एक्सक्लूसिव खुलासा

खुलासा: अरबों का भूमि घोटाला ! सचिव-मंत्री कटघरे में

कृष्णा बिष्ट। भीमताल

शराब कारोबारी को बेच डाली अरबों की  सरकारी जमीन। सचिवालय के अफसरों और मंत्रियों पर संदेह !!

उत्तराखंड मे नैनीताल जिले के अंतर्गत भीमताल में सरकार के अधिकारियों ने साजिश के तहत करोड़ों  रुपए की सरकारी जमीनें कौड़ियों के भाव शराब कारोबारी तथा अन्य को बेच दी है और सरकार है कि आंखें खोलने को तैयार नहीं। इस भूमि घोटाले में सचिवालय के दो सचिव स्तर के अधिकारी और एक मंत्री के भी शामिल होने की चर्चाएं हैं। एक मामला आईजी कुमाऊं के यहां दफन है। किंतु राजनीतिक दबाव के कारण जिन जिम्मेदार अफसरों को जेल में होना चाहिए था वह मौज कर रहे हैं। कुल मिलाकर यह घोटाला अरबों मे हो सकता है।

उदाहरण के तौर पर  भीमताल में इलेक्ट्रॉनिक आस्थान की सरकारी भूमि हिल्ट्रॉन के अधिकारियों ने एक शराब कारोबारी को बेच डाली। यह भूमि प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास के नाम पर दर्ज है। 5 मई 2017 को हिल्ट्रॉन के सहायक महाप्रबंधक एके अहलूवालिया ने MD के प्रतिनिधि के तौर पर यह जमीन शीतला उद्योग प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी।

