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निशंक के रंग में रंगा समापन समारोह!

“जीवित समाज ही मना सकता है उत्सव”  – डॉ० रमेश पोखरियाल “निशंक “
सुनीता शर्मा’नन्ही’
रायवाला , देवभूमि पौराणिक सोसायटी द्वारा आयोजित सात दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव के समापन पर उत्तराखंड के पूर्व यशस्वी मुख्यमंत्री व हरिद्वार के सांसद डॉ० रमेश पोखरियाल “निशंक” ने कहा कि सोया हुआ समाज सदैव मरणासन्न की स्थिति में होता है, जबकि जाग्रत समाज ही उत्सव मना सकता है।
22से 28 जनवरी तक चले उत्तरायणी बसन्त महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर श्री निशंक ने कहा कि यह वही पुण्य प्रतापी राजा भरत की जन्म स्थल वाली गौरवशाली धरती है, जिसके नाम से हमारे देश का नाम भारत पड़ा। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री सच्चिदानंद शर्मा ने मुख्य अतिथि डॉ निशंक के संबंध में कहा कि आज निशंक मात्र एक व्यक्तित्व ही नहीं वरन विचार बन गए हैं । देश की राजनीति में ऐसे विरले ही महापुरुष हुए हैं जिनका राजनीति के साथ-साथ साहित्य व अध्यात्म के क्षेत्र में गहरा प्रभाव रहा है । आज निशंक जी के साहित्य पर  देश – विदेश के अनेकों बुद्धिजीवी शोध कार्य कर रहे है उन्होंने कहा कि यदि उनके ऊपर भी मां सरस्वती की कृपा रही तो वह भी निशंक जी कीे जीवनी पर एक पुस्तक  लिखने की अभिलाषा रखते हैं। सैनिकों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आई  विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से जूझते हुए  समय – समय पर निशंक जी ने एक निर्भीक वीर सैनिक का किरदार अदा किया है , निशंक जी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण यह है कि   विषम परिस्थितियों से जूझते हुए भी निशंक जी का जीवन-दर्शन निडरता, सहजता, सरलता और ऊर्जा का संदेश देता है। निशंक जी के बहुचर्चित उपन्यास मेजर निराला के ऊपर बन रही फिल्म जो की अति शीघ्र फरवरी 2018 में रिलीज होने जा रही है के लिए भी उन्होंने निशंक जी को अग्रिम बधाई देते हुए  कहा कि सैनिक बाहुल्य प्रदेश होने के नाते फिल्म मेजर निराला उत्तराखंड के घर – घर की कहानी है ।
गांववासियों के अनुरोध पर ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जन – जीवन से जुड़ी गंगा व जंगल से सटे हुए क्षेत्रवासियों को बाघ द्वारा निवाला बनाए जाने की गंभीर समस्या व मुआवजे के अतिरिक्त विगत लंबे समय से चली आ रही ग्राम सभा  हरिपुर कला , रायवाला , श्यामपुर , खादरी की क्षेत्रीय जनता की पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की मांग से भी अवगत कराया । जनसंख्या की दृष्टि से अत्यधिक घनत्व  वाला क्षेत्र होने के बावजूद भी यह क्षेत्र शिक्षा की दृष्टि में अत्यधिक पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। इंटरमीडिएट के बाद उच्च शिक्षा के लिए यहां के छात्र-छात्राओं को ऋषिकेश ,हरिद्वार अथवा देहरादून का मुंह ताकना पड़ता है जिसके कारण गरीबी के चलते बहुत सी प्रतिभाऐं दम तोड़ देती हैं। सांस्कृतिक मेले को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का असहयोग व उदासीनता के संबंध में जनता की शिकायत पर उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय जनता द्वारा आयोजित ऐसे विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है कि हम दलगत राजनैतिक विसंगतियों से ऊपर उठकर व एकजुट होकर अपनी संस्कृति को सजीव करने का कार्य करें । सहभागिता और सामाजिक समरसता ही हमारी संस्कृति की पहचान और हमारे विकसित जीवन का आधार स्तम्भ है। सर्वे भवंतु सुखिनाः  व वसुधैव कुटुंबकम जैसी विचारधारा ही हमें विश्व की अन्य अनेक संस्कृतियों से पृथक व महान बनाती है , जन-जन तक सामाजिक समरसता का संदेश पहुंचाने वाले हमारे यह मेले हमारी संस्कृति के संदेश वाहक ही नहीं अपितु हमारी राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार व सांस्कृतिक विरासत हैं जिन्हें हम सबको मिलकर संरक्षण, संवर्धन व सक्षम बनाना है। देवभूमि पौराणिक सोसाइटी के संस्थापक व मेले के संयोजक आचार्य सुमन धस्माना व संचालक  अजय साहू ने अपनी समिति की समस्त कार्यकारिणी की तरफ से क्षेत्रीय समस्याओं के निराकरण एवं इस मेले को राजकीय मेला घोषित करने के सुझाव हेतु मुख्य अतिथि डॉ रमेश पोखरियाल निशंक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी डॉ० निशंक जी का आशीर्वाद सहयोग व मार्गदर्शन समिति को इसी प्रकार मिलता रहेगा । भारत माता की जय घोष के साथ डॉ० निशंक  द्वारा मेले का समापन किया गया ।
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