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मिसाल : उत्तराखंड के आईएफएस ने पुलवामा शहीदों के परिवार हेतु दिए पौने तीन लाख

कृष्णा बिष्ट 

परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः ।

परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थ मिदं शरीरम् ॥

अर्थात- परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं, परोपकार के लिए ही नदियाँ बहती हैं और परोपकार के लिए गाय दूध देती हैं। अर्थात् यह शरीर भी परोपकार के लिए ही बना है।

यही वह श्लोक है जिसे संजीव चतुर्वेदी ने अपने जीवन में चरितार्थ किया हुआ है। यही कारण हैं की जो कभी 2015 में “रमन मैग्सेसे अवार्ड” से प्राप्त धनराशि को “अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान” को दान दे देते हैं किन्तु उस वक्त वो राशि किन्ही कारणों से एम्स लेने से इनकार कर देता है, जिस के बाद संजीव उस राशि को प्रधानमंत्री रास्ट्रीय राहत कोष में दान दे देते हैं।

इस बार संजीव चतुर्वेदी ने एक बार फिर से पुलवामा के शहीदों के परिवार को लगभग 2.70 लाख रुपये की सहायता राशि दे कर मिसाल कायम की है। दरअसल काफी लंबे समय से चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और एस. फॉक्स कंस्ट्रक्शन कंपनी के बीच छह करोड़ के ठेके मे सोसिर्टी की लगभग साठ लाख की सड़क के निर्माण में हुवी देरी को लेकर विवाद चल रहा था।

इस विवाद को सुलझाने के लिए चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने जनवरी 2018 में भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को बतौर आर्बिट्रेटर नियुक्त किया, नियमों के अनुसार आर्बिट्रेटर को एक वर्ष के अंदर ही विवाद पर अपना फैसला देना होता है, जिसे देखते हुए संजीव चतुर्वेदी ने इस मामले की सुनवाई फरवरी से ही आरम्भ करदी और 23 फरवरी 2019 को इस मामले पर अपना अंतिम निर्णय भी दे दिया ।

जिसके एवज में संजीव चतुर्वेदी को फीस के तौर पर लगभग 2.70 लाख रुपये का भुगतान होना तय हुआ था जिसे संजीव चतुर्वेदी ने पुलवामा मे शहीद सैनिकों के परिवार को सहायता स्वरूप भेंट करनेे का निर्णय लिया जिसके लिए संजीव ने 23 फरवरी 2019 को

निर्माण कंपनी व चंडीगड़ हाउसिंग सोसाइटी को इस संबंध में प्रस्ताव करते हुए उनको मध्यस्थता के रूप में मिलने वाली अपनी फीस को सीधे केन्द्रीय ग्रह मंत्रालय के खाते में जमा करने को कहा है।

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