एक्सक्लूसिव खुलासा

खुलासा: सीएम ऑफिस का फर्जीवाड़ा। ऐसा भंडाफोड़ कि चौंक जाओगे।

कृष्णा बिष्ट

 त्रिवेंद्र सरकार को सत्ता में आए एक साल से अधिक हो गया है, लेकिन यह सरकार दूसरे लोगों द्वारा किए गए कार्यों पर अपना ठप्पा लगा कर श्रेय लेने के अलावा कुछ खास नहीं कर पाई है।
 ताजा मामला कल 12 जून का है।इस मामले से पता चलता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय का “सीएम एप” किस तरह से फर्जीवाड़ा कर रहा है।
जिला सूचना अधिकारी बागेश्वर तनु मित्तल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। प्रेस विज्ञप्ति में जो कुछ कहा गया था उसके संपादित अंश आप भी पढ़िए।
इसका हूबहू स्क्रीनशॉट भी यहां दिया जा रहा है।
  जिला सूचना अधिकारी बागेश्वर तनु मित्तल ने प्रेस रिलीज मे कहा कि-
“बागेश्वर 12 जून 2018 माननीय मुख्यमंत्री मोबाइल ऐप पर शिकायत प्राप्त हुई थी कि जनपद बागेश्वर के गरुड़ तहसील के मैगडी इस्टेट में कुछ बिजली के खंभों के तार ढीले हो गए हैं। माननीय मुख्यमंत्री मोबाइल ऐप पर शिकायत प्राप्त होते ही मुख्यमंत्री कार्यालय ने एमडी यूपीसीएल से समस्या के त्वरित समाधान के लिए अपेक्षा की और एमडी ने तत्काल कपड़ों और डोरियों को हटवाकर और लकड़ी के खंभों को भी हटवा दिया और साथ ही एमडी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। समस्या का समाधान होने पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और एमडी यूपीसीएल का आभार व्यक्त किया है।”
 अब आप ध्यान से देखिए यह कितना बड़ा फर्जीवाड़ा है। जब यह प्रेस रिलीज पर्वतजन कार्यालय तक पहुंची तो हमारा माथा ठनका और हमें तत्काल आभास हो गया कि इसमें कुछ न कुछ गड़बड़ है। क्योंकि यह खबर इस संवाददाता ने ही सबसे पहले आठ जून को प्रकाशित की थी। हमने जिला सूचना अधिकारी तनु मित्तल से फोन पर बात करके पुष्टि के लिए शिकायतकर्ता का नाम जानना चाहा तो बदले में उन्होंने थोड़ी देर बाद पता करके बताने को कहा। थोड़ी देर बाद उनका फोन आया और उन्होंने कहा कि यह खबर उन्हें सूचना निदेशालय से मिली थी तथा वहां से उन्हें आदेश दिए गए हैं कि “नाम से मतलब नहीं आप बस जो खबर भेजी है उसे प्रकाशित कराओ।” जब हमने सूचना निदेशालय से पता किया तो वहां से पता चला कि यह खबर प्रकाशित करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से कहा गया था।
 जब पर्वतजन ने “सीएम ऐप” संचालित करने वाले अधिकारी रविंद्र पेटवाल से शिकायतकर्ता और शिकायत का डिटेल जानना चाहा तो उन्होंने टेक्निकल जानकारी ना होने की बात कहते हुए तकनीकी अधिकारी पारितोष सेठ से बातचीत करने को कहा।
 जब पर्वतजन ने पारितोष से बात की तो उन्होंने भी शिकायतकर्ता का नाम नहीं बताया और इसे गोपनीय मुद्दा बताते हुए और तकनीकी जटिलता का हवाला दिया तथा यह कहते हुए अधिक बात करने से ही मना कर दिया कि वह अभी मीटिंग में है।
 पर्वतजन ने 8 जून को आपके लोकप्रिय न्यूज़ पोर्टल पर एक खबर प्रकाशित की थी जिसे आपने भी पढ़ा होगा खबर का टाइटल था,-” लकड़ी के लट्ठों और साड़ियों के सहारे ऊर्जा प्रदेश।”
 आपकी सुविधा के लिए उक्त खबर का लिंक हम फिर से यहां दे रहे हैं।
जब यह खबर आप सरीखे पाठकों के सहयोग से शेयर और कमेंट होकर वायरल हुई तो यूपीसीएल बागेश्वर के अधीक्षण अभियंता नवीन मिश्रा ने पर्वतजन की खबर का संज्ञान लेकर अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया और तत्काल बिजली के तार और पोल ठीक करा दिए।
 पर्वतजन ने जब श्री मिश्रा से बातचीत की तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि उन्हें “सीएम ऐप से ना तो कोई शिकायत आई थी और न ही किसी व्यक्ति ने उनसे शिकायत की थी। बल्कि उन्होंने सिर्फ पर्वतजन की खबर का संज्ञान लेकर यह कार्यवाही की है।”
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बी सी के मिश्रा ने भी यही बात दोहराई कि उन्होने पर्वतजन की खबर का संज्ञान लेकर यह कार्यवाही की है। उन्होंने भी स्वीकारा कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा सीएम ऐप की किसी भी तरह की शिकायत का कोई संज्ञान नहीं है।
 बागेश्वर में यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता श्री पांडे से जब पूछा गया कि उन्हें सीएम ऐप के माध्यम से किस शिकायतकर्ता ने शिकायत भिजवाई तो वह नाम नहीं बता पाए और यह कहकर पिंड छुड़ा लिया कि वह तो एक हफ्ते की छुट्टी पर हैं और उन्हें इस विषय में कुछ भी मालूम नहीं।
गोदी मीडिया की खबरें (न्यूज कटिंग)

