राजनीति

सत्ता के नशे में बेसुध टम्टा!

 

मोदी  लहर में संसद पहुंचने वाले अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा मोदी सरकार में कपड़ा राज्य मंत्री हैं।

एक साल पहले कांग्रेस के जिन बागियों की बदौलत भाजपा उत्तराखंड में सत्ता में पहुंचने का जोड़-तोड़ कर रही थी, आज उसी भाजपा के कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा उनमें से कद्दावर बागी कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को पहचानने से ही साफ इनकार कर रहे हैं।

 जनता  की यादाश्त कमजोर हो सकती है, लेकिन पत्रकारों की नहीं। 24 अक्टूबर 2016 को यही अजय टम्टा कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के गढ़ लंढौरा रुड़की में “दलित सम्मान समारोह” करके दलितों और पिछड़ों के वोट जुटाने के लिए कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की जी हजूरी कर रहे थे।
 कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन तब नए-नए बागी होकर भाजपा में आए थे। तब चैंपियन के साथ हाथ में हाथ डालकर, कंधे से कंधा मिलाकर भाजपा के लिए वोट जुटाने वाले अजय टम्टा अगर आज कह रहे हैं कि चैंपियन कौन है, वह जानते नहीं तो सत्ता की इससे बड़ी अवसरवादिता का उदाहरण और क्या होगा !!
 पाठकों को एक बार फिर से याद दिलाने के लिए पर्वतजन उस समारोह की कुछ फोटोग्राफ यहां उपलब्ध करा रहा है। आप इन छायाचित्रों में साफ देख सकते हैं कि जब जरूरत थी तो किस तरीके की गलबहियां की जा रही थी और अब मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं।

अजय टम्टा के केंद्र सरकार में मंत्री होने का उत्तराखंड को क्या लाभ हुआ, इसका रिकार्ड टम्टा के पास भी नहीं है। 2002 में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बगावत कर सोमेश्वर से निर्दलीय विधायक का चुनाव लड़कर भाजपा प्रत्याशी को हरवाने और कांग्रेस की जीत का मुख्य कारण बनने वाले अजय टम्टा बाद में फिर भाजपा में शामिल हुए और दो बार विधायक व मंत्री भी रहे।

2009में लोकसभा का चुनाव हारने के बाद 2014 में पुन: उन्हें टिकट दिया गया और वे जीतने में सफल रहे।2002और 2012 की उत्तराखंड की विधानसभा में जब अजय टम्टा विधायक और मंत्री थे, तब भी कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन उसी विधानसभा में विधायक थे। चैंपियन 2002से लेकर 2017 तक लगातार चार बार विधायक चुने गए हैं। साढे सात साल तक उत्तराखंड की विधानसभा में चैंपियन के साथ विधायक रहे भारत सरकार के मंत्री अजय टम्टा अब कह रहे हैं कि कौन है चैंपियन, मैं नहीं जानता। इसे सत्ता का नशा कहें या कोई दूसरा नशा, किंतु अजय टम्टा द्वारा यह कहना कि वे किसी चैंपियन को नहीं जानते, अपने आप में अजय टम्टा की याददाश्त की पोल खोलता है। यह कैसे संभव है कि साढे सात साल तक एक ही सदन के सदस्य, जहां कि मात्र 7 विधायक बैठते हों, वहां अजय टम्टा ने कभी कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को देखा ही नहीं।

उत्तराखंड सरकार में मंत्री रहते जब अजय टम्टा ने एक विधायक को ही नहीं देखा तो समझा जा सकता है कि मंत्री रहते अजय टम्टा ने क्या काम किए होंगे और वे किस प्रकार उत्तराखंड का विकास कर रहे होंगे।
जब भारत सरकार के मंत्री की स्थिति यह है तो देश में मोदी के नाम का शोर किस प्रकार लोगों के कान फोड़ रहा है, समझा जा सकता है। जो अजय टम्टा आज अपने साथ विधायक रहे व्यक्ति को नहीं पहचान पा रहे, ऐसे में 14 विधानसभाओं वाली अल्मोड़ा लोकसभा के लाखों मतदाताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं को कैसे पहचानेंगे। हो सकता है कि अब लोग अजय टम्टा को  चुनाव में किए गए वायदे भी याद दिला रहे हों और इसलिए अब एक प्रकार से टम्टा याददाश्त चली जाने जैसी बातें कहकर अपने मतदाताओं का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हों।
कुछ भी हो, अजय टम्टा का यह बयान उन्हीं की पार्टी के सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने यह कहकर दुरुस्त कर दिया कि चैंपियन तो चैंपियन था और हमेशा चैंपियन रहेगा।

बहरहाल यह रिपोर्ट तो थी याददाश्त दुरुस्त करने के लिए। इसके पीछे की कहानी के लिए पढ़ते रहिए पर्वतजन ।

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