एक्सक्लूसिव

एक्सक्लूसिव: अटल पैरामेडिकल संस्थान पर मुख्यमंत्री की मुहर

पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर  देहरादून में खुलेगा राज्य का पहला अटल आयुष पैरा-मेडिकल संस्थान।

कुलदीप एस राणा 

स्थापना से पूर्व ही फर्जी करार दे दिए गए अटल आयुर्वेदिक पैरामेडिकल संस्थान के खुलने का रास्ता अब साफ हो गया है गुरुवार देर शाम संबंधित फाइल पर  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने दस्तखत कर संस्थान के खुलने को हरि झंडी दिखा दी है । मुख्यमंत्री की संस्तुति मिलने से अब संस्थान की स्थापना का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो गया है । भारतीय  चिकित्सा परिषद के एक्ट में प्रदत अधिकारों के क्रम में  परिषद के अध्यक्ष डॉ दर्शन कुमार शर्मा एवं पूर्व रजिस्ट्रार वीरेंद्र दत्त मैठाणी द्वारा देहरादून में प्रदेश के पहले आयुष पैरामेडिकल संस्थान की स्थापना की दिशां में शुरुवात की , रजिस्ट्रार वीरेंद्र दत्त मैठाणी के सेवानिवृत्त हो जाने के उपरांत डॉ शर्मा द्वारा अकेले ही उक्त मुहिम को आगे बढ़ाने का कार्य किया । संस्थान खोलने के प्रयासों को उस वक्त झटका लगा जब राज्य के एक प्रतिष्टित दैनिक समाचार पत्र में उक्त संस्थान की स्थापना को फर्जी करार देते हुए  खबर प्रकाशित कर डाली , जिससे संस्थान में दाखिला लेने को तत्पर छात्रों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। उक्त संस्थान के स्थापित हो जाने से राज्य के युवाओ को आयुष के क्षेत्र में न्यूनतम शुल्क में उच्च गुणवत्ता परक पाठ्यक्रम उपलब्ध हो सकेंगे। जिससे पहाड़ी प्रदेश में आयुष के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।  संस्थान में शिक्षण कार्य के अतिरिक्त  चिकित्सालय भी स्थापित  होना है जहां छात्रों को इनटरनशिप  के साथ ही जनता को आयुर्वेदिक उपचार सुविधाएं निशुल्क प्राप्त हो सकेंगी ,यहां उल्लेखनीय यह भी है कि शासन सरकार पर इसका कोई व्यवभार नही पड़ेगा , परिषद अपने संसाधनों से ही  संस्थान का सम्पूर्ण व्यवभार वहन करेगा।
फ़ाइल पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन मिल जाने से उत्साहित परिषद के अध्यक्ष डॉ दर्शन कुमार शर्मा ने बताया कि   संस्थान की स्थापना की दिशा में सारे कार्य भारतीय चिकित्सा परिषद के एक्ट के अनुरूप ही अंजाम दिए जा रहे है क्योंकि संस्थान स्थापित करने का विचार एक्ट में वर्णित परिषद के कार्य एवं अधिकारों से ही निकल कर आया है । यह संस्थान राज्य का पहला राजकीय आयुष पैरामेडिकल संस्थान होगा । इससे परिषद के राजस्व में भी वृद्धि होगी व रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

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