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बेमिसाल: डीएम ने लगाए पर्यटन को पंख। राष्ट्रीय स्तर की वाटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता उत्तरकाशी में।

उत्तरकाशी को मिली नई उपलब्धि- जोशियाड़ा झील में  एक्सपर्ट ने तलास किया भारत का अकेला ऐसा स्थान जहाँ पर कैनोइंग और सलालम प्रतियोगिता होगी एक साथ।

गिरीश गैरोला

डीएम आशीष चौहान के प्रयासों के बाद उत्तरकाशी में साहसिक पर्यटन को नए पंख मिल गए हैं जानकारों की मानें तो जल्द ही वाटर स्पोर्ट्स के रूप में उत्तरकाशी का नाम पर्यटन के राष्ट्रीय नक्शे पर आने लगेगा । उत्तरकाशी की जोशियाड़ा झील में जानकारों ने एक ऐसा स्थान तलाश किया है जहां पर वॉटर स्पोर्ट्स की कैनोइंग और सलालम दोनो प्रतियोगिता को एक साथ एक ही स्थान पर संपन्न किया जा सकता है।

बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट स्कीम के तहत रुड़की वाटर स्पोर्ट्स क्लब से आए एक्सपर्ट उत्तरकाशी के 40 युवक-युवतियों को वाटर स्पोर्ट्स का प्रशिक्षण देंगे । आने वाली 20 और 21 जनवरी को उत्तरकाशी की जोशियाड़ा झील में राष्ट्रीय स्तर की वाटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता रखी गई है । जिसमें देश के नामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया टीम के कोच रह चुके फिलिप मैथ्यू ने बताया कि कि सलालम प्रतियोगिता अक्सर पहाड़ से निकलने वाली नदियों में की जा सकती है।

जम्मू कश्मीर में पहाड़ो के बीच बहने वाली नदियों में जहां पत्थरो के बीच पर रैपिड बना होता है। इसी तरह से हिमाचल प्रदेश लेह और मध्यप्रदेश के महेश्वर में सलालम  प्रतियोगिता की जाती है।  उन्होंने बताया कि भोपाल में कनोईग और महेश्वर में सालालम क्रीडा़  की जा सकती है किंतु इन दोनों के बीच में ढाई सौ से 300 किलोमीटर की दूरी है जबकि उत्तरकाशी की इस झील में एक स्थान पर दोनों स्थितियां  मौजूद हैं,  जहां कैनोइंग और सलालम एक ही स्थान पर संपन्न की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि वह देश और विदेश में वाटर स्पोर्ट्स को लेकर खूब घूमे हैं लेकिन भारत का पहला स्थान उन्हें उत्तरकाशी में  में मिला है, जहां दोनों प्रतियोगिताएं एक साथ एक स्थान पर संपन्न हो सकती हैं, यह उत्तरकाशी के लिए बड़ी उपलब्धि है ।यही कारण है कि 20 और 21 जनवरी को राष्ट्रीय स्तर की वाटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता रखी गई है जिसमें दिल्ली हरियाणा और रुड़की से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के  खिलाड़ी हिस्सा लेंगे । उत्तरकाशी में चल रहे प्रशिक्षण में रुड़की स्पोर्ट्स क्लब के 6 लोग ट्रेनिंग दे रहे हैं,  जिसमें फिलिप्स मैथ्यू राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया टीम के कोच रह चुके हैं , अनुज गुसाईं कैनोइंग में पांच बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग ले चुके हैं और फिरोज खान कैनोइंग और कयाकिंग मे नेशनल खेल चुके हैं ।बीएडीपी बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट स्कीम में भटवारी  ब्लॉक के सुक्खी,  झाला,  पुराली, भंगेली,  जसपुर,  धराली,  मुखवा  और हरसिल गांव के 40 युवक युवतियों को वाटर स्पोर्ट्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है ।रुड़की स्पोर्ट्स क्लब के अनुज गुसाईं ने बताया ई कैनोइंग घुटनों के बल की जाती है जिसमें एक तरफी चप्पू चलाया जाता है जबकि कयाकिंग मे दोनों तरफ चप्पू चलाए जाते हैं और व्यक्ति बैठ कर चप्पू चला सकता है। इसमें तीन तरह की श्रेणियां होती हैं । अकेला व्यक्ति , दो लोग अथवा चार लोग एक साथ बैठ  कर सकते हैं । वाटर स्पोर्ट्स की नेशनल और इंटरनेशनल इवेंट में कयाकिंग और कैनोइंग  को शामिल किया गया है । वही ओलंपिक में भी इस इवेंट को मान्यता दी गई है ।

उत्तरकाशी का माघ मेला अब तक बाजार में की गई खरीदारी ,चरखी – झूले तक सीमित था।  जिसे नौजवान आईएएस अधिकारी आशीष चौहान ने नए पंख दे दिए हैं उत्तरकाशी में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता होना इस दिशा में पहला प्रयास है।  डीएम उत्तरकाशी ने बताया कि वह बीएडीपी स्कीम से स्थानीय स्तर पर एक क्लब बनाकर कयाकिंग -केनोइंग की बोट  स्थानीय युवकों को दे रहे है । जिससे वह प्रशिक्षित होकर आने वाले समय में इसे कैरियर के रूप में अपना सकेंगे।

पर्यटन को मुख्य आधार मान कर उत्तर प्रदेश से पृथक हुए उत्तराखंड राज्य के लिए भले ही सूबे के पर्यटन विभाग आंखें मूंदे बैठा है किंतु नौजवान काबिल आईएएस ऑफिसर ने जो कर दिखाया है, उससे उसके बाद सरकार और पर्यटन विभाग को सीख लेने की जरूरत है।

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