खुलासा पहाड़ों की हकीकत

वीडियो:इस एन एच निर्माण मे खाई साढे तीन करोड़ की मलाई

एनएच पर साढ़े तीन करोड़ की मलाई खाने का आरोप 
कच्चे पत्थरों के ऊपर डामर बिछाने का आरोप
एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर डीएम ने बौठाई हाइ लेवल  जांच 
गिरीश गैरोला
यमनोत्री  राजमार्ग पर धरासु बैंड से कल्याणी के बीच 6 किमी इलाके मे साढ़े तीन करोड़ के बजट की बंदरबाँट के आरोप लगते हुए स्थानीय लोगों ने डीएम से मामले की जांच की मांग की है।डीएम के निर्देश पर मौके पर पहुंचे एसडीएम सौरभ असवाल ने प्रथम दृष्टिया अनियमितता की बात स्वीकार की है।
स्थानीय निवासी महावीर रावत ने आरोप लगाया कि एनएच डिवीजन बड़कोट द्वारा बिना बेस कोट के सीधे कच्चे पत्थरों के ऊपर ही ब्लैक टोपिंग कार्य किया जा रहा है जो हल्की बरसात मे ही उखड़ जाएगा और सड़क मे खड्डे होने लगेंगे।एनएच के अधिशासी अभियंता नवनीत पांडे ने कहा कि पूर्व मे इस स्थान पर दो बेस कोट किए जा चुके हैं लिहाजा एक फ़ाइनल कोट के साथ डामरीकरण  किया जा रहा है, हालांकि एसडीएम कि जांच मे ओवर साइज़ पत्थर बिछने की बात उन्होने स्वीकार करते हुए गलती सुधार का भरोसा दिलाया है।
ब्रहमखाल निवासी महावीर रावत ने बताया कि पूर्व निर्मित सड़क पर वर्ष 2011-12 मे दो कोट हो चुके हैं किन्तु सड़क चौडीकरण के दौरान काटे गए पहाड़ से निकले मलवे को हटा कर उस स्थान पर भी सीधे कच्चे पत्थरों के ऊपर पेंटिंग की  जा रही है, जबकि  इस नए हिस्से मे पूर्व मे भी कोई बेस कोट नहीं डाला गया था।
उन्होने बताया कि कल्याणी सिल्ला ( डाली-पानी ) से फेड़ी  बैंड के पीछे तक रात के समय मे भी काम करके गल्तियों को ढकने का काम तेजी से  किया जा रहा है, जबकि  जो पत्थर  बिछाए जा रहे हैं वे बेहद कच्चे हैं।
एसडीएम सौरव असवाल भी मानते हैं कि उन्होने भी अपनी जांच मे पाया था कि सड़क पर पहाड़ से निकली मिट्टी और कच्चे पत्थर ही बिछाये जा रहे हैं, जिसकी रिपोर्ट उन्होने डीएम को भेज दी है।
दरअसल साढ़े तीन करोड़ के इस खेल मे 6 किमी सड़क का वो हिस्सा है, जिसके 5 किमी हिस्से मे सड़क के आधे हिस्से पर दो कोट पहले डाले जा चुके थे और एक किमी की पूरी लंबाई और चौड़ाई मे तीनों कोट के बड़ पेंटिंग होनी थी।
सड़क निर्माण मे तीन कोट डाले जाते हैं, जिसमे सोलिंग कोट 45- 90 एमएम , इंटर कोट 45- 63 एमएम, और टॉप कोट 22.4 से 53 एमएम की रोड़ी बिछाकर कर रोलर से अच्छी तरह दबानी होती है।इस दौरान एआईवी टेस्ट ( एग्रीगेट इंटेक्ट वैल्यू टेस्ट ) से ये देखा जाता है कि बिछाई जाने वाली रोड़ी टूट तो नहीं रही रही है।
अब विभाग का खेल देखिये पहाड़ी की तरफ वाले हिस्से मे मिट्टी उठाने के बाद वंहा भी बिना बेस कोट के कच्चे पत्थर पत्थर बिछकर ब्लैक टॉप कर दिया जा रहा है।मौके पर ही सड़क पर पत्थरों को बिछाकर मजदूरों के द्वारा तोड़ा जा रहा था। गंगा और यमुना घाटी मे बंटा उत्तरकाशी जनपद का ब्रहमखाल का ये हिस्सा सदैव से ही उपेक्षित रहा है ,और गंगा और यमुना घाटी के मध्य मे होने का खामियाजा भुगत रहा है। यही वजह है कि यहां से कोई सशक्त नेतृत्व आज तक उभर नहीं सका है।
डीएम डॉ आशीष कुमार चौहान ने एसडीएम की आरंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एडीएम और लोक निर्माण विभाग के एससी लेवल की उच्च जांच कमेटी को अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। उम्मीद है इस बार सूर्य के दिये कवच और कुंडल भी महाभारत के कर्ण की सुरक्षा नहीं कर सकेंगे।

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