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सीडीओ को बनाया बंधक, जानिए क्यों और कहां!

ट्रांसफर की मांग को लेकर बोर्ड की बैठक छोड़ सीडीओ को कमरे में बंद कर आये जिला पंचायत सदस्य।

सीडीओ ने सरकारी काम मे बाधा डालने के आरोप में कानूनी कार्यवाही करने की दी चेतावनी।

विभाग में चल रही अनियमिताओं की जांच में पाई जाने वाली कमी को छिपाने का बताया षड्यंत्र।

गिरीश गैरोला।

पिछले विवाद से एक कदम आगे बढ़ते हुए जिला पंचायत सदस्यों ने सीडीओ पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए उनके ट्रांसफर की मांग करते हुए जिला पंचायत बोर्ड बैठक का बहिष्कार करते हुए सीडीओ को उनके कमरे में ही बंद कर दिया। करीब आधे घंटे से अधिक समय तक तालेबंदी कर सीडीओ कार्यलय के सामने नारेबाजी भी की। मौके पर पुलिस कप्तान के साथ मौजूद पुलिस फ़ोर्स ने किसी  तरह समझ बुझा कर ताला खोला।

जिला पंचायत विवाद को बढ़ता देख खुद डीएम आशीष कुमार मौके पर गए और दोनों पक्षों को सुनने के बाद मनाने का प्रयास किया किन्तु जिला पंचायत सदस्य सीडीओ के तबादले तक सीडीओ कार्यलय में ही डटी हुई है। कार्यालय समय के बाद सीडीओ भी मुश्किल से अपने कमरे से बाहर निकल सके। जिला पंचायत अध्यक्ष जसोदा राणा ने बताया कि वे रात दिन अपने सदस्यों के साथ मौके पर ही डटी रहेंगी और इस बीच किसी  भी अनहोनी दुर्घटना के लिए सीडीओ खुद जिम्मेदार होंगे । उन्होंने आरोप लगाया कि सीडीओ 24 वार्ड के छोड़कर जिला पंचायत के केवल एक ही वार्ड पर मेहरबान क्यों है ? उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत के एक अकेले सदस्य के साथ मिलकर सीडीओ ने जो घोटाले किये है उनकी जांच कब होगी? और कौन करेगा?। विधायक निधि में महज बचे हुए 30%के लिए जानबूझ कर दौड़ाया जा रहा है। इतना ही नही डीएम ने आमने सामने वार्ता का जो प्रस्ताव दिया था उसे भी  सीडीओ ने मानने से इनकार कर दिया और वार्ता के लिए  नही आये । लिहाज बोर्ड के सामूहिक फैसले के अनुसार रात- दिन सीडीओ के ट्रांसफर होने तक सीडीओ आफिस में धरना जारी रहेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले बोर्ड की बैठक में जिला स्तरीय आधीकारियों को जानबूझ कर आने से रोकने का आरोप लगाते हुए सीडीओ के तबादले की मांग करते हुए सदस्यों ने  बोर्ड की बैठक का बहिष्कार किया था। dm की मध्यस्तता के बाद पंचायत सदस्यों ने सीडीओ के ट्रांसफर होने तक अगली  बैठक का बहिष्कार का निर्णय लिया। बीच मे चीन सीमा को जोड़ने वाले गंगोरी पुल के टूटने के चलते विरोध 11 अप्रैल तक स्थगित किया गया था।

11 अप्रैल को निर्धारित 11 बजे सुबह सभी जिला स्तरीय अधिकारी  बैठक कक्ष में आये किन्तु जिला पंचायत सदस्य नही आये। सीडीओ विनीत कजमार ने बताया कि वे खुद 11 बजे बैठक में शामिल होने पहुच गए किन्तु दो घंटे तक इंतजार करने के बाद भी बैठक सुरु नही हुई तो वे डीएम से फोन पर  सलाह लेकर  वापस अपने कार्यलय में आ गए। इस बीच षडयंत्र के तहत सदस्यों ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया और सरकारी कामकाज में बाधा डालते हुए  कार्यलय के बाहर आधा घंटे से अधिक समय तक नारेबाजी की। जिसके खिलाफ वे कानूनी कार्यवाही करेंगे। उन्होंने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष समेत सभी सदस्य  विभाग में उनके द्वारा की जा रही अनियमितताओं की जांच पर पर्दा डालने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे है।

दरअसल  पूर्व में जिला पंचायत के 9 सदस्य योजनाओ की बंदर बांट के चलते हर मीटिंग में जिला पंचायत अध्यक्ष का विरोध करते आ रहे थे और अध्यक्ष पद के चुनाव में समर्थन न करने के चलते उन्हें योजनाओ से दूर रखने का आरोप लगा रहे थे किन्तु सीडीओ प्रकरण के बाद अचानक दो धड़ो में बंटा जिला पंचायत एकजुट होकर सीडीओ के  विरोध में उतर आया। सीडीओ विनीत कुमार ने बताया कि जिला पंचायत की जांच में अनियमितता पाई गई है इतना ही नही विधायक निधि की योजनाओं में भी सूचना पट नही लगाए गए है और और यमनोत्री धाम की यात्रा व्यवस्थाओं के लिए भी e टेंडर के बजाय साधारण  विज्ञप्ति निकाल दी गयी और अब जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि उनका तबादला होते ही टेंडर अपने चहेतों को आबंटित किया जा सके।

दरअसल जिला पंचायत अध्यक्ष अभी कुछ समय पूर्व ही बीजेपी में शामिल हुई है। उनका सीडीओ पर आरोप लगाना सामान्य बात है ट्रांसफर की मांग करना भी लोक तांत्रिक अधिकार हो सकता है किंतु उनके  ही दल की सरकार में सीडीओ के ट्रांसफर की मांग की सुनवाई नही हो रही है तो सीडीओ को कमरे में बंद करना समझ से परे है। आखिर सीडीओ एक आईएएस अधिकारी  है और जब तक शासन से निर्देश नही आता तब तक वे अपने पद पर बने रहेंगे वे खुद अपनी मर्जी से उत्तरकाशी नही छोड़ सकते है लिहाजा अपने ही दल की सरकार से अपनी मांग मनवाने के दूसरे तरीके भी आजमाए जा सकते है ताकि जिस जनता ने उम्मीद के साथ आपको चुना है उसके हिस्से का विकास बाधित न हो।

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