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सीएम की “ऐतिहासिक थाईलैंड यात्रा”: सोशल मीडिया में निकला जुलूस 

आजकल सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की हालिया थाईलैंड यात्रा को ऐतिहासिक बताने पर बधाई देने वाला एक होर्डिंग खूब ट्रेंड कर रहा है। यह होर्डिंग देहरादून से मेयर पद के दावेदार उमेश अग्रवाल ने लगाया है। सोशल मीडिया में इस होर्डिंग को लेकर खूब चुटीली टिप्पणियां की जा रही हैं।
 पाठकों को याद होगा कि 16 अप्रैल से 19 अप्रैल तक मुख्यमंत्री अपने दल बल के साथ थाईलैंड की यात्रा पर गए थे वहां पर उन्होंने फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के उद्यमियों के साथ सम्मेलन कर उत्तराखंड में निवेश की संभावनाएं टटोली थी। इसके साथ ही स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्र की कंपनियों से भी CM ने उत्तराखंड में निवेश करने का आव्हान किया था। अब थाईलैंड इस आग्रह पर कितना निवेश करने के लिए इच्छुक होता है, यह तो आने वाला समय बताएगा।
  इस सम्मेलन का मुख्य विषय उत्तराखंड पर ही केंद्रित था। इसके बावजूद यह यात्रा जिस उद्देश्य के लिए की गई थी, उसके लिए प्रचारित-प्रसारित होने के बजाय इस बात के लिए चर्चित रही कि इस यात्रा में यात्रा के विषय से बाहर के गैर संबंधित लोग यात्रा दल में शामिल थे।
 सबसे बड़ी चर्चा इस दल में गए हिमालयन यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजय धस्माना को लेकर की थी। एक ओर सरकार उन्हें फीस बढ़ाने को लेकर नोटिस भेज रही है तो दूसरी ओर यूनिवर्सिटी का मुखिया सरकार के साथ इस यात्रा का हमराज हमराही बना था।
 दूसरी बड़ी चर्चा इस बात को लेकर थी कि इस यात्रा का एक मुख्य विषय पर्यटन था, किंतु पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज इस यात्रा के दल में शामिल नहीं थे।
 तीसरी बड़ी चर्चा यह थी कि थाईलैंड मसाज और सेक्स टूरिज्म के लिए चर्चित है। ऐसे में एक आम चर्चा यह रही कि सरकार को थाईलैंड से ही सीखने की क्या जरूरत आन पड़ी !
चौथी चर्चा यह रही कि इस यात्रा में विषय विशेषज्ञों के बजाय अधिकांश वे लोग शामिल थे, जो केवल इसी सरकार के कार्यकाल तक ही सरकार में रहेंगे। ऐसे में थाईलैंड से मिले ज्ञान को कार्यान्वित कैसे किया जाएगा !
 एक हकीकत यह है कि पर्वतजन की पुख्ता जानकारी के अनुसार अकेले देहरादून में आधे दर्जन ऐसे मसाज और वेलनेस सेंटर हैं, जहां थाईलैंड से आई युवतियां न सिर्फ मसाज करती हैं, बल्कि मात्र ₹4000 के ‘फुल बॉडी पैकेज’ में वह अपने क्लाइंट से सेक्स संबंध भी स्थापित करती हैं।एक घंटे के इस पैकेज में यदि कोई दो बार संबंध स्थापित करना चाहता है तो उसे ₹1000 एक्स्ट्रा देने होते हैं। इस तरह के ऑफर बाकायदा WhatsApp ग्रुप में प्रसारित होते रहते हैं।
 जब देहरादून में सरकार की नाक के नीचे यह “थाईलैंड पैटर्न” बेरोकटोक चल रहा है तो उत्तराखंड में ‘विलेज टूरिज्म’ और ‘होमस्टे टूरिज्म’ के साथ “थाईलैंड पैटर्न” मिक्स करने से क्या परिणाम होंगे पाठक इसका अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं।
 जाहिर है कि पर्यटन ही नहीं बल्कि हॉर्टिकल्चर और फूड प्रोसेसिंग के मामले में थाईलैंड के बजाय पड़ोसी हिमाचल का दौरा ज्यादा ब्यूटीफुल हो सकता है।
 उत्तराखंड में भी थाईलैंड जाने वालों में नव धनाढ्य और व्यापारी वर्ग की तादाद कम नहीं है सरकार चाहे तो उत्तराखंड की ट्रैवल एजेंसियों को लेकर एक सर्वे करा सकती है जिससे यह पता लग सकता है कि उत्तराखंड से सर्वाधिक फॉरेन टूर कहां के लिए बनाए जाते हैं!
बहरहाल थाईलैंड यात्रा पर लगी अभिनंदन संदेशों वाले होर्डिंग की चर्चा इसलिए भी समीचीन है कि एक माह पहले ही मुख्यमंत्री ने शहर भर में लगे तमाम होर्डिंग के प्रति अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से मीडिया के माध्यम से जाहिर की थी और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा था कि सभी होल्डिंग शहर से हटा दिए जाएं। उन्होंने यह भी कहा था कि होर्डिंग हटाने की शुरुआत उनकी फोटो वाले होर्डिंग हटाने से की जाए।
 नगर निगम ने CM के फरमान पर इक्का-दुक्का छुट भैया और दूसरी पार्टियों के नेताओं के होर्डिंग हटाकर इस अभियान की इतिश्री कर ली। किंतु नगर निगम चुनाव के मुख्य दावेदारों को चेहरा दिखाना बेहद जरूरी है। अतः वह किसी न किसी बहाने बड़े-बड़े होर्डिंग के साथ हर नुक्कड़ चौराहे पर अपने बड़े-बड़े होर्डिंग लगा दे रहे हैं।
 भाजपा से नगर निगम चुनाव में मेयर पद  के दो मुख्य दावेदार सुनील उनियाल गामा और उमेश अग्रवाल के होर्डिंग लगातार लगाए जा रहे हैं।
अब ताजा होर्डिंग सिर्फ इसलिए चर्चा का विषय बना हुआ है कि इसमें थाईलैंड यात्रा को ऐतिहासिक बताया गया है और इस यात्रा से लौटने पर अभिनंदन किया जा रहा है। बहरहाल आप पढ़ते रहिए पर्वतजन ! हम जल्दी ही थाईलैंड की ऐतिहासिक यात्रा से प्राप्त हुए लाभ हानि का विवरण आपके सम्मुख पेश करेंगे। तब तक आप अन्य स्टोरीज का आनंद उठाइए।

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