एक्सक्लूसिव धर्म - संस्कृति पर्यटन

माघ मेले में उड़ती धूल और अव्यवस्था से हलकान सैलानी

खाने पीने के स्टॉल से बीमारी लेकर जा रहे हैं मेलार्थी। पैसा खर्च कर धूल खाने को मजबूर ग्रामीण

 गिरीश गैरोला 

उत्तरकाशी माघ मेले  का व्यापारिक स्वरूप अब लोगों की जान पर बन आया है । आलम यह है कि माघ मेले में दुकानें ज्यादा और मेला घूमने के लोग कम हो गए है। दरअसल ज्यादा से ज्यादा दुकानें बेचकर लाभ कमाने के फेर में जिला पंचायत के ठेकेदार ने जरूरत से ज्यादा दुकानें मैदान में ठूस दी हैं। जिसके चलते मैदान में उड़ रही धूल से बचने के लिए मेला घूमने आए लोगों को चेहरे पर मास्क लगाने की नौबत आ गई है । मेले में लगे खाने-पीने के स्टाल पर पड़ रही धूल से लोगों के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर जिला पंचायत मौन है।

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दीपेंद्र कोहली ने बताया कि जिला पंचायत ज्यादा लाभ कमाने के फेर में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। जरूरत से अधिक फड़ लगाने से ऐसी स्थिति पैदा हो रही है ।छात्र नेता सोनू सिंह की मानें तो सांस्कृतिक विरासत का स्वरूप लिए हुए उत्तरकाशी का माघ मेला अब जिला पंचायत की दुकानों से कमाई का एक जरिया बनकर रह गया है। जिसमें व्यापार और लाभ को ही प्रमुखता दी जा रही है और क्षेत्र के समृद्धि और पौराणिक संस्कृति कहीं लुप्त  सी हो रही है । सोनू सिंह के माने तो विगत कई वर्षों से दुकानों के आवंटन में ठेकेदार की भूमिका को लेकर विवाद होते चले जा रहे हैं। लिहाजा आम लोग भी मेले से दूरी बनाने में ही बेहतरी समझने लगे हैं।

ओम ग्रुप के संस्थापक अमेरिकन पूरी की माने तो जब से जिला पंचायत ने माघ मेले को ठेकेदार के पास बेचना शुरू किया है, तब से जिला पंचायत अपनी जिम्मेदारी से हट गया है और सब कुछ ठेकेदार के भरोसे छोड़ दिया है।

जिला पंचायत की भूमिका अब सांस्कृतिक कार्यक्रम के पंडाल तक ही सीमित होकर रह गई  है। उन्होंने कहा कि मेले में आने वाले हिमाचल और जम्मू कश्मीर के पुराने व्यापारी अब उत्तरकाशी नहीं पहुंच पा रहे हैं। वजह साफ है कि दुकानों के आवंटन में कालाबाजारी के बाद दो से तीन गुना महंगी दर पर दुकानें खरीदने के बाद अच्छी क्वालिटी का सामान बेचना व्यापारियों के लिए किसी सरदर्द  से कम नहीं है ।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रकाश रमोला ने स्वीकार किया कि माघ मेले  में बहुत ज्यादा धूल उड़ने से लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो रहा  है। उन्होंने कहा कि माघ मेला मैदान पहले की तुलना में बहुत छोटा हो गया है । और यहां पर पानी की भी बहुत कमी है ।उन्होंने मीडिया का धन्यवाद किया करते हुए कहा कि अगले दिन सुबह 10:00 बजे से पहले ही मैदान में पानी का छिड़काव करने के निर्देश दे दिए जाएंगे , ताकि धुल कम से कम उड़े । जरूरत से ज्यादा फड़  और दुकान में लगाए जाने के सवाल पर उपाध्यक्ष जिला पंचायत ने कहा अगले वर्ष इस कमी को दूर करते हुए माघ मेला मैदान से बाहर के स्थानों को कवरेज देते हुए पूरे शहर को माघ मेले में स्थान दिया जाएगा । ताकि एक ही स्थान  पर लोगों की भीड़ एकत्रित न हो सके।

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published.

Parvatjan Android App

Get Email: Subscribe Parvatjan

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: