धर्म - संस्कृति पहाड़ों की हकीकत

शीतकालीन केदारनाथ पर पीएम से लेकर सीएम भी मौन

जगदंबा प्रसाद कोठारी/रुद्रप्रयाग
ओंकारेश्वर मन्दिर रूद्रप्रयाग जनपद के उखीमठ विकासखंड में स्थित है। इसका पुराना नाम उशामठ था, जो बाद मे उषामठ हुआ और सामान्य बोलचाल
 में उखीमठ कहलाता है। यहां भगवान केदार की शीतकाल मे छह माह पूजा होती है। यह स्थान पंचकेदार का मुख्य पड़ाव भी है। यहीं पर भगवान शंकर ने राजा माधान्ता की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें ओंकारेश्वर रूप मे दर्शन दिये थे तब से यह स्थान ओंकारेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है।
शीतकाल मे भगवान केदारनाथ व मद्दमहेश्वर के गद्दी दर्शन करने देश विदेश से पर्यटक यहीं आते हैं।
इसी स्थान पर श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्द व वाणासुर की पुत्री उषा का विवाह हुआ था।
विश्वविख्यात धाम होने के बावजूद यह मन्दिर राजनीतिक उपेक्षा के चलते पूरा मन्दिर परिसर दयनीय स्थिति में बना है जो कभी भी कि किसी गम्भीर हादसे को न्योता दे सकता है। भगवान केदार नाथ व मदमहेश्वर के गद्दी स्थल पर चौड़ी दरारें पड़ी हैं। उषा अनिरूद्द के विवाह स्थल भी जीर्णक्षीर्ण हैं। भवन के ऊपर से लकड़ी लटक रही है। बरसात मे पूरा मन्दिर परिसर पानी से भर जाता है। मन्दिर परिसर के आसपास के भवन, (जिन्हें स्थानीय भाषा में कोठा कहते हैं) पिछले 18 वर्षों से खण्डहर पड़े हैं।
प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले मदमहेश्वर मेले मे हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं लेकिन  विश्राम के लिए जगह नहीं मिल पाने के कारण वह इन खण्डहरों मे शरण लेते हैं।यह जोखिम भरा है।इन प्राचीन खण्डहरों के ऊपर की पठाल आये दिन गिरती रहती हैं।
एक ओर तो भगवान की ग्रीष्मकालीन गद्दी केदारनाथ मे पुनर्निर्माण के नाम पर और गीत गानों के नाम पर कैलाश खेल से लेकर तमाम ठेकेदारो के माध्यम से करोड़ों का घोटाला हो चुका है, वहीं इसी की शीतकालीन गद्दी स्थल की अनदेखी हो रही है ।
पिछले विधानसभा चुनाव से कुछ माह पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत मदमहेश्वर मेले के उद्घाटन समारोह में उखीमठ पहुंचे तो मन्दिर के दक्षिण भारतीय रावल भीमाशंकर जी ने हरीश रावत जी को सकंल्प दिलाया कि वह ओंकारेश्वर मन्दिर का जीर्णोद्धार करें। भावी चुनाव व भारी जनदबाव को देखते हुए मुख्यमंत्री जी ने तत्काल भवन निर्माण का भूमी पूजन कर भवन निर्माण के लिए पाँच करोड़ रुपये की घोषणा कर दी। स्थानीय जनता मे आस जगी कि अब मन्दिर के दिन सुधरेंगे लेकिन उनकी आशा निराशा मे बदल गयी। न मुख्यमंत्री के दिन सुधरे और न ही मन्दिर के…।
इसी वर्ष भाजपा की नयी सरकार बनने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत जी भी दो बार इस मन्दिर मे पहुंचे तो दोनो बार उनसे भी स्थानीय जनता ने मन्दिर के विषय मे फरियाद लगाई लेकिन ढाक के तीन पात।
कुछ माह पूर्व देश के प्रधानमंत्री व परम शिवभक्त नरेन्द्र मोदी जी भी केदारनाथ दर्शन को आये तो मन्दिर के रावल ने उन्हें भी ओंकारेश्वर मन्दिर के भावी मॉडल सहित ज्ञापन सौंप कर मन्दिर की दशा सुधारने का अनुरोध किया। प्रधानमंत्री जी भी “अति शीघ्र” कहकर उड़ गये। इस बार उन्होने इस पर कुछ नही कहा।
स्वयं मन्दिर समिति  की करोड़ों की अाय है तो फिर सरकार से मदद की जरूरत क्यों?
जानकारों का कहना है कि मन्दिर समिति  व मन्दिर के रावल के बीच आपसी सहमति नही बन रही है। इस कारण मन्दिर का पुनर्निर्माण कार्य अधर मे लटका हुआ है और जनता सरकार के भरोसे है।
स्थानीय निवासी व सामाजिक कार्यकर्ता पवन राणा कहते हैं कि जब भी पर्यटक ओंकारेश्वर मन्दिर आते हैं तो मन्दिर की दशा देखकर हमे शर्मिन्दा होना पड़ता है। मन्दिर के सी ई ओ अनिल शर्मा से जब भी इस विषय मे पूछा जाता है तो वह कहते हैं कि आर्केटेक्ट भेजा है कुछ ही दिनों में आज जाएगा।
यह.कहते हुए उन्हें चार साल हो गए और चन्द माह में उनका रिटायरमेन्ट है।
मन्दिर की दुर्दशा को लेकर उखीमठ की जनता मे भारी आक्रोश है और जल्द जनता आन्दोलन की तैयारी कर रही है।

Parvatjan Android App

Video

Muslim Beaten for Celebrating Independence Day

Get Email: Subscribe Parvatjan

%d bloggers like this: