की धरती पर उत्तराखंड के सचिव अमित सिंह नेगी ,वी षणमुगम और आपदा प्रोजेक्ट के मैनेजर गिरीश जोशी वर्ल्ड बैंक के लोन पर चल रहे प्रोजेक्ट के पैसे से दौरे पर हैं। अमित सिंह नेगी आपदा सचिव हैं। उनके दौरे का औचित्य तो समझ में आता है किंतु बाकी दो अफसरों के दौरे का आखिर क्या औचित्य हो सकता है ! वी षणमुगम का आपदा डिपार्टमेंट से कोई लेना देना नहीं है तथा गिरीश चंद्र जोशी वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट में मैनेजर हैं और उनका कार्यकाल 1 साल का भी नहीं है। 1 साल बाद वह हटा दिए जाएंगे तो ऐसे में क्या यह उचित नहीं होता कि वर्षों से आपदा विभाग में कार्य कर रहे और आगे भी वर्षों तक कार्य करने वाले विभागीय अफसरों को इस दौरे पर ले जाया जाता तो इस राज्य को  ज्यादा फायदा मिल सकता था।
अधिकांश जो अफसर विदेश दौरे पर गए, उनमें से अधिकांश के या तो दौरे से लौटने के बाद संबंधित विभाग हटा दिए गए अथवा वे अफसर विदेश दौरे पर गए, जिनका उन विभागों से कोई लेना देना ही नहीं था। जबकि जिन अफसरों के विदेश दौरे से राज्य सरकार को लंबे समय तक फायदा मिल सकता था उन्हें ले जाया ही नहीं गया।
परिणाम यह हुआ कि इन विदेश दौरों का कोई फायदा राज्य को नहीं मिला क्योंकि राज्य सरकार के पास इस बात का कोई व्यौरा नहीं है कि उन्होंने विदेश दौरों पर राज्य के लिए क्या कुछ बेहतरीन सीखा ! न ही अफसरों ने इसकी कोई रिपोर्ट शासन में अथवा विभागों में जमा की है और न ही शासन के पास इस बात की कोई जानकारी है कि विदेश दौरों पर अफसरों ने कितना खर्च किया !
विदेश दौरों का फायदा भी नही,कायदा भी नही।
 शासन में आईएएस अफसरों ने आपसी समझदारी से एक व्यवस्था बना ली है कि आपस में किसी भी अफसर के विदेश दौरों के औचित्य अथवा उन पर हो रहे खर्चे के बारे में नहीं पूछा जाएगा। यही कारण है कि विदेश दौरों की अनुमति देने वाले कार्मिक विभाग के पास इस बात की न तो कोई जानकारी है और न ही उसने कभी इस तरह के औचित्य पर सवाल खड़े किए। कारण यह है कि सचिवालय में सभी आईएएस अफसरों के डिपार्टमेंट आपस में बदलते रहते हैं और कभी भी किसी के पास वह डिपार्टमेंट आ सकता है। ऐसे में सवाल खड़े करने पर अपने लिए भी असहज स्थिति खड़ी हो सकती है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता राकेश बर्थवाल द्वारा 24 मार्च को सूचना के अधिकार में यह जानकारी मांगने पर शासन ने अफसरों द्वारा विजिट किए गए देशों के नाम और फंडिंग एजेंसी के नाम तो सार्वजनिक कर दिए किंतु इन दौरों पर कितना खर्च हुआ, इसकी जानकारी नहीं दी।
 श्री बर्त्वाल अब अपील में जाने की तैयारी कर रहे हैं। आरटीआई के अंतर्गत प्राप्त जानकारी के अनुसार औसतन हर महीने एक अफसर विदेश दौरे पर रहता है। खर्चों के विषय में पूछे जाने पर अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने बताया कि इसकी सूचना संबंधित विभागों से अलग से ली जा सकती है।
 आरटीआई के अंतर्गत प्राप्त सुचना के अनुसार 
  तत्कालीन पर्यटन सचिव मीनाक्षी सुंदरम 14 से 21 जुलाई 2017 तक ऑस्ट्रिया में होने वाली कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए और इसका भुगतान पर्यटन विकास परिषद ने किया। इसका भी फायदा नही मिला क्योकि उनसे तत्काल बाद पर्यटन हटा लिया गया।
 नियोजन केेेे अपर सचिव रंजीत कुमार सिन्हा यूएनडीपी के खर्चे पर  2 से 4 अक्टूबर  तक मनीला फिलीपींस में रहे। 
तत्कालीन प्रमुख सचिव ऊर्जा उमाकांत पंवार 9 से 11 मई तक इथोपिया मे रह कर आए। इसका खर्चा भी  उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने ही वहन किया। दौरे का कोई फायदा नही मिला क्योंकि इसके बाद उन्होंने इस्तीफा ही दे दिया।
 तत्कालीन अपर सचिव आपदा विनोद कुमार सुमन भी 23 अक्टूबर से 10 नवंबर तक जापान में जमे रहे।इसका फायदा भी नही हुआ । उन्हे डीएम नैनीताल बना दिया गया।
