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ई डिस्ट्रिक्ट में भ्रष्टाचार : सौ से पांच सौ में बनते हैं प्रमाण पत्र। तीस रुपये है फीस

मनोज नाैडियाल

कोटद्वार। उत्तराखंड सरकार के जारी किए जाने वाले जाति प्रमाण पत्र, मैरिज सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, मूल निवासी प्रमाण पत्र, डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट,आय प्रमाण पत्र जैसे तमाम सरकारी सर्टिफिकेट्स हासिल करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने ई डिस्ट्रिक केन्द्र सभी  तहसीलों में खोले थे। उत्तराखंड सरकार ने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को लॉन्च इसलिए किया था, ताकि भ्रष्टाचार को रोका जा सके। इसे ‘ई-डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट’ नाम दिया गया था। यह तकनीक पर आधारित एक ऐसा सिस्टम है, जिसके जरिये लोग न सिर्फ सर्टिफिकेट लेने के लिए घर बैठे आवेदन कर सकते थे, बल्कि सर्टिफिकेट बन जाने पर सीधे उसका प्रिंटआउट निकाल कर उसका इस्तेमाल कर सकते थे।

तमाम विभाग हर साल अलग-अलग तरह के करीब साढ़े 3 लाख सर्टिफिकेट इश्यू करते हैं, लेकिन इनको हासिल करने में लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मसलन, आवेदन जमा कराने से लेकर वेरिफिकेशन और सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए जहां कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, वहीं अपनी एप्लिकेशन का स्टेटस पता लगाना भी मुश्किल होता था। दफ्तरों के काउंटर पर लंबी कतारें लगती थी और विभाग को भी जमा कराए गए दस्तावेजों के वेरिफिकेशन में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस चक्कर में एक सर्टिफिकेट हासिल करने में दो से तीन महीने का वक्त लग जाता था। अब ई-डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट के शुरू होने से लोगों को 21 से लेकर 60 दिनों के अंदर सभी जरूरी सर्टिफिकेट मिलने का वादा किया गया था। इसके जरिये रेवेन्यू डिपार्टमेंट लोगों को तकनीक के इस्तेमाल के जरिये एक तय समय सीमा के अंदर ज्यादा पारदर्शी तरीके से सेवाएं उपलब्ध कराने की बात करता है और इससे वेरिफिकेशन और डिलिवरी का सिस्टम भी सुधारने का दावा करता है, किन्तु ऐसा नहीं हुआ, ठीक इसके विपरीत कोटद्वार तहसील के ई डिस्ट्रिक में ऐसे कार्य हो रहे हैं, जिनका कि कोई भी अधिकारी संज्ञान लेने वाला नहीं है। कोटद्वार तहसील के कर्मचारियों ने तो भ्रष्टाचार की हद ही पार कर दी है, जहां आय प्रमाण पत्र मात्र पंद्रह दिनों के अंदर प्राप्त किया जा सकता है, किन्तु तहसील परिसर ई डिस्ट्रिक कर्मचारी आय प्रमाण पत्र एक ही दिन में दे देते हैं, किन्तु उनको इसके बदले में सौ से पांच सौ रुपये देने पड़ते हैं; किन्तु जो मात्र तीस रुपये की पर्ची कटाता है उसको आय प्रमाण पत्र पंद्रह दिनों के अंदर भी नहीं मिल पाता है। जिसका जीता जागता उदाहरण रोज तहसील के ई डिस्ट्रिक्ट केंद्र में देखने को मिलता है।सुखरो के लेखपाल विगत तीन – चार दिनों से पौडी में मीटिंग में है। इसके वावजूद लोगों के आय प्रमाण पत्र निर्गत किया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में सुखरो का लेखपाल की मिलीभगत भी रहती है। जहाँ कोटद्वार तहसील के दिवारो पर लिखा है कि “भ्रष्टाचार मुक्त तहसील” किंतु यह कथन केवल दिवारो पर ही सुशोभित हो रहा है। जब इस संबंध में प्रभारी तहसीलदार कोटद्वार डबल सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा पाया जाता है तो उचित कार्यवाही की जाएगी।

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