पहाड़ों की हकीकत साक्षात्कार

” रैबार  देने के लिए ये भी हैं हकदार  “।

 क्रांति भट्ट/गोपेश्वर
हम जाने  क्यों हस्तियों  , सेलिब्रिटीज से ही प्रेरणा लेने की बात करते हैं । या धारणा बना लेते हैं कि  शिखर पर चमकते लोग ही जीवन प्रेरणा हैं । हमारे आस पास ही ऐसे भी  साधारण से दिखने वाले लोग हैं जो विपरीत परस्थितियों मे भी हार नहीं मानते । और अपनी जीवटता से , निरन्तर मेहनत करते हुये उदाहरण प्रस्तुत करते हैं । ऐसे लोग  ” रैबार ” नहीं देते  वरन अपने कौशल से आत्म निर्भरता और मेहनत के रैबार बन जाते हैं।
** ये तस्वीर में पुरानी स्कूटी में जो लडकी है । इनके संघर्ष की कहानी गजब है । कहानी के बजाय नित संघर्ष और मेहनत  करने वाली जीवटता की चलती फिरती मजबूत पहाड़ की बेटी कहें तो अच्छा । इनका नाम है मुन्नी । पिता नहीं रहे । चमोली के  सुदूर वर्ती लुंतरा गांव की हैं । पिता नहीं रहे तो  रोयी तो जरूर । पर सब कुछ अब खत्म हो गया । यह नैराश्य भाव नही रखा । ठेठ गांव में किसी तरह  इंटर की शिक्षा ली । गोपेश्वर  शहर में आयी । मेहनत , रोजगार , और पढाई के लिए । कोई सहारा नहीं था । मंडल रोड पर गौ सेवा का एक आश्रम है ।  वहाँ पर रोजगार मांगा । संचालक योगानन्द जी लोगों की छोड़ी हुई  गायों को आश्रय देते हैं । इस बालिका ने इन गायों की सेवा का संकल्प लिया । एक दो गाय थोड़ा थोड़ा दूध देती थी पहले पहल । इस बालिका ने वह दूध एक बरतन में एकत्र कर गोपेश्वर में एक घर में मे बेचा । कुछ समय बाद उधर के गांवों में स्वयं सहायता समूह भने । महिलाओं ने अपनी गाय . भैंस का दूध दुह कर इस बालिका के माध्यम से शहर में  डेयरी के माध्यम से बेचने का निर्णय लिया । मुन्नी प्लास्टिक के बर्तनो में पांच किमी चलकर वह दूध बेचने लगी। उसके ब्यवहार , मेहनत और ईमानदारी से दूध का कार्य खूब चल पडा । अब मुन्नी ने अपने खून पसीने से चार गाय ले ली है। एक सैकेंड हैंड स्कूटी  भी खरीद ली है । साइकिल तक कभी नही चलाई । पर तीन दिन में स्कूटी चलानी सीख ली अब हर रोज इसी स्कूटी पर अपनी चार गायों का दूध लेकर गोपेश्वर में दूध बेचने का कार्य करतीं हैं मुन्नी  ।चेहरे पर आत्म विश्वास की शक्ति , अपनी बाजुओं और संकल्प की शक्ति से मजबूत हुयी वह कहती हैं कि दूध का बिजनेस अब अपना है , 15 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है ।सुबह शहर में दूध बेचने के बाद फिर जंगल में अपनी गायों के लिए चारापत्ती के लिए निकल पड़ती हैं ये बहादुर बालिका । पढाई जारी रखने का दृढ़ संकल्प है इनका। मां को भी भेजती खर्च पर्चा । नून तेल समेत सभी आवश्यकता का ख्याल खुद रखतीं हैं।
 पढी लिखी हैं इसलिए पशुपालन और डेयरी विभाग से पशुपालन में नई नई जानकारी और गायों को फोडर में क्या दें इसकी भी जानकारी जुटाती है । हंसमुख , मेहनती , अपने काम के प्रति प्रेम , विपरीत  परिस्थिति में भी हारसन मानने वाली इस बालिका को हम राज्य स्थापना दिवस पर अपना आईकान न माने तो किसे माने ! ” इनसे ” रैबार ”  न लें तो किससे लें !!
इस बहादुर बालिका से हुई बातचीत के आधार . और गोपेश्वर में इनके पसीने की बूंदों को देखकर , समझ कर , जैसा देखा । वैसा लिखा ।

Parvatjan Android App

Video

Muslim Beaten for Celebrating Independence Day

Get Email: Subscribe Parvatjan

%d bloggers like this: