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उत्तराखंड के यह सपूत बने हैं एयर इंडिया के सीएमडी ! एक शेयर तो बनता है

 उत्तराखण्ड के एक और लाल को मिली देश में बड़ी जिम्मेदारी,
थल सेनाध्यक्ष विपिन रावत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रॉ चीफ अनिल धस्माना और सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी के बाद उत्तराखण्ड के एक और लाल को देश में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। देवभूमि के एक और ने लाल प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप सिंह खरोला को सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया का नया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) नियुक्त किया गया है।
कर्नाटक कैडर के अधिकारी खरोला कंपनी में पिछले तीन महीने से अंतरिम चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के तौर पर काम कर रहे राजीव बंसल का स्थान लेंगे. खरोला की नियुक्ति से कुछ दिन पहले ही बंसल को तीन महीने का विस्तार दिया गया था.
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि खरोला को एयर इंडिया का नया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है. अभी वह बेंगलुरु मेट्रो रेल निगम के प्रबंध निदेशक हैं.
एयर इंडिया में शीर्ष पद पर यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जबकि सरकार राष्ट्रीय विमानन कंपनी के रणनीतिक विनिवेश के तौर तरीकों को अंतिम रूप दे रही है।
प्रदीप सिंह खरोला 1985 बैच के कर्नाटक कैडर के सीनियर आईएएस अफसर हैं. वो बेंगलुरु मेट्रो के मैनेजिंग डायरेक्टर भी रह चुके हैं.
प्रदीप सिंह खरोला पर भारी-भरकम घाटे से जूझ रही एयर इंडिया को बाहर निकालने की चुनौती है. बता दें कि सरकार ने एयर इंडिया में विनिवेश की प्रक्रिया तेज कर दी है. इसके लिए कैबिनेट नोट तैयार हो गया है. नोट में कर्ज की रीस्ट्रक्चरिंग का प्रस्ताव भी शामिल है.
‬प्रदीप सिंह खरोला ने बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (बीएमटीसी) को पुनर्जीवित करने का काम बखूबी निभाया है। वो सिटी बस सर्विस को जो कि घाटे में चल रही थी को साल 2000 में मुनाफे में ले आए। उन्होंने बैंगलुरु के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को वातानुकूलित बसों से लैस करने का काम किया है, जिन्हें आज देश के तमाम बड़े शहरों में देखा जा सकता है। उस दिन से लेकर आज तक बीएमटीसी हर साल मुनाफा कमा रही है।
हालांकि खरोला का सबसे बड़ा योगदान बैंगलुरु को तकनीकी हब के रुप में स्थापित करने के लिए मेट्रो का संचालन शुरू करवाना रहा है, यह एक चुनौतीपूर्ण काम था जिसमें शहर के चट्टानी इलाकों को जोड़ा गया। इसने इस काम को खर्चीला बनाया और भूमिगत रास्ता तैयार करने में काफी समय खर्च हुआ। 42 किमी के पहले चरण का काम पूरा करने में एक दशक का वक्त लग गया और यह अवधि बतौर प्रमुख उनका आधा कार्यकाल रहा। गौरतलब है कि खरोला ने आईआईटी दिल्ली से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में पीएचडी की है।

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