  अब आप समझ गए होंगे कि मुख्यमंत्री कार्यालय काम न करके किस तरह फर्जीवाड़े से फर्जी खबरें छपवाकर फर्जी श्रेय हासिल कर रहा है। क्या इस सरकार को इसी तरीके से वोट मिलेंगे !

  सीएम ऐप पर दर्ज शिकायतों पर की गई कार्यवाही का प्रचार प्रसार करते हुए मंत्री कार्यालय शिकायतकर्ता का नाम भी जरूर देता है। बस इसी खबर में शिकायतकर्ता का नाम नहीं दिया गया और यही शक की वजह बना। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हर समस्या के समाधान के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की भारी भरकम टीम से लेकर निदेशालय और शासन स्तर तक के अधिकारी तैनात हैं। “सेवा का अधिकार आयोग” भी सफेद हाथी की तरह पाला जा रहा है। ऐसे में  सीएम ऐप के नाम पर एक और भारी भरकम निठल्ली टीम बनाने के पीछे सिर्फ झूठा प्रचार प्रसार और वाहवाही लूटने का औचित्य क्या है !
 इक्का-दुक्का शिकायतों पर कार्यवाही करके सस्ती लोकप्रियता बटोरकर क्या मुख्यमंत्री संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा गिराने का काम नहीं कर रहे हैं !
 यह एक बड़ा सवाल है।
 यह एक तरीके से सभी शक्तियां सेंट्रलाइज करके व्यक्ति पूजा को बढ़ावा दिलाने वाली बात है।  पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी ने अपने कार्यकाल में एक व्यवस्था लागू की थी। उन्होंने कहा था कि सबसे पहले शिकायतकर्ता को ब्लाक,  जिला स्तर पर शिकायत करनी चाहिए। यदि किसी भी स्तर तक से शिकायत का निस्तारण न हो तभी उनके पास आया जाए। जबकि त्रिवेंद्र रावत शिकायतकर्ता को सीएम ऐप के माध्यम से सीधे अपने इर्द-गिर्द केंद्रीकृत करना चाह रहे हैं।
 और बाकायदा अपनी टीम के द्वारा जो काम उन्होंने किए भी नहीं, उनकी भी फर्जी घोषणाएं और फर्जी खबरें छपवा रहे हैं।और “गोदी मीडिया” आंख मूंद कर प्रायोजित खबरें बिना तस्दीक़ के छाप रहा है।
यह खबर तो पर्वतजन की एक्सक्लूसिव खबर थी, इसलिए पकड़ मे आ गई और पता नही कितनी झूठी कार्रवाई की कहानी बुनकर  सरकार अपनी पीठ ठोक रही होगी ,कहना मुश्किल है।
जरा आप भी नजर रखिए,क्योंकि नजर हटी- दुर्घटना घटी।

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