एक्सक्लूसिव खुलासा

जेलखाने के खाने में बड़ा खेल!

भूपेंद्र कुमार//

उत्तराखंड की जेलों में विचाराधीन तथा सजायाफ्ता कैदियों को भोजन उपलब्ध कराने के नाम पर हर महीने करीब बीस लाख रुपए अफसरों की जेब में जा रहा है। इस तरफ किसी का ध्यान भी नहीं

उत्तराखंड की जेलों में बंद कैदी किस हाल में सजा काट रहे हैं, इस तरफ न तो किसी का ध्यान जाता है और न ही किसी की सहानुभूति होती है। किसी का भी ध्यान न होने का फायदा उठाते हुए अफसरों ने कैदियों को भोजन कराने के नाम पर अंधी लूट मचा रखी है। यह हाल प्रदेश की सभी जेलों में है और कुल मिलाकर प्रतिमाह लगभग बीस लाख रुपए अफसरों की जेबों में जा रहा है। यह खेल वर्षों से चल रहा है।
उदाहरण के तौर पर इस संवाददाता ने देहरादून की सुद्धोवाला जेल से आरटीआई में यह सूचना मांगी कि कैदियों को रोजाना कुल कितने टाइम क्या-क्या भोजन दिया जाता है तथा प्रत्येक कैदी के लिए दिए जाने वाले भोजन की मात्रा मांगी। उत्तर में सुद्धोवाला जेल प्रशासन ने प्रति कैदी की दर से आटा, दाल, चावल, तेल, मसाले से लेकर सिलेंडर व लकड़ी आदि तक का ब्यौरा उपलब्ध कराया। प्रति व्यक्ति के हिसाब से दी जाने वाली खाद्य सामग्री की तुलना इस संवाददाता ने देहरादून के तीन मशहूर हलुवाइयों द्वारा दी गई कोटेशन से की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
उदाहरण के तौर पर सुद्धोवाला जेल में बंद कुल ११७७ कैदियों को महीने में तीन दिन तथा इसके अतिरिक्त वार-त्यौहारों पर हलुवा-पूड़ी दिया जाता है। इसके लिए ११७७ कैदियों को दिए जाने वाले हलुवा-पूड़ी पर लगभग ९ टीन वनस्पति घी, ३५ किलो सूजी, ४७ किलो चीनी, १३५ किलो सब्जी लगती है। जब हलुवाई से प्रति किलो सूजी पर लगने वाले वनस्पति घी की मात्रा पूछी गई तो उनका कहना था कि अधिक से अधिक एक किलो सूजी पर एक किलो वनस्पति घी की ही खपत हो सकती है, जबकि सुद्धोवाला जेल के आंकड़ों के अनुसार ३५ किलो सूजी पर १३५ किलो वनस्पति घी की खपत दर्शाई गई है। इस तरह प्रत्येक अवसर पर एक कुंतल वनस्पति घी गायब किया जाता है। माह के तीन रविवारों को तीन कुंतल घी सीधे-सीधे गायब कर दिया जाता है।
जेल में रोजाना ११७७ कैदियों के लिए भोजन बनाने में लगभग १० सिलेंडर लगने बताए गए हैं। इसके अलावा १०५ किलो लकड़ी का इस्तेमाल भी बताया गया है, जबकि हलुवाई इतने ही लोगों के खाना बनाने के लिए रोजाना लगभग ४-५ सिलेंडरों की जरूरत बताते हैं। ऐसे में जेल प्रशासन द्वारा ५ से ६ सिलेंडरों का गोलमाल प्रतीत होता है। इस तरह एक महीने में लगभग १५० सिलेंडरों का घोटाला सामने आ रहा है। यही नहीं जेल में इतनी बड़ी मात्रा में कमर्शियल की बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाता है।
११७७ कैदियों के रोज दो टाइम के खाने पर लगभग साढे ५ कुंतल चावल, सवा ८ कुंतल आटा, ढाई कुंतल दाल, २७० किलो सब्जी, १०५ किलो गुड़, ४ किलो मसाले तथा १० किलो सरसों का तेल बताया गया है। हलुवाई के अनुसार दोनों टाइम चावल लगभग १२० किलो, आटा १२० किलो, दाल ४० किलो, १२० किलो सब्जी की खपत होती है।
जाहिर है कि रोजाना लगभग ४ कुंतल चावल, ७ कुंतल आटा, २ कुंतल दाल, डेढ़ कुंतल सब्जी गायब कर दी जाती है। इस तरह माह में यह मात्रा १२० कुंतल चावल, २१० कुंतल आटा, ६० कुंतल दाल एवं ४५ कुंतल सब्जी का घोटाला कर दिया जाता है। रोज के नाश्ते में लगभग ३० किलो दूध, पौने २ किलो चायपत्ती, ४८ किलो चीनी, १०५ किलो लकड़ी तथा हफ्ते में दो दिन १०५ किलो चना, दो दिन २३५ किलो बंद, तीन दिन २११ किलो दलिया लगती है। हलुवाई के अनुसार चीनी २५ किलो, चायपत्ती १ किलो की जरूरत होगी। ऐसे में हर माह लगभग साढे ६ कुंतल चीनी तथा २० किलो चायपत्ती का घोटाला होता है।

जेल प्रशासन का भेदभाव
इस जेल में विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों में भेदभाव किया जाता है। यहां विचाराधीन बंदी को ५४० ग्राम आटा तथा सजायाफ्ता बंदी को ७०० आटा दिया जाता है। यह एक तरह स्पष्ट रूप से विचाराधीन बंदियों का उत्पीडऩ एवं उनके मानवाधिकारों का हनन है।

 

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