एक्सक्लूसिव

किडनी रैकेट से भी बड़ा रैकेट

उत्तराखंड में चल रहा आयुर्वेद दवा घोटाला, घटिया दवाओं की हो रही सप्लाई।
उत्तराखंड के आयुर्वेद विभाग में पिछले कई सालों से लगातार आयुर्वेदिक दवाओं के सेम्पल फेल होते जा रहे हैं। इस कारण कई बार आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति बाधित होती रही है।
लाइसेंसिंग अधिकारी डॉ वी के शर्मा ने भी 5 सितंबर को तीन दवाओं की आपूर्ति को तत्काल रोकने के आदेश दिए है। जिनमे एक केरल एक भोपाल और एक रुद्रप्रयाग की कंपनी है।विभागीय सूत्रों की माने तो यह गोरखधंधा कई सालों से चलता आ रहा है ।अब बड़ा सवाल है कि जब लगातार सेम्पल फेल होती दवाओं की आपूर्ति की जाती रही है तो इससे मरीजों को हुए शारीरिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

विभागीय सूत्रों के अनुसार इनमें कुछ किडनी,त्वचा रोगों को ठीक करनेवाली दवाएं हैं। जिन्हे हाल ही में लाइसेंसिंग अधिकारी ने रोका है।
केरल द्वारा निर्मित सरकारी सप्लाई में जा रही आयुर्वेदिक दवा श्वेत पर्पटी के सैंपल रोगियों के दिये जाने के उपयुक्त नहीपाए गये।
विद्यापीठ रुद्रप्रयाग द्वारा बनाई जा रही सरकारी सप्लाई में जा रही गोक्षुरादिग्गुल के भी सेम्पल फेल हो गये।
पूर्व में भी इन दवाओं के सेम्पल हो चुके हैं फेल।
लाइसेंसिंग अधिकारी डॉ वी के शर्मा ने इन दवाओं के वितरण पर रोक लगा दी है।
मेसर्स रिसर्च सेंटर बरखेड़ा भोपाल की सरकारी आपूर्ति में जा रही खादिरारिष्ट के भी सेम्पल फेल हो गये। इस दवा की आपूर्ति पर भी लाइसेंसिंग अधिकारी ने रोक लगाई।
प्रान्तीय आयुर्वेदिक यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने भी सरकारी सप्लाई में फेल सेम्पल वाली कंपनियों द्वारा सप्लाई दवाओं के वितरण का आरोप लगाया था जो ड्रग लाइसेंसिंग अधिकारी के 5 सितंबर 2017 के पत्र से पुष्ट हो गया कि घटिया दवाओं की आपूर्ति लगातार की जा रही थी।
इस संबंध में जब लाइसेंसिंग अधिकारी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने तीनों दवा के सेम्पल फेल होने की बात मानी।देवभूमि में नकली आयुवर्दिक दवाओं की सप्लाई के इस रैकेट की जांच हो तो गिरफ्त में कई अधिकारी आ सकते हैं। इससे अधिकारियों में हड़कंप मचा है।
सूत्र बताते हैं कि फेल सेम्पल वाली कंपनी को फिर से डेढ़ करोड़ के टेंडर दे दिए गए।सूत्रों के अनुसार यह दवा घोटाला करोड़ों रूपये का घोटाला है जिसकी यदि सीबीआई या सीआईडी जांच हो तो कई अधिकारी इसके लपेटे में आ सकते हैं।

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