पहाड़ों की हकीकत

अब डांडा नागराजा को पांचवा धाम बनाने की मांग उठी

मामचन्द शाह

पौड़ी। गढ़वाल के प्रसिद्ध डांडा नागराजा मंदिर में कंडर मेले के अवसर पर राष्ट्रीय गौ सेवा मंच और डांडा नागराजा धर्मसभा के अध्यक्ष सुभाष देशवाल ने प्रसिद्ध  सिद्घपीठ डांडा नागराजा मंदिर को उत्तराखंड का पांचवा धाम घोषित करने की मांग की। इससे क्षेत्रवासियों ने भी इस बात का समर्थन करते हुए भगवान नागराजा के जोरदार जयकारे लगाए।

विगत वर्षो की भांति इस बार भी पौड़ी गढ़वाल के कोट ब्लॉक में पड़ने वाले डांडा नागराजा मंदिर में दो गते बैशाख के अवसर पर कंंडर मेले का आयोजन बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ। इस मौके पर जनप्रतिनिधियों ने प्राचीन सिद्घपीठ डांडा नागराजा मंदिर को उत्तराखंड का पांचवा धाम घोषित करने की मांग कर गेंद प्रदेश सरकार के पाले में सरका दी है।

अपने पाठकों को बता दें कि इससे पहले टिहरी जनपद के सेम मुखेम और हरिद्वार जनपद स्थित पिरान कलियर को भी प्रदेश के पांचवें धाम के रूप में मान्यता दिलाने की मांग उठ चुकी है।

डांडा नागराजा मंदिर पौड़ी जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर कोट ब्लॉक में स्थित है।  यहां प्रतिवर्ष 15 अप्रैल को कंडर मेले का आयोजन किया जाता है।  यहां जनपद के सभी इलाकों सहित अन्य जिलों से भी लोग भगवान नागराज के दर्शन करने आते हैं। प्रसाद के रूप में भगवान नागराज को भेली और श्रीफल चढ़ाया जाता है। कुछ लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद नागराजा के मंदिर में  मंदिर में घंटे चढ़ाने आते हैं। मंदिर के चारों ओर पेड़ों पर टांगे गए सैकड़ों-हजारों घंटे लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होने के साक्षात प्रमाण हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश बताते हैं कि मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ ही दूसरे राज्यों से भी श्रद्घालु पहुंचे थे। डांडा नागराजा मंदिर में भगवान कृष्ण की पूजा की है। मेले में विभिन्न गांवों के लोग ढोल दमाऊ के मंडाण के साथ आते हैं। इस मेले में सैकड़ों लोग आते हैं और आपसी भाईचारे का संदेश लेकर अपने घरों को लौट जाते हैं। डांडा नागराजा जिस पहाड़ी पर स्थित है, उसके ठीक नीचे ब्यासचट्टी (व्यासघाट) नामक स्थान है, जहां कभी  व्यास जी ने तपस्या करने के लिए चट्टी स्थापित की थी। यहां पर गंगा और नयार नदियों का संगम है। यहीं पर कुंड में भगवान नागराज को स्नान कराया जाता है, उसके बाद उन्हें मंदिर में ले जाकर पूजा अर्चना की जााती है।

 

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