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ऐसे लग रहा खजाने को फटका

सरकारी निर्माण कार्यों में अवैध रूप से प्रयुक्त सामग्री और साधनों के कारण सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होता है, किंतु जिम्मेदार विभाग इस पर मौन रहते हैं। लघु सिंचाई विभाग का हरिद्वार में संपन्न निर्माण कार्य इसका उदाहरणभर है।

प्रमोद कुमार डोभाल

विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों में निर्माण सामग्री का प्रयोग अवैध तरीके से किया जा रहा है। अवैध खनन सामग्री का प्रयोग होने से सरकारी राजस्व की लगातार हानि हो रही है। ऐसा ही एक मामला हरिद्वार में लघु सिंचाई विभाग के अंतर्गत पकड़ में आया है।
हरिद्वार के लघु सिंचाई खण्ड में हो रहे निर्माण कार्य की सूचना जब इस संवाददाता द्वारा आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई तो तहकीकात में कई चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में आए। विभाग के साथ मिलीभगत करके ठेकेदार खनन के लिए जारी रवन्ना प्रपत्रों पर तो घोटाला कर ही रहे हैं, साथ ही खनन सामग्री ढोने वाले वाहनों में भी फर्जीवाड़ा करके सरकार को जमकर राजस्व का चूना लगा रहे हैं।
फर्जी नंबर के ट्रक
लघु सिंचाई खण्ड हरिद्वार के सहायक अभियंता कार्यालय से प्राप्त सूचना के अनुसार ठेकेदार ने जिन ट्रकों से खनन सामग्री लाया जाना दर्शाया है, उन ट्रकों के नंबरों की तस्दीक जब परिवहन कार्यालय से की गई तो पता चला कि उन ट्रक नंबरों पर कोई ट्रक पंजीकृत नहीं है। एक ट्रक नंबर खेती के कार्यों के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले ट्रैक्टर के नाम पर पंजीकृत था तो दूसरे ट्रक नंबर का कोई विवरण परिवहन कार्यालय नहीं दे पाया। साफ है कि दूसरा वाहन या तो फर्जी नंबर पर चल रहा है अथवा दूसरे वाहन द्वारा केवल कागजों में ही खनन सामग्री लाया जाना दर्शाया गया है।
इन खनन सामग्री के लिए १० अप्रैल को जो रवन्ने जारी किए गए, उनमें भी काफी गड़बडिय़ां हैं। उदाहरण के तौर पर रवन्ना संख्या एम७२४५५९ १० अप्रैल को जारी किया गया है, जबकि रवन्ना संख्या एम६६४५६१ १३ अप्रैल को जारी किया गया है।
रवन्ने में गड़बड़ी
सवाल उठता है कि क्रम संख्या के हिसाब से बाद का नंबर पहले कैसे जारी कर दिया गया? इससे जाहिर होता है कि या तो इन रवन्नो पर कोई सामग्री नहीं आई अथवा खनन सामग्री ले जाने वाले रवन्नो का जमकर दुरुपयोग करते हैं।
इसी तरह से १० अप्रैल को मात्र डेढ़ घंटे के अंतराल पर दो रवन्ने एक ही वाहन के काटे गए हैं। इससे जाहिर है कि खनन सामग्री संभवत: लायी ही नहीं गई, सिर्फ भुगतान के लिए यह कवायद की गई। निर्माण कार्य हेतु एक वाहन संख्या यूके०८सीए-८२६७ में सामग्री लाना दर्शाया गया है, जबकि इस नंबर पर कोई भी वाहन पंजीकृत नहीं है।
मिलीभगत से खनन
इस संवाददाता ने इस घटना का संज्ञान विभागीय खनन अधिकारियों को भी कराया, किंतु न तो राजस्व की चोरी करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्यवाही हो पाई, न ही इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों से उनकी कैफियत पूछी गई। हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में हो रहे लघु सिंचाई विभाग के कार्यों के लिए सज्जनपुर पीली हरिद्वार से खनन सामग्री लायी जा रही थी। यह मामला वर्ष २०१४ से जांच के लिए लंबित है, किंतु समस्त सबूत दिए जाने के बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्यवाही तो दूर, पूछताछ तक नहीं हो सकी है।

ठेकेदार ने जिन ट्रकों से खनन सामग्री लाया जाना दर्शाया है, हकीकत में उन ट्रकों के नंबरों पर कोई ट्रक पंजीकृत ही नहीं है। एक ट्रक नंबर खेती के कार्यों लगे ट्रैक्टर के नाम पर पंजीकृत था तो दूसरे ट्रक नंबर का कोई विवरण परिवहन कार्यालय में दर्ज नहीं है।

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