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फर्जी संतों की दूसरी लिस्ट तैयार,हंगामा होना तय

फर्जी संतों की अखाड़ा परिषद् की दूसरी सूची तैयार।नवंबर में हो सकती है घोषणा ।हंगामा होना तय।

कुमार दुष्यंत

हरिद्वार।फर्जी संतों को लेकर अखाड़ा परिषद् की दूसरी सूची लगभग तैयार है।अनुमान है कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली अखाड़ा परिषद् की बैठक में इस सूची में शामिल नामों का खुलासा किया जाएगा।क्योंकि इस सूची में कुछ बडे़ संतों व स्वयंभू शंकराचार्यों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।इसलिए इसके खुलासे के बाद संत बिरादरी में रार मचना तय है।

 
दस सितंबर को प्रयाग में जारी की गयी फर्जी संतों की पहली सूची के बाद से ही अखाड़ा परिषद् फर्जी संतों की दूसरी सूची तैयार करने में जुटी हुई है।इसका ऐलान भी प्रयाग बैठक में ही कर दिया गया था।वजह यह थी कि अखाड़ा परिषद् में फर्जी शंकराचार्यों को पहली सूची में शामिल करने को लेकर कई संत सहमत नहीं थे।हालांकि कुछ कथित  शंकराचार्यों के नाम इस सूची में शामिल कर लिए गये थे।लेकिन विवाद के बाद उन्हें पहली सूची से हटा लिया गया था।परिषद् के कुछ संतों का मानना था कि शंकराचार्यों के नामों को लेकर अखाड़ा परिषद् को जल्दबाजी न कर मनन-चिंतन के बाद इन नामों को फर्जी संतों की सूची में डालना चाहिए।
अखाड़ा परिषद् तभी से फर्जी शंकराचार्यों व विवादित बाबाओं की कुंडली खंगालने में जुटी हुई है। अखाडों से भी संत मर्यादाओं के खिलाफ आचरण में लिप्त संतों के बारे में जानकारियां देने के लिए कहा गया था।अब अखाड़ा परिषद् की यह दूसरी सूची लगभग तैयार है।बताया जा रहा है कि इसमें स्वयं को संत प्रचारित कर रहे कथावाचक, तथाकथित चमत्कारी संत व स्वयंभू शंकराचार्यों के नाम शामिल हैं।पूर्व की भांति इस सूची में भी महिला संत हैं।इस सूची में फर्जी शंकराचार्यों के नाम होने से अखाड़ा परिषद् की यह सूची एक सनसनी बन गयी है।अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने ‘पर्वतजन’ से बात करते हुए बताया कि इस बार अखाड़ा परिषद् एकमत होकर नयी सूची के नामों का निर्धारण कर रही है।दस नंवबर के बाद इसको लेकर कभी भी अखाड़ा परिषद् की बैठक आहूत की जा सकती है।
 
उल्लेखनीय है कि देश में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित केवल चार पीठ ही हैं।ये श्रृगेंरी, ज्योतिष, शारदा व गोवर्धन पीठ हैं ।लेकिन इन चार मूल पीठों के सापेक्ष उपपीठों के नाम पर दर्जनों पीठें कार्य कर रही हैं।इन पीठों पर आसीन संत स्वयं को पीठाधीश्वर शंकराचार्य के रुप में प्रचारित करते रहे हैं।मूल शारदा पीठ पर ही कोर्ट का फैसला आने से पूर्व स्वामी स्वरुपानंद, अच्युतानंद तीर्थ व राजराजेश्वराश्रम, तीन शंकराचार्य आसीन थे।ज्योतिष पीठ पर भी ऐसा ही विवाद रहा है।  धर्म नगरी हरिद्वार में ही कोई पीठ उपपीठ न होने के बावजूद कई शंकराचार्य वास करते हैं।अखाड़ा परिषद् की  इस दूसरी  सूची में हरिद्वार के कथित शंकराचार्यों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
 
उल्लेखनीय है कि आसाराम, रामरहीम व राधेमां वाली अखाड़ा परिषद् की पहली सूची को लेकर भी खासा हंगामा हुआ था।अखाड़ा परिषद् के संतों ने चौदह संतों की यह सूची जारी करने के बाद कथित फर्जी संतों द्वारा जान से मारने की धमकियां दिये जाने व अखाड़ा परिषद् के प्रवक्ता मोहनदास के अपहरण के आरोप फर्जी संतों पर लगाए थे।  फर्जी ठहराए गये संतों ने न केवल अखाड़ा परिषद् को ही खारिज कर दिया था।बल्कि अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी को शास्त्रार्थ की खुली चुनौती भी दे डाली थी।इसके बाद फर्जी ठहराए गये कुशमुनि के नेर्तत्व में ओंकार अखाडे के रुप में एक नये अखाडे का गठन कर लिया गया था।इस दूसरी सूची में क्योंकि शंकराचार्यों के तौर पर स्थापित बडे़ संतों के नाम भी शामिल हैं ।इसलिए इसकी घोषणा के बाद संत जगत में हंगामा होना तय है।

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