एक्सक्लूसिव

यह विद्यालय 21000 वेतन देकर17000वापस रख लेता है!

देहरादून के हाई-फाई इंग्लिश मीडियम पब्लिक स्कूल किस तरह से अपने ही अध्यापकों का शोषण कर रहे हैं,इसका इन स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों और आम जनता को एहसास भी नहीं है ।शिक्षा विभाग के भ्रष्ट गठजोड़ के कारण इंग्लिश मीडियम प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से तो भारी भरकम फीस वसूलते हैं लेकिन अध्यापकों को इतना कम वेतन देते हैं कि इतने में 1 रूम सेट कमरे का भी किराया नहीं दिया जा सकता।         
उदाहरण के तौर पर पर्वतजन को प्राप्त हुए कुछ दस्तावेजों के अनुसार देहरादून  के आवासीय क्षेत्र राजेंद्र नगर Street No – 1 में  स्थित The Montessori School(Under Society) के द मोंटेसरी पब्लिक स्कूल में सोनिया सैनी को 21000 रूपये अकाउंट में वेतन के रूप में दिया जाता है किंतु उससे 15500 रूपये वापस ले लिए जाते हैं। इस तरह से उन्हें वास्तविक वेतन ₹ 5500 रुपए ही दिया जाता है। दूसरा उदाहरण देखिए- सौम्या अग्रवाल नाम की टीचर को भी 21000 रुपए वेतन बाकायदा बैंक अकाउंट के माध्यम से भुगतान किया जाता है किंतु उनसे नगद में17000 रूपये वापस ले लिए जाते हैं। इस तरह से उन्हें शुद्ध वेतन ₹4000 ही मिल पाता है। पर्वतजन के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार विद्यालय में 60 कर्मचारियों का स्टाफ है।इसमे अध्यापक से लेकर चपरासी शामिल हैं। इन सभी के वेतन से भारी भरकम धनराशि काट ली जाती है। इन्हें वेतन कागजों में कुछ और दिया जाता है जबकि नगद में यह उनसे वापस ले लिया जाता है। इस तरह से प्रतिमाह यह विद्यालय 3,63,000 नगद में वापस प्राप्त कर लेता है। जाहिर है यह काली कमाई विद्यालय कहीं भी नहीं दिखाता है। इस तरह से यह विद्यालय शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों का शोषण तो कर ही रहा है, साथ ही आर्थिक अपराध में भी संलिप्त है।
शिक्षण संस्थान की आड़ मे आयकर नियमों को ताक पर रख आयकर की चोरी कर रहा है जो इनकम टैक्स की चोरी करने के साथ-साथ वहां कार्य कर रहे शिक्षकों एवं कर्मचारियों का शोषण एवं उत्पीड़न कर रहा है, शिक्षकों के बैंक खाते में वेतन के रूप में दुगना धन ट्रांसफर करके उनसे नगद धन(Cash Return) वापस लिया जाता है एवं कर्मचारी को EPF एवं ESIC के लाभों से भी वंचित रखा गया है। यही नहीं जिन कर्मचारियों का EPF कटता भी है उसमें भी विद्यालय की ओर से दिया जाने वाला अनुदान भी अध्यापकों के ही वेतन से काट लिया जाता है। चतुर्थ श्रेणी एवं सफाई कर्मचारियों को नगद वेतन देकर उन्हें अपने स्टाफ लिस्ट में भी नहीं दिखाया जाता है। संस्थान के चेयरमैन विजय खन्ना एवं अन्य सदस्यों द्वारा आज तक किसी स्टाफ को अपॉइंटमेंट लेटर नहीं दिया गया है। जो स्टाफ इनकम टैक्स की चोरी करने में संस्थान के बनाए गए नियमों का नियमों का पालन नहीं करता उसे बिना किसी नोटिस के स्कूल से निकाल दिया जाता है। जिसमें संस्थान में कार्यरत श्रीमती देवकी पवार (पत्नी विपिन पवार) के माध्यम से इन अनियमितताओं का संचालन होता है। यही नहीं नोटबंदी के समय 42,92 675/- रुपए को एडजस्ट करने एवं आयकर विभाग से बचने के लिए स्कूल के 703 स्टूडेंट से एनुअल स्पोर्ट्स के नाम पर झूठी  रिसिप्ट काटी गई है जो कि इन्हीं के KMC Hospital का नगद धन था। इस प्रकार एक Non Profit Organisationचलाने के लिए इसे अपना एक व्यवसाय का केंद्र बना दिया है जिसमें इनकम टैक्स के नियमों का पालन नहीं किया जाता है। सूत्रों के अनुसार इनकम टेक्स विभाग में इन्हें वित्तीय अनियमितताओं को लेकर नोटिस जारी किया है। इसका भी जवाब अभी तक इनकम टैक्स विभाग को नहीं मिल पाया है। एक कर्मचारी  आनंद सिंह ने अपना वेतन वापस लेने  के लिए लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। स्कूल में कार्यरत कुछ अन्य टीचर भी शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का मन बना रही हैं।
जब स्कूल के मालिक विजय खन्ना से पूछा गया तो उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे नकारा दिया तथा कहा कि कुछ लोग नौकरी से निकाले जाने के बाद यह आरोप लगा रहे हैं।
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