एक्सक्लूसिव खुलासा

सचिवालय में क्रेच के लिए पैसे का अकाल ! चौथे माले के पुल पर 32 लाख लुटाने का नही मलाल ।

सचिवालय में एक महिला समीक्षा अधिकारी का बेटा सचिवालय परिसर की ही क्रेच( शिशु सदन) में स्थापित क्षतिग्रस्त झूले से गिर गया और उसके सर पर चोट आने से नसों में खून का थक्का जम गया।

क्रेच की हालत वर्तमान में इतनी जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है कि कहीं दीवारें आगे को झुका आई हैं तो कहीं टाइल्स अंदर धंस गई हैं। कहीं किचन की सीलिंग को डंडे की टेक देकर संभाला गया है तो कहीं किसी झूले का पूरा नट बोर्ड बाहर जा रहा है। राज्य सरकार का एक आवश्यक नियम है कि जहां भी महिलाएं कार्यरत हैं, वहां पर उनके बच्चों के लिए क्रेच की व्यवस्था की जाएगी। यहां तक कि हमारी कल्याणकारी सरकार ने जिलों से भी यह प्रस्ताव मांगे हैं कि जहां पर भी कामकाजी महिलाओं को कार्यस्थल पर आवश्यकता महसूस होती है, वहां पर क्रेज स्थापित किए जाने चाहिए।

 यह तो रही सिद्धांत और फाइलों की बात हकीकत यह है कि सचिवालय में वर्षों से संचालित क्रेच अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। वर्तमान में क्रेच में उपसचिव से लेकर समीक्षा अधिकारी सहायक समीक्षा अधिकारी आदि के बच्चे दिन के समय रहते हैं।
हाईकोर्ट में 15 दिसंबर 2016 को एक जनहित याचिका पर फैसला देते हुए आदेश दिया था कि राज्य सरकारों को 50 से अधिक महिला कर्मियों वाले उपक्रमों में बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच (शिशु सदन) मे प्रत्येक आवश्यकता हर हालत में उपलब्ध करानी होगी। ऐसा न करना कोर्ट की भी अवमानना है।
  यह एक तरीके का डे केयर सेंटर होता है। क्रेच में जिन अधिकारियों के बच्चे रहते हैं, वही आपस में योगदान करके इस क्रेच की व्यवस्थाएं संचालित कर रहे हैं। राज्य सरकार का इसमें कोई सहयोग नहीं है। यहां तक कि आपस में धन जुटाकर महिला अधिकारी ही क्रेच के लिए फ्रिज, गैस सिलेंडर और बेडशीट आदि जुटाती हैं।
क्रेच का संचालन में सचिवालय प्रशासन के जिम्मे होता है। सचिवालय प्रशासन के पास 2 भवनों को जोड़ने के लिए एक अनावश्यक पुल निर्माण के 32लाख रुपए तो उपलब्ध हैं, किंतु इस क्रेच की दुर्दशा की मरम्मत करने के लिए दो ढाई लाख का बजट सचिवालय प्रशासन के लिए संभवतः फिजूलखर्ची है।
 महिला अधिकारी क्रेच की व्यवस्था और मरम्मत की मांग करने के लिए मुख्य सचिव तक गई, किंतु किसी भी अफसर ने इसका संज्ञान लेना संभवतः उचित नहीं समझा।
 पिछले साल तक एक स्वयं सेवी संस्था किसी तरह इसका संचालन कर रही थी, किंतु कुछ समय पहले उसने भी हाथ खींच लिए हैं।
 सरकार के पास समाज कल्याण बोर्ड और महिला कल्याण में दायित्व धारियों को अनाप-शनाप खर्च करने के लिए तो धन उपलब्ध रहता है, किंतु जिनकी सेवा का माननीयों को दायित्व  मिलता है, उसके लिए कोई बजट नहीं मिलता।
सचिवालय प्रशासन ने सचिवालय में क्रेच की ड्यूटी के लिए तीन पीआरडी कार्यकत्रियों की तैनाती की हुई है।
 जब सचिवालय जैसी महत्वपूर्ण जगह पर स्थापित क्रेच के यह हाल हैं तो समझा जा सकता है कि कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए कार्यस्थल पर क्रेच स्थापित करने और उनमें सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रति हमारी सरकार वास्तव में कितनी गंभीर है।

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