एक्सक्लूसिव

ब्यूरोक्रेट का पलटवार, छुटभैयों के आए बुरे दिन

पिछले कुछ दिनों से ब्यूरोक्रेट पर नकेल कस रहे राजनीतिक लोगों पर अब ब्यूरोक्रेट ने पलटवार कर दिया है। एक ओर जहां रुद्रपुर में भाजपा महामंत्री ने धमकाया था कि वह किसी से नहीं डरते, वहीं उत्तरकाशी की जिला पंचायत अध्यक्ष ने सदस्यों के साथ मिलकर मुख्य विकास अधिकारी को बंधक बना लिया था। यही नहीं देहरादून में 11 अप्रैल को देहरादून के बगराल गांव में ग्राम समाज की जमीन पर अतिक्रमण हटाने गए एसडीएम प्रत्यूष सिंह को भूमाफियाओं ने पीट दिया था। इन घटनाओं को देख ब्यूरोक्रेट अब पॉलिटिकल लोगों के साथ ही माफिया से सख्ती से निपटने का मूड बना चुका है।
इस कड़ी में सर्वप्रथम उत्तरकाशी की जिला पंचायत अध्यक्ष जसोदा राणा सहित १8 सदस्यों पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। जिला पंचायत सदस्यों के विरुद्ध सीडीओ विनीत कुमार ने थाना कोतवाली में नामजद तहरीर दर्ज कराई। इस पर संबंधित लोगों के खिलाफ आईपीसी 147, 332, 342, 353, 504, 506, 120 बी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
ज्ञात हो कि गत बुधवार को जिला पंचायत सदस्यों ने मुख्य विकास अधिकारी को बंधक बना लिया था। घटना के बाद पुलिस समेत डीएम व एसपी समेत तमाम आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद पुलिस ने मशक्कत कर मुख्य विकास अधिकारी को उनके कब्जे से छुड़ाया।

दूसरी घटना रुद्रपुर की है, जहां बीजेपी विधायक राजकुमार ठुकराल ने महिलाओं के साथ बदसलूकी की थी। जब यह मामला मीडिया में उछला तो प्रदेशभर में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की खूब किरकिरी हुई। हालांकि भाजपा के हस्तक्षेप से विधायक ठुकराल को क्लीनचिट दे दी गई, लेकिन ऊधमसिंहनगर पुलिस ने विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है।
यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि अब तीसरी घटना भाजपा महामंत्री द्वारा पुलिस कर्मी को ड्यूटी के दौरान धमकाने का सामने आया है। यह मामला 9 अप्रैल का है। इस दिन पंतनगर यूनिवर्सिटी में नेपाल के प्रधानमंत्री का कार्यक्रम था। वीवीआईपी के चलते क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा की गई थी। इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री विवेक सक्सेना विश्वविद्यालय के गेट पर एक पुलिस कर्मी के साथ बदसलूकी करने लगे और एसएसपी को फोन करने की बात कर उसे धमकाने लगे। वह धमकी देते हुए कह रहे थे कि वो किसी से नहीं डरते।
इस संबंध में ऊधमसिंहनगर के एसएसपी डॉ. सदानंद दाते कहते हैं कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया है और इन्वेस्टिगेशन चल रही है।
तीसरी घटना प्रदेश की अस्थायी राजधानी देहरादून की है, जहां 11 अप्रैल को राजपुर थाना क्षेत्र में पडऩे वाले बगराल गांव में ग्राम समाज की जमीन पर अतिक्रमण की सूचना पर पहुंचे एसडीएम प्रत्यूष सिंह व एक अन्य व्यक्ति को भूमाफियाओं ने पीट दिया।
बताते चलें कि बगराल गांव में कुछ बाहर के लोगों द्वारा काफी जमीन कब्जायी गयी है और गांव वालों का रास्ता भी बन्द कर दिया गया है। इस पर एसडीएम जैसे ही विवादास्पद जगह पर पहुंचे, असम के रहने वाले चिरंजीव कुमार शर्मा तथा राजीव शर्मा ने उन पर हमला कर दिया। इससे एसडीएम के कपड़े फट गए, जबकि दूसरे व्यक्ति के सिर में काफी चोट आ गई। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने एसडीएम को छुड़ाया। इस घटना से स्थानीय ग्रामीणों में काफी रोष देखा गया। इस पर उनके खिलाफ तत्काल कार्यवाही की गई और दस लोगों को जेल भेज दिया गया है।
इन तीनों घटनाओं से एक संदेश तो गया ही है कि अधिकारी सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप और दबाव एक सीमा तक ही बर्दाश्त कर सकते हैं। इस कार्यवाहियों से सत्ता की आड़ में दबंगई करने वाले नेताओं को एक सबक तो मिला ही है।

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