धर्म - संस्कृति

फूलदेई : राजभवन और मुख्यमंत्री आवास से 

उत्तराखंड राज्य से बाहर पहली गुजरात के जामनगर मेयर, कमिश्नर , DM व SSP के द्वार पर बच्चे बिखेरेंगे उत्तराखंडी संस्कृति के फूल 

फूल संक्रांति(14 माार्च) को 27 नन्हें-मुन्ने बच्चों की टोली राज्यपाल व मुख्यमंत्री आवास पर उनके द्वार (देहरी) पर रंग विरंगे फूलों की वर्षा करने पहुंचेगी । और इस अवसर पर राज्यपाल व मुख्यमंत्री, के मार्फत भी पर्वतीय परंपरानुसार बच्चों को सगुन मे एक-एक मुट्ठी चावल व एक एक मुट्ठी गेहूं (शुभ संपन्नता व आशीर्वाद का प्रतीक) भेंट किया जाएगा।

प्रकृति से जुड़ा सामाजिक, सांस्कृतिक, एवं लोक-पारंपरिक त्योहार जो एक अनूठी पर्वतीय संस्कृति की त्रिवेणी ‘फूल-फूल माई’ / ‘फूल देई’ त्योहार है , के संरक्षण व संबर्धन मे रंगोली आन्दोलन की एक मुहिम है ।

फूल-फूल माई / फूल देई त्यौहार मानव व प्रकृति के पारस्परिक संबंधों का ऋतु पर्व है । इस अवसर पर नन्हें मुन्हे बच्चे प्रात: घर-घर जाकर द्वारों (देहरियों) पर फूल बिखेरते हैं और धनधान्य समृद्धि की कामना वन देवता, वन देवी व प्रकृति से करते हैं ।

पलायन के कारण तेजी से लुप्त हो रहा यह बाल पर्व त्यौहार वर्तमान परिप्रेक्ष्य (ग्लोबल, वार्मिंग, बढ़ता प्रदूषण, गंगा रक्षा आदि) में प्रभावी संदेश दे सकता है ।रंगोली आन्दोलन एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक मुहीम को तहत विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी  अपनी  इस मुहिम को राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिले समर्थन से यह संदेश रचनात्मक मीडिया के द्वारा उत्तराखंड सहित पूरे देश व विदेश मे रह रहे प्रवासियों तक प्रभावी रूप से पहुंचेगा व इस खूबसूरत पर्वतीय बाल पर्व के संरक्षण / संवर्धन के क्षेत्र मे भी यह पहल सार्थक होगी । और भविष्य मे भी निरंतर ऐसा करने से बच्चों के मार्फत यह खूबसूरत परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित भी होती रहेगी ।

फूल-फूल माई / फूलदेई के संरक्षण व संबर्धन के लिए किया जा रहा यह कार्यक्रम अपने आप मे अभी तक का एक मात्र ऐसा पहला कार्यक्रम राज्य मे शुरू किया गया है जो निरंतर 5 वर्षों से जारी है और विशुद्ध रूप से प्राचीन लोक परम्पराओं और उससे जुड़ी मान्यताओं को अपनाते हुए अपने मूल रूप मे ही आयोजित किया जा रहा है । इसमे सिर्फ धन धान्य के प्रतीक गेहूं और चावल के साथ गुड़ देने की भी परंपरा है ।

रंगोली आंदोलन  की  इस पहली पहल मे महामहिम राज्यपाल,व  मुख्यमंत्री के अलावा  आई एल एफ एस स्किल संस्था,  हिल फाऊंडेशन स्कूल सीमाद्वारा बसंत बिहार, मेपल बियर स्कूल सर्कुलर रोड डालनवाला, दून इंटरनेशनल स्कूल ,सी.एम.आई. के निदेशक डा. महेश कुड़ियाल ,पद्मश्री डा. आर. के. जैन , श्री हरेन्द्र सिंह जुनेजा , श्रीमती सोनल वर्मा, श्रीमती सुनीता पाण्डेय, श्री चंद्र शेखर महरवाल , श्री रमेश पेटवाल श्री उपेंद्र अंथवाल  आदि  ने अपने घरों व संस्थानो मे बच्चों की टोलियां आमंत्रित कर इस अभियान को अपना  सहयोग भी प्रदान किया है ।  कल इसी मौके पर रंगोली के तहत नौनिहालों की फूलदेई टोली राजपुर रोड , हरिद्वार रोड , बसन्त बिहार ,डालनवाला बलबीर रोड , व तेग बहादुर रोड के घरों मे पारम्परिक रूप से द्वार-द्वार पुष्प वर्षा भी करेंगे ।     रंगोली आंदोलन के संस्थापक शशिभूषण मैठाणी ने सरकार से मांग की है कि प्रत्येक वर्ष राज्य के सभी स्कूलों मे बच्चों को इस बालपर्व फूलदेई को मनाने के लिए प्रेरित किया जाय व इस परम्परा से संबन्धित लेख या कविताओं को नौनिहालों के पाठ्यक्रम मे भी शामिल किया जाय ।

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