एक्सक्लूसिव पहाड़ों की हकीकत

यहां सड़क के अभाव में बेटी ब्याहने को तैयार नही लोग

गिरीश गैरोला

जंगल को पालने वाले ग्रामीणों के खिलाफ ही वन अधिनियम।दर्द-अलग थलग पड़े ग्रामीण।वोट लेने वालों ने भी फेर दी नजर। सड़क की मांग को लेकर एक महीने से चल रहा धरना ।सड़क के अभाव में गांव मे बर्बाद हो रही दूध, दही, घी और सब्जियां।आजादी की लड़ाई की तर्ज पर आंदोलन की राह पर गांव के वरिष्ठ नागरिक।

उत्तरकाशी जनपद के यमनोत्री विधानसभा अंतर्गत गमरी पट्टी के पिपलखंडा गांव मे  विगत एक महीने से चल रहा धरना क्रमिक अनशन में बदलकर एक महीने का समय पूर्ण कर चुका है किन्तु न तो जिला प्रशासन उनकी समस्या का समाधान कर सका और न वोट लेने वाले पंचायत प्रतिनिधि और विधायक।

आंदोलनकारी शिव शंकर पैन्यूली की माने तो वे वर्ष 2013-14 से 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलित हैं। किंतु हर बार तीन महीने का खोखला आश्वासन पर आंदोलन समाप्त करवा दिया जाता है। लिहाजा इस बार वे आर-पार की लडाई के मूड में है और सड़क का काम शुरू होने तक अथवा लिखित मिलने पर ही धरना समाप्त करंगे।

इस दौरान धरने पर बैठे बुजुर्ग शेर सिंह की तबियत बिगड़ने पर पहले जिला अस्पताल और  फिर देहरादून रैफर किया गया। किन्तु आंदोलनकारियों का धैर्य नही टूटा उनके स्थान पर कुछ अन्य बुजुर्ग हड़ताल पर डट गए हैं।

गांव की  महिला ज्ञाना देवी कहती है कि वोट लेते समय महंगी गाड़ियों में विधायक उनके पास आये थे और और पूरे इलाके ने बीजेपी के पक्ष में एक तरफा वोटिंग की थी किन्तु अब कोई उनकी नही सुन रहा है। उनका दर्द ये है कि उलण गांव तक सड़क नही होने से गांव में पैदा हो रहा दूध , घी, मट्ठा और शब्जिया बाजार तक नही पहुंचने से बेकार खराब हो रही है। स्कूल खाली हो चुके हैं और पढ़ने के लिए बाजारों के रुख कर चुके बच्चे भी गांव लौटने को तैयार नही। लिहाजा एक सड़क न होने के चलते वे विकास की दुनिया से पिछड़ गए है।

गांव के ही राम व्यास कहते हैं कि 11 किमी दूर उनका गांव में बड़ा मकान है किंतु  बच्चे वहां रहने को तैयार  नही है । 86 वर्षीय धरने पर बैठे बुजुर्ग पूर्णानंद कहते है कि उन्होंने आजादी की लड़ाई देखी थी और वर्षो बाद स्वराज में भी सड़क की मांग के लिये फिर उसी अंदाज में धरने के लिए आगे आने की मजबरी है । शेरो शायरी वाले अंदाज में खुद की सरकार से वे सड़क की मांग कर रहे है ताकि लोग उनके गाव में बेटी व्याहने में संकोच न करे । उनके रोजगार के लिए बाहर गए बेटे भी गांव  उनसे मिलने आ सके।

गौर करने वाली बात ये है कि लोक निर्माण विभाग के अनुसार  तीन पार्ट में उपलब्ध कराई गई जमीन के दो हिस्सों को तो स्वीकृति मिल चुकी है किंतु तीसरे हिस्से को गूगल नही उठा पा रहा है। आंदोलन के संचालक शिव शंकर पैन्यूली खुद bjp कार्यकर्ता होने के बाद भी धरने को मजबूर है।  बतौर पैन्यूली आल वेदर रोड के लिए आधे घंटे में 500 पेड़ काटे जा सकते है और कई किमी सड़क बनाई जा सकती है तो ग्रामीण इलाकों से भेदभाव क्यों? उन्होंने  बताया कि आंदोलन को एक  महीन पूरा हो गया है अगली कड़ी में आगामी 26 ,27 और 28 फरवरी को संबंधित विभागो में ताला बंदी की जाएगी और 5 मार्च से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल सुरु की जाएगी।

हैरान करने वाली बात ये है कि जंगल को पालने और बड़ा करने वाले ग्रामीणों के मार्ग में वही वन अधिनियम अब आड़े आने लगा है ।

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