एक्सक्लूसिव

जंगलों को जलता छोड़ लंदन और पोलैंड की सैर पर जंगलात के अफसर।

उत्तराखंड के पहाड़ों पर लगभग 1000 हेक्टेयर जंगलों को जलता हुआ छोड़कर उत्तराखंड वन विभाग के अफसर स्टडी टूर के नाम पर सात समंदर पार लंदन और पोलैंड की सैर पर निकल गए हैं। वन विभाग के मुखिया जयराज ने इधर इन अफसरों को विदेश जाने की इजाजत दे दी और उधर स्थानीय लोगों को जंगल बचाने में सहयोग करने का उपदेश दे रहे हैं।
यह तो वही बात हो गई कि जब रोम जल रहा था तो नीरो बंसी बजा रहा था। अब तक इस सीजन में आग की 700 से अधिक घटनाएं हो गई है और वन तथा वन संपदा को अरबों नुकसान हो चुका है।
ये अफसर विदेश भ्रमण पर
उत्तराखंड के मुख्य वन संरक्षक विवेक पांडे, वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते और एक डीएफओ नीतीश मणि त्रिपाठी 2 सप्ताह केेेे लिए विदेश भ्रमण पर निकल गए हैं।
यह अफसर वहां पर वाइल्ड लाइफ इंडिया और लंदन की जूलॉजिकल सोसायटी के संयुक्त्त तत्वाधान मे नंदौर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में बाघों के पंजों के निशानों की स्टडी करेंगे।
क्या ये बेहतर नही होता यह अफसर अभी उत्तराखंड में रहकर आग से लड़ रहे अपने कर्मचारियों तथा स्थानीय ग्रामीणों की मदद करते, उन्हें हौसला बढ़ाते !
ताज्जुब की बात यह है कि इन अफसरों को विदेश दौरे की इजाजत वन विभाग के सर्वोच्च मुखिया अफसर जयराज नेे ही दी है।
एक आरटीआई के अनुसार राज्य बनने से अब तक 44000 हेक्टेयर से अधिक जंगल आग की भेंट चढ़ चुके हैं। जिनमें अरबों खरबों रुपए की वन संपदा नष्ट हो गई और कई वन्यजीवों और वनस्पतियों की प्रजातियां सदैव के लिए खत्म हो गई। लेकिन वन विभाग की नौकरी को पिकनिक की तरह समझने वाले जंगलात के अफसरों को क्या फर्क पड़ता है !
 ऐसे में जंगलों की आग और जंगली जानवरों का आए दिन सामना कर रहे उत्तराखंड के लोग जंगलों के प्रति अपने मन में भला मित्रवत संवेदना कैसे जगा सकते हैं!
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