एक्सक्लूसिव पहाड़ों की हकीकत

NIM के  जंगलों में लाठी डंडों से लैंस पुलिस को देखकर इलाके में सनसनी

गिरीश गैरोला 
उत्तरकाशी के डांग और पोखरी गांव में सड़क निर्माण को लेकर गहराया  विवाद ।
  उत्तरकाशी मुख्यालय से लगे पोखरी गांव को डांग गांव से  जोड़ने की कवायद पिछले 12 सालों से जमीन पर नहीं उतर सकी। दो गांवों का विवाद  हाई कोर्ट की चौखट तक पहुंचने के बाद भी कोई सहमति नही बन सकी, जिसको लेकर पोखरी गाव के ग्रामीण  चुनाव बहिष्कार भी कर चुके हैं। मामले में कोई पहल न होती देख पोखरी गांव के ग्रामीण निम बैंड से पोखरी गांव तक सड़क निर्माण की अपनी पुरानी मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में धरने पर डटे हैं तो जबाब में डांग के ग्रामीण इस स्थान पर सड़क निर्माण में कटने वाले हरे पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांध कर इनकी रक्षा का वचन ले रहे हैं।
 मामला पर्यावरण सुरक्षा का देखते हुए पोखरी के ग्रामीणों ने इस सड़क निर्माण में कटने वाले 469 चीड़ के पेड़ों के एवज में 650 बांज बुरांस के पेड़ों का रोपण कर खुद को भी पर्यवरण प्रेम का संदेश देने की कोशिश की। मामले को कोई बीच का रास्ता न निकलते देख डीएम ऊत्तरकाशी डॉ आशीष चौहान ने adm पीएल शाह, अधिक्षण अभियंता सिंचाई विभाग , अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग और एसडीएम की एक संयुक्त समिति बनाकर सभी संभावित स्थलों से सड़क निर्माण की संभावना पर सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
बुद्धवार को गांव के पास जंगल में लाठी डंडों से लैस पुलिस फ़ोर्स को देखकर डांग के ग्रामीण भड़क गए।
एनडी जगूड़ी ने इसे सरकारी आतंकवाद करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार खनन और वन माफियाओं से दबाव में ग्रामीणों को डराना चाहती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में डांग गांव से पोखरी को सड़क से जोड़ने का प्रस्ताव उन्ही के द्वारा दिया गया था किंतु अब विभाग माफियाओं के दबाव में जबरदस्ती एनआईएम बैंड से पोखरी तक सड़क बनाने पर तुला हुआ है।
सरकारी आदेश का हवाला देते हुए जगूड़ी ने बताया कि सड़क से एक किमी दायरे में आने वाले गांवों को सड़क से ही जुड़ा हुआ माना जाता है।उसके बाद भी घर तक सड़क पहुंचने की जिद को देखते हुए डांग गांव के ग्रामीणों ने अपने खेत काटते हुए खुद श्रमदान कर अपने गाँव डांग से पोखरी तक सड़क निर्माण कर डाला जिसे विभाग उचित ढाल न होने की बात कहकर बहकाने की कोशिश कर रहा है जबकि हल्द्वानी – नैनीताल, देहरादून – मसूरी , राड़ी टॉप, माही डांडा सड़क में इसी तरह का  स्लोप होना बताया गया है । उन्होंने मांग की कि ग्रामीणों के श्रम दान से तैयार सड़क पर विभाग सुरक्षा दीवार बनाकर ब्लैक टॉप करे और विवाद को समाप्त करे।
    वहीं पोखरी के ग्रामीण भी निम बैंड से ही पोखरी तक सड़क निर्माण की अपनी मांग को लेकर धरने पर डटे हैं । पोखरी गांव के बलवीर सिंह कैंतुरा ने बताया कि डांग गांव के लोग हाई कोर्ट में दर्ज किए गए मामले में हार चुके हैं और न्यायालय ने इसी तरफ से सड़क निर्माण के निर्देश विभाग को दिए थे और यदि हाई कोर्ट के आदेश का पालन नही हुआ तो वे आंदोलन तेज करेंगे।
 इसके जबाब में डांग गांव के अभिषेक जगूड़ी ने बताया कि हाईकोर्ट ने निम बैंड से सड़क बनाने की अनुमति जरूर दी थी किन्तु एक शर्त भी जोड़ी थी कि पूर्व में निर्धारित 469 पेड़ों से एक भी पेड़ अधिक नही कटना चाहिए जबकि कोर्ट द्वारा नियुक्त कमिश्नर जय प्रकाश नौटियाल ने अपनी रिपोर्ट में कोर्ट को साफ कहा था कि इस तरफ से सड़क निर्माण में करीब 750 पेड़ काटे जायेंगे। उन्होंने बताया कि पेड़ों की ये गिनती वर्षो पुरानी है तब से लेकर आज तक कई नए पेड़ भी इस इलाके में उग आए हैं लिहाजा इस तरफ से सड़क का निर्माण नही किया जा सकता है।
दोनो गांवों के विवाद में जिला प्रशासन के लिए एक ओर कुंआ तो दूसरी तरफ खाई साबित हो रही है। फिलहाल संयुक्त समिति ने सर्वे शुरू कर दिया है। अब देखना है कि समिति किसी एक पक्ष में फैसला देती है या फिर कोई बीच का रास्ता निकालती है।

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