एक्सक्लूसिव पहाड़ों की हकीकत

मांगी सड़क मिली जेल! संभालिए वरना इस गांव का पलायन है सरकार की ताजा उपलब्धि

सड़क बनने के इंतजार मे टला स्कूल भवन निर्माण 
बिना सड़क के शिक्षक नहीं–बिना शिक्षक के छात्र स्कूल छोड़ने को हुए मजबूर
7 वर्षो से सड़क का हो रहा इंतजार 
सड़क की मांग को लेकर आंदोलन के बाद जेल जा चुके ग्रामीण 
पीठ पर बीमार के साथ 6 किमी का पैदल पहाड़ी सफर
बेसिक स्कूल मे रिकॉर्ड छात्र संख्या–बड़ी कक्षा मे सूनी पड़ी कक्षायें  
गिरीश गैरोला
विकास का आधार मानी जाने वाली सड़क के अभाव मे उत्तरकाशी के उड़री  गांव मे बीमार और घायल लोगों को पीठ पर लादकर पहाड़ी पथरीला सफर करना यहां के बुजुर्ग अपनी किस्मत मानकर चल ही रहे थे कि अब सड़क के बिना नई पीढ़ी की शिक्षा भी प्रभावित होने लगी है। जल्दी इस पर काम नहीं हुआ तो एक और आत्मनिर्भर गांव पलायन की सूची मे जुड़ जाएगा।
सड़क से 6 किमी पैदल दूरी पर उत्तरकाशी का उड़री गांव अब तक पूरी तरह से आत्म निर्भर है, किन्तु बदलते दौर मे गांव के लोग विगत 7 वर्षो से एक अदद सड़क की मांग को लेकर आंदोलित हैं।
 इतना ही नहीं सड़क की मांग को लेकर सड़क जाम के दौरान ग्रामीण जेल की सजा तक भुगत चुके हैं। आलम ये है कि बिना सड़क के गांव के स्कूल मे शिक्षक नहीं आना चाहते हैं और बिना शिक्षकों के फेल होने के डर से छात्र स्कूल मे प्रवेश न कर गांव से अन्यत्र स्कूल मे पलायन को मजबूर हो रहे हैं।
उड़री गांव के बेसिक स्कूल शिक्षक यतेंद्र प्रसाद सेमवाल ने बताया कि पूरे ब्लॉक मे सबसे ज्यादा छात्र संख्या उड़री गांव के बेसिक स्कूल मे है, किन्तु स्कूल मे पीने का पानी उपलब्ध नहीं है, लिहाजा मिड डे मील योजना भी प्रभावित  हो रही है। स्कूल मे बिजली भी नहीं है।
कक्षा 5 पास करने के बाद गांव मे ही जूनियर हाइ स्कूल और उच्चीकृत हाइस्कूल मौजूद है, किन्तु न तो उनमे पर्याप्त  शिक्षक हैं, न फर्नीचर और न स्कूल भवन।
 हाइस्कूल के शिक्षक दीपक पंवार ने बताया कि हाइस्कूल मे शिक्षक के नाम पर वह अकेले हैं।
रमसा के अंतर्गत उच्चीकृत स्कूल मे भवन निर्माण  के लिए बजट भी स्वीकृत है, किन्तु सड़क मार्ग न होने के चलते टेंडर स्वीकृत होने के बाद भी ठेकेदार ने काम मे होने वाले घाटे को देखते हुए अपनी जमानत जफ्त  कराना स्वीकार किया, किन्तु निर्माण कार्य शुरू नहीं किया।
स्कूल मे प्रयोगशाला का समान आलमारी मे भरा हुआ है।बिना शिक्षकों के मजबूरी मे छात्रों ने स्कूल से टीसी लेकर अन्य स्कूल मे पलायन करना शुरू कर दिया है।  यही  हाल जूनियर कक्षा का है। यहां भी पांच स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल दो ही शिक्षक हैं। यही कारण है कि बेसिक स्कूल मे रिकॉर्ड छात्र संख्या के बाद भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ने के चलते ऊपरी कक्षा मे छात्र संख्या लगातार घट रही है और बड़े सेमिनारों मे शिक्षा के स्तर पर मंथन करने वाले मौन साधे हुए हैं।
  ये तो हाल शिक्षा का है अब यदि कोई ग्रामीण बीमार अथवा घायल /चोटिल हो जाता है तो उसे अस्पताल तक जाने के लिए 6 किमी का पैदल पहाड़ी सफर पीठ अथवा चारपाई पर ही लेकर जाना पड़ता है।
स्थानीय निवासी और कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप भट्ट ने बताया कि सड़क की मांग को लेकर वे वर्षो से आंदोलित हैं और इसी कड़ी मे अपनी मांगों के समर्थन मे ग्रामीणों द्वारा लगाए गए जाम के बाद उन्होने जेल भी जाना स्वीकार किया, जिसके बाद पीएमजीएसवाई ने अब सड़क निर्माण का काम शुरू  कर दिया है। किन्तु स्कूल भवन का ठेकेदार भी सड़क निर्माण के बाद ही टेंडर प्रक्रिया मे शामिल होना चाहते हैं। इस बीच स्कूल मे कक्षा 6 से लेकर 10 तक के छात्रों के बेवजह दूसरे गांवों के स्कूल मे पढ़ाई के लिए पलायन करना ही पड़ेगा।
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक राय सिंह रावत ने बताया कि स्कूल मे बिजली-पानी के प्रस्ताव इस बार भेजे जा रहे हैं और उच्चीकृत हाइस्कूल और जूनियर कक्षाओं को फिलहाल एक साथ एक ही भवन मे संचालित करने को कहा गया है।शिक्षकों की कमी के लिए शासन और निदेशालय को लिखा गया है।

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