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भारी पड़ रही लोक सेवा आयोग की लापरवाही

पहाड़ के युवा कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए आवेदन की तिथि बढ़ाने की मांग

उत्तराखंड  लोक सेवा आयोग ने ४ अगस्त को असिस्टेंट प्रोफेसरों की ऑनलाइन वैकेंसी निकाली थी। आवेदन की अंतिम तिथि मात्र २१ दिन बाद यानि २४ तारीख रखी गई है। इससे पहाड़ के अधिकांश युवाओं में व्यापक आक्रोश का माहौल है। आयोग पर यह आरोप लग रहे हैं कि बरसात के समय पर मात्र २१ दिन की समयावधि रखना तथा आवेदन के लिए सिर्फ ऑनलाइन वैकेंसी जारी करना महज आयोग की लापरवाही नहीं मानी जा सकती। यह लापरवाही आपराधिक है। पहाड़ों में बरसात के दौरान सड़कें टूटी रहती हैं। इंटरनेट की कनेक्टिविटी ध्वस्त रहती है और इतने कम समय में सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं हो पाता।
बेरोजगार युवाओं का आरोप है कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ऐसा उत्तराखंड मूल के अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसरों से वंचित करने के लिए जानबूझकर ऐसा कर रहा है।
युवा बेरोजगारों का कहना है कि लोक सेवा आयोग को वैकेंसियां बरसात से पहले या बरसात के बाद निकालनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को अवसर मिल सके।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के सचिव बंशीधर तिवारी कहते हैं कि असिस्टेंट प्रोफेसरों की वैकेंसी अगस्त में हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में निकाली गई। सचिव श्री तिवारी कहते हैं कि आवेदन करने के लिए २१ दिन का समय दिया गया है, जो पर्याप्त है।
हाईकोर्ट के आदेश और लोक सेवा आयोग के सचिव के तर्क भले ही अपनी जगह सही हों, किंतु पहाड़ के बेरोजगारों के हितों को ध्यान में रखते हुए यदि वैकेंसियां निकालने का समय अक्टूबर से दिसंबर के बीच रखा जाए तथा न्यूनतम ४५ दिन का समय दिया जाए तो अधिक से अधिक बेरोजगारों को आवेदन करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा तथा आयोग जैसी संवैधानिक गरिमा के संस्थानों पर लापरवाही अथवा भेदभाव के आरोप भी नहीं लगेंगे। एक युवा कहता है कि आखिर आयोग बना तो नौकरी देने के लिए ही है ना।

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