एक्सक्लूसिव पहाड़ों की हकीकत

प्रधान जी खुशहाल, आम जनता बदहाल

कैसे शौच मुक्त हो गई ग्राम सभा, पहुँच व पैसे के बल हासिल किया राष्ट्रीय पुरस्कार 

नीरज उत्तराखंडी

मोरी ब्लाक की ग्राम पंचायत कुकरेड़ा को हाल ही में पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार के तहत राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार नवाजा गया। हरिद्वार में आयोजित पंचायत संमेलन में पंचायती राज मंत्री अरविंद पाण्डेय ने ग्राम प्रधान चतर सिंह रावत को पंचायत में किये गये उत्कृष्ट कार्य व पूर्ण रूप से शौच मुक्त करने के लिए प्रशस्ति पत्र तथा 10 लाख रुपये की धनराशि से पुरुस्कृत किया।
इससे पूर्व भी उनके पिछले कार्यकाल में कुकरेड़ा ग्राम पंचायत को झारखंड पंचायत सम्मेलन जमशेदपुर में मनरेगा के तहत सर्वश्रेष्ठ कार्य करवाने ग्राम पंचायत में पैदल मार्ग पेयजल, सिंचाई के उचित व्यवस्था किये जाने के लिए सर्व श्रेष्ठ ग्राम पंचायत के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।


दो पुरस्कारों से सम्मानित ग्राम पंचायत में विकास की धरातलीय सच्चाई तो कुछ ओर कहानी व्यां करती है।
वर्ष 2011 के अनुसार ग्राम पंचायत कुकरेड़ा की जनसंख्या 429 है जिनमें अनुसूचित जाति की संख्या 293 तथा 136 सामान्य एवं अल्प संख्यक हैं।  पंचायत में कुल 67 परिवार निवास करते हैं ।
नहीं बनें शौचालय-ग्राम पंचायत में अभी भी कई परिवारो के शौचालय ही नही बनें। लेकिन प्रधान महोदय ने कागजों पर ग्राम पंचायत को शौचालय मुक्त दिखा कर इनाम पाने में कामयाब हो गये।बताते हैं कि गाँव में निरीक्षण के लिए पहुँची टीम को पर्यटक स्थल शिमला मसूरी व कथियान की यात्रा करवाकर मैनेज किया । गाँव में भोला दास,जयलाल,निमकू,जोबन दास,कमला,कल्याणू,अशाड़ू,कल्याण दास सहित कई अल्प संख्यक परिवारों के शौचालय नहीं बन पाये हैं।
प्रधानम॔त्री आवास आवंटन में धांधली का आरोप – ग्राम प्रधान पर आवास योजना में अपने चहेतो को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी कागजों में कूट रचना करने का आरोप भी है। पात्र लाभार्थियों ने जब सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो प्रधान ने सूचना उपलब्ध करवाने वजाय अनुरोध कर्ता को मारने की धमकी दे डाली।पीड़ित लाभार्थी ने परेशान हो कर जिला अधिकारी से मामले शिकायत की।जिलाधिकारी ने मामला की गम्भीरता को देखते हुए।उप जिलाधिकारी पुरोला को तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दिये।लेकिन अभी तक जांच शुरू नही हो पायी है।जिससे प्रधान की प्रशासन के साथ मिलीभत का संदेह पैदा होता है।

आरोप हैं एक ही नाम के दोनों लाभार्थियों के आवासीय आवेदन में कुट रचना कर ज्ञान दास के नाम स्वीकृत आवास ज्ञान सिंह को दिलवाने में कामयाब हो गया।इससे पूर्व के कार्यकाल में इंदिरा आवास आवंटन में धांधली इन पर धांधली के आरोप लगे थे। ग्रामीणो ने जब घपले-घोटालों की सूचना अधिकार के तहत जानकारी लेकर समाचारों में खबरें प्रकाशित करवा कर प्रशासन से जांच की मांग की तो प्रधान की हाड़की हवा हो कई और जांच से बचने के लिए एक राष्ट्रीय पार्टी छोड़ कर दूसरी पार्टी में शामिल होकर राजनीति संरक्षण हासिल किया। औरदूसरी बार प्रधान बनने में कामयाब हो गया।
फर्जी मस्टर रोल से सरकारी धन लगाया ठिकाने – प्रधान की सरकारी धन को कैसे ठिकाने लगाने है इसके लिए फर्जी मस्टर रोल भरे गये।जो व्यक्ति गाँव से बहार देहरादून या चण्डीगढ में नौकरी करते हैं या जो गाँव का निवासी नही है ऐसे लोगों के फर्जी मस्टर रोलभर कर सरकारी धन को ठिकाने लगाया। एक योजना क दो बार फर्जी भुगतान अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया। सामग्री सप्लाई के लिए अपने सबंधियो के नाम फर्जी निर्माण सामग्री सप्लाई बिल बनाये गये।

शिकायत कर्ता द्वारा मुझ पर लगाये गये  सभी आरोप निराधार है।वह प्रधानमंत्री आवास योजना का पात्र लाभार्थी नहीं है।गाँव में कुछ लोगों के पहले कच्चे शौचालय बनें थे।उन्हें पक्का बनाया जा रहा है। सूचना अधिकार के तहत उन्हें ब्लैक मेल किया जा रहा है।यदि आरोपी को लगता है कि मैंने कहीं अनियमितता की है तो कार्यो की जांच करवा ले। वर्ष 2009 से 2013 तक की कैश बुक गायब होने की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई हैं।

कैश बुक गायब
सूचना अधिकार के अन्तर्गत जब 2009  से  2015 तक किये गये कार्यों के भुगतान की कैश बुक मांगी कई तो कैश बुक गायब होना बताया गया जो कि एक बड़े घपले की ओर इशारा करती है।तथा प्रधान द्वारा गायब हुई रोक बही के खोने की सूचनाअगस्त 2017 में दर्ज कराते । जो एक घोर लापरवाही तथा अनियमितता की बानगी है।

Parvatjan Android App

ad

Video

Muslim Beaten for Celebrating Independence Day

Get Email: Subscribe Parvatjan

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: