धर्म - संस्कृति

भगवान भरोसे गंगोत्री! पर्वतजन की पहल पर बोले कप्तान, होगा वेरिफीकेशन

पुलिस के पास नही रहती कोई जानकारी।
कपाट बंद होने के बाद कितने लोग हैं धाम में कोई रिकॉर्ड नही।
गिरीश गैरोला उत्तरकाशी।
20 अक्टुबर को गंगोत्री धाम के कपाट सुबह 11:40 पर बंद ही जायेंगे । 6 महीने मा गंगा की डोली मुखवा गाव में निवास करती है। कपाट बंद होने के साथ ही गंगोत्री धाम में सभी दुकाने भी अगले सीजन खुलने तक बंद हो जाती है । इस दैरान धाम में कितने और कौन लोग निवास करते है उसका कोई रिकॉर्ड पुलिस अथवा प्रशासन के पास नही रहता है।
गंगोत्री व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतेंद्र सेमवाल ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से शीतकाल में धाम में निवास करने वाले सभी लोगों का बद्रीनाथ धाम की तर्ज व्योरा रखने की मांग की है। गौरतलब है कि गगोत्री धाम हिन्दू धर्म की आस्था का प्रतीक होने के साथ चीन सीमा से भी लगा हुआ है।
एसडीम भटवाड़ी देवेंद्र नेगी ने बताया कि 15 नवंबर तक भोजवासा में पुलिस की टुकड़ी मैजूद रहती है। गंगोत्री धाम से लगे ट्रैक रूट बंद होने के बाद ये पुलिस कर्मी भी वापस आ जाते हैं।
पुलिस के सीओ मनोज ठाकुर ने बताया कि धाम में कपाट बंद होने के बाद बर्फवारी के बाद भी कुछ साधु सन्यासी तप और साधना के नाम पर धाम में ही निवास करते है, किंतु कितने लोग यहां रहते हैं और कब तक रहते है इसका रिकॉर्ड पुलिस के पास नही रहता है। उन्होंने इस संदर्भ में उच्च अधिकारियों से बात करने की बात कही है।
पुलिस कप्तान ददन पाल ने माना कि अब तक गंगोत्री धाम में कपाट बंद होने के बाद निवास करने वालों का कोई रिकॉर्ड नही रखा जा रहा था।  किंतु अब इस बार से वे धाम में शीतकाल में निवास करने वालो का पुलिस सत्यापन करवाएंगे।
उन्होंने बताया कि गंगोत्री धाम में शीतकाल में भी पुलिस की टीम मौजूद रहेगी।
हैरान करने वाली बात ये है कि नगर और कस्बो में रहने वाले बाहरी लोगों का सत्यापन पुलिस करती है किंतु धाम की सुरक्षा भगवान भरोसे ?

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