एक्सक्लूसिव

अतिक्रमण: अधूरा छूटा अभियान,आधे मे हांपे अफसर

जिला प्रशासन पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर भेदभाव बरतने का लगा आरोप।

सब्जी मंडी का अतिक्रमण न हटाये जाने पर स्थानीय ठेली फड़ी व्यापारियों ने दी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी।

पुलिस फ़ोर्स की कमी और मजिस्ट्रेट के बिना पालिका प्रशासन मजबूर।

स्थानीय व्यापारियों ने दी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी।

गिरीश गैरोला

उत्ततरकाशी में विश्वनाथ चौक से अतिक्रमण हटाने के बाद जिला प्रशासन की सांस अब फूलने लगी हैं।  3 दिन इंतजार के बाद भी बाजार के अन्य अतिक्रमण पर कार्यवाही ना होने से गुस्साए स्थानीय व्यापारियों  ने जिला प्रशासन की कार्यवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  उन्होंने कहा की यदि एक समान कानून का पालन करते हुए सब्जी मंडी सहित अन्य अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा । गौरतलब है कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पालिका की टीम को लेकर पालिका प्रशासक डिप्टी कलेक्टर अनुराग आर्य ने भैैैरव  चौक से लेकर विश्वनाथ चौक और कोतवाली के आसपास के सभी वर्षों पुराने अतिक्रमण हटा दिए थे।  इस दौरान भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया था ।।  सामाजिक  कार्यकर्ता  अमरिकन पूरी ने अतिक्रमण हटाानेके की  कार्यवाही का समर्थन करते हुए कहा की जिला अस्पताल में एंबुलेंस जाने की दिक्कत और बाजार क्षेत्र में फायर सर्विस के सुचारु आवागमन के लिए सभी स्थानों से अतिक्रमण हटाया जाना बेहद जरूरी था।  इसके लिए हटाए गए अतिक्रमण वाले स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण न हो इसके  लिए व्यवस्थाएं की जानी चाहिए,  किंतु उन्होंने इस बात पर आक्रोश जताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही विश्वनाथ चौक पर जाकर समाप्त हो गई और सब्जी मंडी की तरफ रुख करते ही जिला प्रशासन की सांसें फूलने लगी है। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में अतिक्रमण के खिलाफ  एक समान  कानून से कार्यवाही की जानी चाहिए।  इस दौरान विश्वनाथ चौक पर बरसों से अपने खोकों  के जरिए व्यापार से परिवार का पालन कर रहे व्यापारियों ने जिला प्रशासन पर भेदभाव बरतने का आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि सब्जी मंडी हटाए जाने की सूचना मिलते ही सब्जी मंडी व्यापारियों ने अपने दुकानें बंद कर पालिका कार्यालय में अपना विरोध प्रदर्शन किया।  उन्होंने आरोप लगाया की पालिका द्वारा दुकान निर्मित किए जाने के लिए उनसे 50 हजार  से डेढ़ लाख रुपए प्रति व्यापारी जमा करवाए गए हैं।  इसके अतिरिक्त प्रत्येक व्यापारी से मासिक किरायानामा भी तय किया गया है , लिहाजा वे किरायेदारी एक्ट में आते हैं न कि अतिक्रमण में।

इस बारे में जब नगरपालिका बाराहाट उत्तरकाशी के अधिशासी अधिकारी सुशील कुमार कुरील से पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि सब्जी मंडी में व्यापारियों से स्थाई दुकानों के लिए धनराशि जमा करवाई गई है। जहां फेब्रिकेटेड दुकानें बनाई जानी है जिसके लिए सब्जी मंडी स्थल को खाली कराया जाना बेहद जरूरी है।  विश्वनाथ चौक की तर्ज पर सब्जी मंडी में अतिक्रमण कब हटेगा इसके जवाब में अधिशासी अधिकारी ने कहा कि पुलिस के सीओ ने उन्हें  बताया है कि इस वक्त उनके पास पर्याप्त पुलिस फोर्स मौजूद नहीं है लिहाजा बिना मजिस्ट्रेट और पर्याप्त पुलिस फोर्स के वह अतिक्रमण हटाने नहीं जा सकते।

इधर पूर्व में तोड़े गए अतिक्रमणकारी व्यापारियों ने सब्जी मंडी को  न हटाए जाने पर छात्रों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है । अब पालिका को लेकर जिला प्रशासन की स्थिति भोले शंकर की सी  हो गई है जिसे अपने निर्णय को न तो निगलते बन रहा है और  न उगलते ही। जाहिर है कि या तो विश्वनाथ चौक में बरसों से जमे खोका धारियों को भी प्रशासन को दुकानें आवंटित करनी होंगी अथवा सब्जी मंडी  समित अन्य अतिक्रमणों को भी हटाना होगा।

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