राजनीति

भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस पर फिर फंसी भाजपा

भाजपा के दिखाने के दांत अलग और खाने के अलग

भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन वाली सरकार हर दिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बड़े-बड़े बयान देती है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जीरो टोलरेंस वाली सरकार है और इस पर कोई भी रियायत नहीं बरती जाएगी। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाने वाली उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी अब अपने लगाए आरोपों से ही भागने लगी है। कांग्रेस सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोपों को अब अपनी सरकार आने पर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
यह पहला अवसर है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अब भारतीय जनता पार्टी के लोग अपने लगाए गए आरोपों पर बयान देने भी नहीं आ रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल ने ऊर्जा विभाग के घोटालों के नाम पर 23 बार व्यक्तिगत रूप से प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाए, किंतु प्रदेश में अपनी डबल इंजन की सरकार आने के बाद विनय गोयल अब चुप्पी साध गए हैं।


कांग्रेस सरकार के दौरान उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन एमडी एसएस यादव की एक सीडी आई थी। जिसमें यादव रिश्वत लेते हुए दिखाई दिए। विनय गोयल ने इस संदर्भ में न सिर्फ जांच की मांग की, बल्कि जांच के लिए भी सरकार को लिखा। जिस सीडी को विनय गोयल ने आधार बनाया था, उसकी फॉरेंसिक रिपोर्ट आ चुकी है।
जांच अधिकारी पंकज कुमार पांडेय के अनुसार चंडीगढ़ की लैब से जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। विनय गोयल द्वारा की गई शिकायत पर तब जांच अधिकारी नीरज खैरवाल ने उक्त प्रकरण की जांच की। आश्चर्यजनक रूप से एसएस यादव उत्तराखंड से राजस्थान पहुंच गए, किंतु किसी ने इस पर बोलना अब उचित नहीं समझा।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और देहरादून के महानगर अध्यक्ष विनय गोयल को जांच अधिकारी द्वारा बयान दर्ज करने के लिए लिखित पत्र भेजा गया है, किंतु जीरो टोलरेंस में विनय गोयल अब बयान देने से कतरा रहे हैं। जिस व्यक्ति ने भ्रष्टाचार की शिकायत की हो, वह व्यक्ति यदि बयान देने से मुकर जाए तो समझा जा सकता है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ किस प्रकार का जीरो टोलरेंस चल रहा है।
रुपए से भरे पैकेट लेने वाले तत्कालीन एमडी एसएस यादव पर अब ऐसा क्या प्रेम विनय गोयल को जाग गया है, या कहें कि एसएस यादव को भी भाजपा के असली वाले जीरो टोलरेंस से अवगत करा दिया गया है।
आईएएस अधिकारी नीरज खैरवाल थे और अब दूसरे आईएएस अधिकारी पंकज कुमार पांडेय इस मसले पर जांच अधिकारी  हैं। विनय गोयल का अब बयान देने पर हीलाहवाली करना तो गंभीर है ही, साथ ही साथ यह प्रकरण इसलिए भी अधिक गंभीर है, क्योंकि ऐन वक्त पर विनय गोयल का इस प्रकार पलटी खाना उत्तराखंड के लिहाज से कतई सही नहीं है। यदि विनय गोयल इस प्रकरण पर आधिकारिक बयान नहीं देते हैं तो विनय गोयल द्वारा टेलीविजन चैनलों और समाचार पत्रों को दिए गए आज तक के बयानों को कैसे सत्य माना जाएगा। यदि विनय गोयल इस प्रकरण पर बयान दर्ज नहीं कराते हैं तो निकट भविष्य में वे सरकार के पक्ष में कोई बात कहें या विपक्ष के खिलाफ कोई आरोप लगाएं तो उन पर कोई कैसे विश्वास करेगा !
कुल मिलाकर इस प्रकरण पर विनय गोयल का बैकफुट पर आना भारतीय जनता पार्टी के भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की असलियत को तो सामने ला ही गया।

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