खेल पर्यटन

गुड न्यूजःउत्तरकाशी मे नेशनल लेवल वाटर स्पोर्ट्स शुरू।

जोशियाड़ा झील बन सकती है खेल,  पर्यटन और रोजगार के लिए मील का पत्थर। झील में रुका हुआ और  बहता हुआ पानी एक साथ होने से बनी झील की विशेषता । कयाकिंग और सलालम दोनो खेल हो सकते है एक साथ । उत्तराखंड है वाटर स्पोर्ट्स कयाकिंग सलालम की जन्म स्थली। सूबे में अकेली वाटर स्पोर्ट इंडस्ट्री जुटाती है 200 करोड़ का राजस्व।

गिरीश गैरोला

मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना की खाली पड़ी झील को नौकायन के साथ वाटर स्पोर्ट्स के जरिये खेल ,पर्यटन और रोजगार का साधन बन सकती है। डी एम उत्तरकाशी के प्रयासों से यहां आयोजित हो रही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शामिल हुए देश के ओलंपिक वाटर स्पोर्ट्स के खिलाड़ियों ने इसे भारत की सबसे बेहतरीन स्पोर्ट्स झील बताया है। चार धाम यात्रा के दौरान यहां पर्यटक आने से रोजगार मिलेगा वही ऑफ सीजन में खेलों की तैयारी कर ओलंपिक और एशियाई खेलों में देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ी तैयार किये जा सकते हैं। जानकारों की माने तो एथलीट और तैराकी के बाद तीसरे नंबर पर जल क्रीड़ा ऐसा खेल है जो ओलंपिक में देश के लिए 22 गोल्ड मैडल बटोर सकता है।

माघ मेले में पर्यटकों को रोमांचित करने के उद्देश्य से जोशियाड़ा झील में  शुरू की गई नौकायन अब वाटर स्पोर्ट्स की दिशा में मंजिल को चूमने की तैयारी में है।  उत्तरकाशी की जोशियाड़ा झील में शुरू हुई वाटर स्पोर्ट्स की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से इसकी शुरुआत भी हो गई है । राष्ट्रीय स्तर की इस वाटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि शामिल यमुनोत्री के विधायक केदार सिंह रावत ने डीएम उत्तरकाशी डॉक्टर आशीष चौहान के प्रयासों की सराहना करते हुए भरोसा दिलाया कि जोशियाड़ा  झील की तरह मनेरी और चिन्यालीसौड़ में भी वाटर स्पोर्ट्स का दायरा बढ़ा कर स्थानीय बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर तलाशे जा सकते हैं ।

इस मौके पर उत्तरकाशी पहुंच गए ऑल इंडिया रैंकिंग कैनो स्प्रिंट के सचिव और विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने बताया कि भारत में उत्तराखंड ऐसा राज्य है जिसे वाटर स्पोर्ट्स कैनोइंग – राफ्टिंग की जन्मभूमि माना जाता है।  उन्होंने कहा वाटर स्पोर्ट्स के भारत में पहुंचने का एक स्वर्णिम इतिहास है। उन्होंने बताया कि वेस्टर्न म्यूजिक ग्रुप बीटल्स द्वारा आज से 50 वर्ष पहले वाटर स्पोर्ट्स  यहां स्थापित किया गया था।  उन्होंने कहा यह  एथिलीट  और स्विमिंग के बाद तीसरे नंबर पर मेडल लाने वाला यही वाटर स्पोर्ट्स है स्टिल  और वाइल्ड वाटर में कैनोइंग, कयाकिंग , सलालम और राफ्टिंग मिलाकर कुल 22 ओलंपिक गोल्ड मेडल इन्ही जल क्रीड़ा से ही जीते जा सकते हैं।  उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वाटर स्पोर्ट्स में बेहतर काम कर रहा है । साथ ही उत्तरकाशी की जोशियाड़ा  झील वाटर स्पोर्ट्स के लिए बेहतर स्थल साबित हो सकती है । उन्होंने कहा कि झील में एक साथ  रुका हुआ और बहता हुआ पानी एक साथ मौजूद होने के साथ ही  झील के दोनों तरफ से सड़क से पहुुंच  मार्ग मौजूद है और झील के पानी की गुणवत्ता उत्तम है।  उन्होंने कहा कि इस स्थान पर खेल,  पर्यटन और रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

जोशियाड़ा  झील में स्पोर्ट्स के लिए केदारनाथ विधायक और एसोसिएशन के सचिव मनोज रावत ने डीएम आशीष चौहान  के प्रयासों की सराहना की है , उन्होंने कहा कि वाइट वाटर राफ्टिंग में आज भी उत्तराखंड में पर्यटन से पैसा लाने वाला सबसे बड़ा स्रोत है । उन्होंने कहा कि अकेले वाटर स्पोर्ट्स इंडस्ट्री की 200 करोड़ की हिस्सेदारी है। लेकिन चिंता की बात यह है वाटर स्पोर्ट्स की ये इंडस्ट्री ऋषिकेश और उसके आसपास तक सीमित है । जबकि नदी के ऊपरी हिस्से में जहां वाइट वाटर  की मौजूदगी अधिक है, ऐसे जनपद उत्तरकाशी, चमोली और बागेश्वर में भी इसकी शुरुआत किये जाने की जरूरत है।

 

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