एक्सक्लूसिव

ऐतिहासिक फैसला : हाईकोर्ट के वकील पर दो लाख जुर्माना

कृष्णा बिष्ट नैनीताल
फेसबुक पर अंट शंट लिखने तथा कोर्ट को गुमराह करने पर हाई कोर्ट के वकील करगेती पर लगा ₹2लाख जुर्माना
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने फेसबुक पर बिना आधार के अंट शंट आपत्तिजनक भाषा शैली इस्तेमाल करने तथा कोर्ट को गुमराह करने को लेकर आज एक ऐतिहासिक फैसला दिया है।
फ़ेसबुकिया शरारतियों को सबक
इस फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बिना आधार के फेसबुक पर कुछ भी लिख देने तथा हाईकोर्ट में बिना तथ्यों के भ्रामक जानकारी देने वालों पर कुछ लगाम लग सकेगी।
जनजाति आयोग के सचिव से ही जाति सूचक अभद्रता
उत्तराखण्ड हाई कोर्ट  ने एससी, एसटी आयोग के सचिव जी.आर. नौटियाल के खिलाफ फेसबुक में उनके कॅरियर से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणी लिखने पर दो लाख का जुर्माना लगाने के साथ मुकदमे की प्रक्रिया रोकने को लेकर याचिका खारिज कर दी है। जीआर नौटियाल ने  याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 2016 में एससी एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज कराई थी।
 हल्द्वानी निवासी तथाकथित आरटीआई एक्टिविस्ट व अधिवक्ता चन्द्रशेखर करगेती ने सचिव नौटियाल के खिलाफ फेसबुक में आपत्तिजनक कमेंट्स लिख दिए तो नौटियाल ने देहरादून थाने में मामला दर्ज किया था। देहरादून के वसंत विहार थाने में सितंबर 2016 में दर्ज मुकदमे में श्री नौटियाल ने करगेती पर सोशल साइट पर उनके खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप लगाया था। इस में जातिसूचक शब्दों के प्रयोग की भी शिकायत दर्ज कराई गई थी।
 पुलिस ने आईटी एक्ट तथा एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया था, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की।पूर्व में कोर्ट ने उनके गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
 पुलिस द्वारा मामले में चार्ज शीट दायर की गयी। इस चार्ज शीट में उनको आरोपित माना गया। इस चार्ज शीट को उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर आज न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद याचिकाकर्ता अधिवक्ता चन्द्र शेखर करगेती पर दो लाख का जुर्माना लगा कर एक माह में जमा करने को कहा है।
हाईकोर्ट ने जताई सख्त नाराज़गी लगाया दो लाख जुर्माना 
 कोर्ट ने इस बात पर सख्त नाराजगी जताई कि चंद्र शेखर करगेती ने कोर्ट को शपथ पत्र के साथ गलत और भ्रामक तथ्य बताकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है। शपथ पत्र के साथ कोर्ट को झूठे डॉक्यूमेंट जानबूझकर बताने के कारण कोर्ट ने करगेती पर ₹2लाख का जुर्माना लगा दिया।
 हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर कई अन्य कोर्ट के फैसलों को नजीर की तरह पेश करते हुए बताया कि कोर्ट को गुमराह करना बेहद आपत्तिजनक है। चंद्रशेखर करगेती ने जो दस्तावेज हाई कोर्ट में दिए कोर्ट ने उसे हाईकोर्ट के साथ फ्रॉड माना है।
माननीय उच्च न्यायालय ने जांच अधिकारी द्वारा दायर की गई चार्जशीट तथा ट्रायल कोर्ट सेशन जज देहरादून द्वारा करगेती के विरुद्ध की गई कार्यवाही को भी सही माना है।
ट्रायल कोर्ट को भी निर्देश
 माननीय उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट (SC ST) को यह भी आदेश दिए हैं कि ट्रायल कोर्ट प्रकरण मे बेवजह किसी पक्ष को विलंब के लिए छूट न दे।
 कोर्ट ने कहा कि अन्य कोर्ट ने तो भ्रामक शपथ पत्र देने पर 10लाख रुपए तक के जुर्माने लगाए हैं, लेकिन यह कोर्ट सिर्फ सबक सिखाने के लिए मात्र ₹2लाख का जुर्माना लगा रही है।
 हाई कोर्ट के न्यायाधीश लोकपाल सिंह ने अपने आदेश में रजिस्ट्रार जनरल को कहा कि वह नैनीताल के जिलाधिकारी को यह रकम वसूलने का आदेश जारी करें।

Get Email: Subscribe Parvatjan

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: