राजकाज

विश्वभर की वानिकी में उपयोग की जा रही तकनीकियों का मूल्यांकन

उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद
विज्ञान धाम, झाजरा में हुआ मंथन

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अन्तर्गत प्रौद्यागिकी सूचना, पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन परिषद (टाईफैक) द्वारा वानिकी के क्षेत्र में तकनीकि आवश्यकता मूल्यांकन (ज्छ।) हेतु संचालन समिति की पांचवी बैठक आज यूकाॅस्ट, विज्ञान धाम में सम्पन्न हुई। संचालन समिति का मुख्य उद्देश्य विश्व भर में वानिकी के क्षेत्र में उपयोग की जा रही उन्नत तकनीकियों का मूल्यांकन कर उन्हे भारत में तथा विशेषकर हिमालयी क्षेत्र में उपयोग को लेकर मंथन करना था। समिति द्वारा इन उन्नत तकनीकियों का विकासात्मक लाभ, जलवायु परिवर्तन, बाजार, पर्यावरण सुरक्षा तथा नीतिगत ढांचे के स्तर पर मूल्यांकन किया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने वानिकी के क्षेत्र में उत्पादकता के लिये 18, जलवायु परिवर्तन के लिये 6, वन संरक्षण के लिये 18, जैव विविधता संरक्षण के लिये 7, कार्बन सर्विस के लिये 13, वन मापन के लिये 13, आजीविका सुधार के लिये 16 तथा कास्ठ उद्योग के लिये 7 उन्नत तकनीकियों सहित कुल 98 तकीनीकियों के ऊपर मूल्यांकन किया गया। इस आंकड़ों के आधार पर भारतीय परिस्थितियों में इनके प्रयोग किये जाने की आम राय बनेगी तथा इन उन्नत तकनीकियों को लागू किया जा सकेगा।

यूकाॅस्ट, देहरादून केे प्रबन्धक जनसम्पर्क अमित पोखरियाल ने बताया कि समिति में डा0 जगदीश किशवान, पूर्व महानिदेशक, आई0सी0एफ0आर0ई0, अध्यक्ष डा0 राजेन्द्र डोभाल, महानिदेशक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, सदस्यय प्रो0 ए0एन0 पुरोहित, पूर्व कुलपति, गढ़वाल विश्वविद्यालयय डा0 गौतम गोश्वामी, वैज्ञानिक, टाईफैक, सदस्य. मनीष कुमार, वैज्ञानिक, टाईफैक, सदस्य प्रो0 एन0पी0 टोडरिया, गढ़वाल विश्वविद्यालयय डा0 अमित पाण्डे, डा0 राजीव पाण्डे, डा0 शामिला कालिया, वैज्ञानिक, एफ0आर0आई0य डा0 राजेश, वैज्ञानिक, भारतीय वन सर्वेक्षण सहित विभिन्न संस्थाओं के वैज्ञानिक एवं बुद्धिजीवी उपस्थित हुये।

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