राजनीति

सीएम बने सवा शेर तो चैंपियन बोला चीं

भूपेंद्र कुमार

उत्तराखंड  के खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन  कि बागी तेवर वाली गुर्राहट दो दिन में ही मिमियाने पर आ गई।

 हुआ यूं कि देहरादून के दून यूनिवर्सिटी कैंपस में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री वहां आए हुए थे। तब तक उनसे मिलने बिन बुलाए कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन भी पहुंच गए। चैंपियन को यूं अचानक सामने देखकर न सिर्फ आयोजक असहज हो गए बल्कि मुख्यमंत्री भी असहज हो उठे।
 असली मोड़ तब आया, जब कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन जाते वक्त उनसे मिलने के लिए आगे बढ़े लेकिन मुख्यमंत्री उनको अनदेखा करके आगे बढ़ गए।
चैंपियन एक हाथ में कागज पकड़ उनसे मिलने की बात कहने लगे। अभी वह अपना वाक्य पूरा भी नहीं कर पाए थे कि मुख्यमंत्री ने उनसे मिलने से मना कर दिया और कहा कि वह उन्हें बाद में बुलाएंगे। अभी वह घर जा रहे हैं।
 हालांकि मुख्यमंत्री ने बाद में यूनिवर्सिटी के छात्र छात्राओं के साथ फोटो सेशन भी करवाया लेकिन चैंपियन से नहीं मिलना था तो नहीं मिले।
 इससे चैंपियन खिसिया गए चैंपियन के बदले तेवरों पर जब मीडिया ने सवाल दागा तो चैंपियन ने कहा कि मुख्यमंत्री उनके बड़े भाई हैं और धन सिंह रावत उनके छोटे भाई हैं और जब मुख्यमंत्री उन्हें बुलाएंगे तो वह सर के बल भी चलकर आएंगे।
 2 दिन पहले कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने कहा था कि मंत्री संत्री क्या होता है,  वह शेर थे और शेर रहेंगे।
 किंतु अमित शाह के दरबार से लौटे कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने भले ही अपनी फेसबुक वॉल पर मिशन सक्सेसफुल लिख दिया हो, किंतु सार्वजनिक तौर पर उनके बदले तेवर यह सब चुगली कर रहे थे कि अब चैंपियन शेर नहीं रहे, उन्होंने चीं बोल दिया है।
 कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने बताया कि वह मुख्यमंत्री से सहकारिता के विषय को लेकर मिलने आए थे। इससे यह पता चलता है कि सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने उनका कोई काम नहीं किया है, जिसको लेकर उन्हें मुख्यमंत्री तक आना पड़ा। ऐसे में धन सिंह रावत की नाराजगी भी उनसे जल्दी दूर होगी, ऐसा कहना कठिन है और क्योंकि उनसे मुख्यमंत्री भी खफा है तो संभवत: सहकारिता का काम तो लटका ही समझो।
 कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही भी संगठन के स्तर पर शुरू की गई है। उन पर जल्दी ही सार्वजनिक बयान बाजी की गाज गिर सकती है। मुख्यमंत्री की नाराजगी और चैंपियन के बदले तेवरों से यह संदेश जरूर गया है कि प्रचंड बहुमत की सरकार बगावती तेवर से असहज भले ही हो जाए लेकिन डरने वाली नहीं है।

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