सियासत

वैकल्पिक राजनीति की शुरुआत ! 2200 किलोमीटर लंबी “जनसंवाद यात्रा” से पहला चरण पूरा।

स्थायी राजधानी के लिए होगी आर-पार की लड़ाई।
सड़क पर उतरेगी प्रदेश की जनता।

25 दिसंबर को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की जयंती पर होगी विशाल रैली।

2200 किलोमीटर लंबी जनसंवाद यात्रा के समापन के बाद देहरादून में की पत्रकार वार्ता।

देहरादून । स्थायी राजधानी गैरसैंण समेत उत्तराखंड के मूलभूत सवालों को लेकर पंचेश्वर से उत्तरकाशी तक की जन संवाद यात्रा ने प्रदेश में बड़े जनांदोलन की जमीन तैयार कर दी है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए प्रदेश में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इसके लिए पूरा पहाड़ एकजुट हो रहा है और आगामी 25 दिसंबर को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की जयंती पर बड़ी रैली की जाएगी। स्थायी राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के तत्वावधान में की गई जन संवाद यात्रा के संयोजक चारु तिवारी ने देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में यह बात कही।

10 अक्टूबर को पंचेश्वर (चंपावत) से शुरू हुई यात्रा लगभग 2200 किलोमीटर का सफ़र करते हुए 25 अक्टूबर को उत्तरकाशी में समाप्त हुई। पत्रकार वार्ता में यात्रा के अनुभव साझा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भाजपा-कांग्रेस ने अट्ठारह वर्षों में उत्तराखंड को जिस तरह छला, उसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। वक्ताओं ने स्थायी राजधानी के मुद्दे पर जनता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी देखने के लिए पूरा पहाड़ लामबंद होने लगा है।

युवा आंदोलनकारी प्रदीप सती ने कहा, जिस उत्साह के साथ संवाद यात्रा को लोगों ने समर्थन दिया है, उससे साफ़ है कि पहाड़ वासी कांग्रेस-भाजपा के पाखंड को समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जिस भी हिस्से में यात्रा पहुंची वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भयंकर संकट है। युवा आंदोलनकारी मोहित डिमरी ने कहा कि पिथौरागढ़ से लेकर उत्तरकाशी तक प्रदेश की आम जनता गैरसैंण राजधानी के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि पंचेश्वर से लेकर उत्तरकाशी तक की जन संवाद यात्रा ने प्रदेश में संघर्षों की बड़ी जमीन तैयार कर दी है।राज्य आंदोलनकारी वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट ने कहा कि सरकार को ग्रीष्मक़ालीन-शीतकालीन की सनक छोड़ कर गैरसैंण को प्रदेश की स्थायी राजधानी घोषित करनी होगी। इसके लिए पूरा पहाड़ एकजुट हो रहा है।

वरिष्ठ आंदोलनकारी कमला पंत ने कहा कि पहाड़ी प्रदेश की राजधानी गैरसैंण में हो यह राज्य आंदोलन के वक्त से ही जनता की मांग थी लेकिन भाजपा-कांग्रेस ने लगातार इस मांग को हाशिए पर धकेला । यात्रा में शामिल युवा आंदोलनकारी मनीष सुंदरियाल और सल्ट के जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड के मूल भूत सवालों को लेकर हुक्मरानों ने पिछले अट्ठारह वर्षों में जनता को जिस तरह छला है उसको प्रदेश की जनता समझने लगी है।

गैरसैंण से आए नारायण बिष्ट और पिथौरागढ़ के युवा मुकुल भट्ट ने कहा कि सरकार पहाड़ की ज़मीनों को उद्योगपतियों के हवाले करने की साज़िश कर रही है जिसका प्रतिकार करना होगा। विनोद डिमरी, रमेश नौटियाल और नमन चंदोला ने कहा कि कृषि उत्तराखंड की रीढ़ रही है लेकिन इसे बड़ी साजिश के तहत खत्म किया जा रहा है ताकि पूंजीपतियों के लिए आसान रास्ता तैयार किया जा सके। प्रेसवार्ता के दौरान जयदीप सकलानी, सतीश धौलाखंडी, मेयर पद के प्रत्याशी जगमोहन मेंदीरत्ता, विनोद बगियाल, शंकर सिंह भाटिया आदि मौजूद रहे।

यह रहा यात्रा रूट

2200 किलोमीटर लंबी यात्रा में पहाड़ के सभी 10 पर्वतीय जिलों में पचास से ज़्यादा छोटी-बड़ी सभाएं आयोजित की गईं। संवाद यात्रा पंचेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, झूलाघाट, पिथौरागढ़, डीडीहाट, गंगोलीहाट, बागेश्वर, बैजनाथ, अल्मोड़ा, नैनीताल, रामनगर, मरचूला, धूमाकोट, मौल्याखाल, भिकियासैंण , द्वारहाट , चौखुटिया, गैरसैंण, कर्णप्रयाग, घाट, गोपेश्वर, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, तिलवाड़ा, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, श्रीनगर, टिहरी, चंबा होते हुए उत्तरकाशी पहुंची।

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