चंद्रेश कुमार यादव उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट केेे डायरेक्टर रहने के दौरान 31 अक्टूबर तक वाशिंगटन में रहे और इसका खर्चा स्वास्थ्यय विभाग ने ही उठाया।इसके कुछ समय बाद इनसे स्वास्थ्य हटाकर युगल किशोर पंत को थमा दिया गया।
 डॉ आर राजेश कुमार सिडकुल के प्रबंध निदेशक रहने के दौरान 12 नवंबर 2017 से 17 नवंबर तक सिंगापुर में रहे और इसका खर्चा सिडकुल ने वहन किया। इसका फायदा जीरो रहा। उनसे सिडकुल हटा दिया गया।
 सी रविशंंकर अपर सचिव आपदा रहने के दौरान बैंकॉक 20 मार्च से 22 मार्च तक रहे और इसका खर्चा आपदा के प्रोजेक्ट से ही निकाला गया।इसका लाभ आपदा से ओ नही मिला क्योकि इसके बाद उन्हे डीएम पिथौरागढ़ बना दिया गया।
“जाइका परियोजना” ने लगाया मौजमस्ती का जायका
17 अगस्त 2017 को तत्कालीन मुख्य सचिव एस रामास्वामी स्टडी टूर के नाम पर 4 सितंबर से 14 सितंबर 2017 जापान के दौरे पर थे। इसका भुगतान वन विभाग के अंतर्गत जायका एजेंसी ने किया था क्योंकि उनके पास तब वन का भी जिम्मा था। जायका  का पूरा नाम जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी है रामास्वामी के इस दौरे का भी वन विभाग को कोई फायदा नही मिला क्योंकि उनसे विभाग हटा कर उन्हे सचिवालय से बाहर कर राजस्व परिषद मे भेज दिया गया।
आईएएस अरविंद सिंह ह्यांकि भी 23 अक्टूबर 2017 से 10 नवंबर 201 7 तक जापान के दौरे पर रहे इसका कारण एक ट्रेनिंग प्रोग्राम बताया गया यह भी वन एवंं पर्यावरण विभाग के प्रभारी सचिव थे। इसका भुगतान भी वन विभाग के अंतर्गत चलने वाली परियोजना जाइका के द्वारा किया गया।
लोक निर्माण विभाग अपर सचिव वी षणमुगम 23 अक्टूबर से 10 नवंबर तक जापान में रहे। वह भी जायका प्रोजेक्ट के कोटे से ही विदेश दौरे पर गए
विनोद कुमार सुमन भी जायका प्रोजेक्ट से ही विदेश मे 17 दिन के टूर पर रहे।
सर्वाधिक तीन दौरे पंकज पांडे ने किए
पंकज कुमार पांडे सर्वाधिक विदेश दौरे करने वाले सचिव हैं। वह स्किल डेवलपमेंट कमेटी के खर्चे पर 19 से 23 जून को पेरिस में थे तथा 14 से 19 अक्टूबर 2017 तक अबू धाबी में रहे।
 पंकज पांडे का तीसरा दौरा 13 से 17 नवंबर तक यूनाइटेड किंगडम का रहा हालांकि इसका खर्चा वहीं की कंपनी ने उठाया था। हालांकि श्री पांडे के साथ राहत की बात यह है कि वह अभी भी इस स्किल डेवलपमेंट विभाग का ही जिम्मा संभाले हुए हैं।
इन अफसरों के अलावा बृजेश कुमार संत MD परिवहन 13 से 20 जनवरी 2018 को ऑस्ट्रेलिया तथा फरवरी 23 तारीख को काठमांडू के टूर पर रहे किंतु इसका भुगतान केंद्र सरकार की ट्रांसपोर्ट एजेंसी ने किया आपदा सचिव अमित सिंह नेगी भी 6 से 8 जून 2017 को बेल्जियम के टूर पर थे। लेकिन इसका खर्च वर्ल्ड बैंक ने उठाया। सेंथिल पांडियन भी परिवहन सचिव के तौर पर काठमांडू नेपाल में 23 फरवरी को थे किंतु इस टूर पर खर्च सामान्य ही रहा।
मंडी परिषद के प्रबंध निदेशक धीरज सिंह गर्ब्याल भी  23 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक मेलबर्न और सिडनी के दौरे पर रहे और इसका भुगतान भी उत्तराखंड कृषि मंडी परिषद के द्वारा किया गया।
अफसरों के विदेश दौरों की यदि समीक्षा नहीं की गई तो वर्तमान सरकार राज्य के इतिहास में अफसरों के सर्वाधिक विदेश दौरों के लिए भी जानी जाएगी और इससे राज्य के खजाने का लूटना तय है।
यदि आप यह लाइनें पढ़ रहे हैं तो इतनी लंबी रिपोर्ट धैर्यपूर्वक पढ़ने के लिए आप जैसे गंभीर पाठक का पर्वतजन शुक्रिया अदा करता है ।आपसे निवेदन है कि इस रिपोर्ट को अधिक से अधिक शेयर करें, अपनी राय व्यक्त करें ताकि हमारे नीति-नियंता अफसरों के विदेश दौरों को सीमित करके उनकी जवाबदेही तय कर सकें। 

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