 यह जमीन कुल 40 नाली जमीन है और इस पर भूमि भवन आदि बने हुए हैं। शीतला उद्योग इसमें बियर का उत्पादन कर रहा है। गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार में हरीश रावत ने भीमताल में ही इस कंपनी को बियर का प्लांट लगाने की अनुमति दी थी लेकिन फरसाली के ग्रामीणों के विरोध के कारण तब यह फैक्ट्री वहां नहीं खुल पाई थी।
  ऐसा नहीं है कि सरकार को इस भूमि घोटाले का पता ही न हो। लीला सुनाल नाम की एक युवती ने इस मामले की शिकायत कुमाऊं कमिश्नर से की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अपर आयुक्त संजय कुमार ने 6 अप्रैल 2017 को प्रबंध निदेशक सिडकुल और उद्योग विभाग को इस संबंध में कार्यवाही के लिए पत्र लिखा था किंतु कोई कार्यवाही इस पर नहीं हुई। उल्टे ठीक 1 महीने बाद 5 मई 2017 को यह भूमि शराब कारोबारी को बेच दी गई।
 उद्योग विभाग ने यह मामला सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के पाले में डालकर अपना दामन छुड़ा लिया। जबकि भूमि प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास के नाम पर दर्ज है।
 आइए जानते हैं जमीन का इतिहास 
28 अप्रैल 1988 को भीमताल के आणु गांव की 40 नाली भूमि इलेक्ट्रॉनिक आस्थान के लिए अधिग्रहित की गई थी और हिल्ट्रॉन को इसका कस्टोडियन बनाया गया था। 19 जुलाई 2013 को यह भूमि औद्योगिक विकास विभाग के नाम दर्ज कर दी गई थी। इस भूमि पर लीज पर एक्वा माल वाटर सॉल्यूशन नाम की कंपनी ने अपना उद्योग स्थापित करने की बात कही थी। इसके बाद चुपके से यह भूमि बियर प्लांट को बेच दी गई। एक्वामाल कंपनी की एक कर्मचारी लीला सुनाल ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से कर दी थी लेकिन अधिकारियों ने यह मामला दबा दिया।
 इस भूमि घोटाले में शासन के अधिकारी भी इन्वॉल्व हैं। अफसरों ने यह जमीन दो हिस्से में कौड़ियों के भाव शराब कंपनी शीतला उद्योग प्राइवेट लिमिटेड को बेची है। यह 40 नाली जमीन का एक हिस्सा मात्र 48,000 में बेचा गया है तो दूसरे हिस्से को ₹26,400 में बेचा गया है।
 इस पर एक्वामाल कंपनी के करोड़ों के भवन बने थे किंतु उन्हें भी 3,70,000 रुपए में बेच दिया गया।
 गौरतलब है कि बाजार भाव के हिसाब से वर्तमान में आणु गांव की एक नाली भूमि 50,000 के आसपास है। नैनीताल के जिलाधिकारी वीके सुमन का कहना है कि उन्हें इस मामले में अभी कुछ पता नहीं है। क्योंकि वह नए-नए जिला अधिकारी बने हैं। उन्होंने मामले को दिखाने का आश्वासन दिया है। आईजी कुमाऊं पूरन सिंह रावत कहते हैं कि इस पूरे मामले में FIR दर्ज करके विवेचना का काम चल रहा है। हर एक पक्ष जानने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। इस मामले की भनक लगने पर सिडकुल के तत्कालीन जीएम एसएल सेमवाल में इसकी रिपोर्ट तलब की थी और गड़बड़ी मिलने पर 9 फरवरी 2018 को भीमताल थाने में धोखाधड़ी की धाराओं में FIR भी दर्ज की गई थी। किंतु वर्तमान में हालत यह है कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट आईजी कुमाऊं को सौंप चुकी है और गड़बड़ी करने वाले नैनीताल हाईकोर्ट से गिरफ्तारी से बचने के लिए स्टे लेकर आ चुके हैं।
 तब से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस मामले में सरकार को उच्च न्यायालय में मजबूत पैरवी करनी चाहिए थी और आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र भी पेश किए जाने चाहिए थे। लेकिन लंबे समय से यह मामला जानबूझकर शासन में बैठे अधिकारियों के इशारे पर लटकाया जा रहा है।
 बड़ा सवाल यह है कि यह जमीन एक्वा माल कंपनी और सरकारी अधिकारियों ने बियर कंपनी शीतला इंडस्ट्रीज को बेची है तो फिर एक्वामाल कंपनी के जिम्मेदार लोगों का नाम FIR में क्यों दर्ज नहीं कराया गया ! प्रभावशाली लोगों का नाम छोड़कर और FIR के बाद की कार्यवाही को लंबे समय से लटका कर किसके इशारे पर किन लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। यह तफ्तीश का विषय है।
हालांकि शीतला उद्योग के अधिकारी तुषार अग्रवाल कहते हैं,-” हमारे द्वारा कोई भी जमीन खरीदी नही गई हैं, यह जमीन हिलट्रान द्वारा हमे लीज पर उत्तराखंड औद्योगिक नीति के अंतर्गत की गई, हमारे द्वारा पूर्ण स्टांप ड्यूटी जमा की गई है।”
वह कहते हैं कि उनके द्वारा कोई भी अनैतिक खरीद फरोख्त नही की गई हैं।वीरान पड़े भीमताल औद्योगिक क्षेत्र की 5 साल से बंद फैक्ट्री को दुबारा से आरम्भ किया गया ।
अग्रवाल दावा करते हैं कि फैक्ट्री आरम्भ होने से 300 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला। आने वाले समय मे स्थानीय किसानों के फलों की खपत के कारण किसानों को जबरदस्त फायदा होगा।
उनके अनुसार जमीन के लिए वर्तमान नए प्रबंध निदेशक हिलट्रान द्वारा अनापत्ति गहन जांच के उपरांत दी गई ।
शीतला उद्योग के  मालिक अपने पक्ष में जो भी दलीलें पेश करें,  सवाल  इसका नहीं है।  सवाल तो जनता के टैक्स के पैसे से  तैनात किए गए हमारे चौकीदारों की मंशा पर खड़ा होता है।
किसी शायर ने  ऐसे ही किसी मौके के लिए कहा होगा
तू इधर उधर की न बात कर ये बता कि क़ाफ़िला क्यूँ लुटा। मुझे रहज़नों से गिला नहीं तिरी रहबरी का सवाल है।
 बहरहाल देखना यह है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार अपने ही कार्यकाल में हुए इस घोटाले को लेकर अब आगे क्या रुख अपनाती है !!
पर्वतजन के गंभीर पाठकों से हमारा अनुरोध है कि हमारे संसाधन और पाठकों तक पहुंच सीमित है इसलिए जनहित की इस खबर को अधिक से अधिक शेयर करें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय भी जाहिर करें ।

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