एक्सक्लूसिव खुलासा

मैडम का जिला पंचायत की कुर्सी छोड़, नगर पालिका का दांव । विवाद शुरू

जिला पंचायत का कांटों भरा ताज छोड़ नगर पालिका की तरफ दौड़ लगाएंगी जसोदा? निवाचन आयोग में जसोदा की शिकायत।
पंचायत नामावली के साथ पालिका क्षेत्र में भी नाम दर्ज कराने की शिकायत पर राज्य निर्वाचन आयोग ने डीएम से मांगी रिपोर्ट।
गिरीश गैरोला
जिला पंचायत अध्यक्ष उत्तरकाशी  जसोदा राणा के द्वारा पंचायत निर्वाचन नामावली में नाम हटाये बिना बड़कोट नगर पालिका वार्ड नं 3 में नाम लिखाये जाने को लेकर स्थानीय निवासी तजवार सिंह कलूड़ा द्वारा शिकायत किये जाने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा डीएम उत्तरकाशी को विस्तृत जांच कर कार्यवाही के निर्देश दिए गए है।
गौरतलब है कि जसोदा राणा इस समय उत्तरकाशी जिला पंचायत की अध्यक्ष पद है । इससे पूर्व जसोदा राणा नगर पंचायत बड़कोट की अध्यक्ष रह चुकी है अब एक बार फिर से जिला पंचायत के कांटों भरे ताज को छोड़कर नगर पंचायत से नगर पालिका बनी बड़कोट पालिका में अध्यक्ष पद की दावेदारी कर सकती है। उत्तरकाशी जिला पंचायत का कार्यकाल आरम्भ  से ही विवादों के चलते चर्चाओं में बना रहा था हाल ही में जिला पंचायत की बैठकों में न आने और अधिकारियों को भी आने से रोकने के आरोप लगाते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष समेत ज्यादातर सदस्यों ने सीडीओ विनीत कुमार को उनके कमरे में तालाबंद कर बंधक बनाया था। जिस पर खुद सीडीओ की शिकायत के बाद अध्यक्ष समेत जिला पंचायत सदस्यों पर पुलिस में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।
 जिला पंचायत का अभी कार्यकाल बाकी है किंतु भविष्य में यमनोत्री विधान  सभा से विधायक की दावेदारी करने को उत्सुक जसोदा राणा को फिलहाल नगर पालिका बड़कोट के अध्यक्ष पद ज्यादा मुफीद नजर आ रहा है किंतु ये सब  इतना भी आसान नही है।  विरोधियों ने ऐसा चक्र व्यू बनाया है कि जीत के लिए काफी कुछ तो कुर्बानी करनी पड़ सकती है।चुनाव में  ललिता रावत, अनुपमा रावत, और कृष्णा राणा के प्रभाव से उन्हें जबरदस्त किलेबंदी कर बाहर निकल कर आना होगा।
जसोदा राणा पौंटी से जिला पंचायत की निर्वाचित सदस्य है और  पंचायत निर्वाचन नामावली में वही से 2013 में उनका नाम दर्ज हुआ है। पालिका बड़कोट में अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने के लिए पालिका क्षेत्र में उनका नाम दर्ज होना जरूरी है किंतु इसके लिए नए पते पर 6 महीने से निवास करना जरूरी होता है इससे भी जरूरी दूसरे स्थान से उनका नाम हटना भी जरूरी  है।
इस संबंध में जसोदा राणा ने इसे विरोधियों की करतूत बताया है उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी मिली है कि उक्त शिकायत कर्ता ने अपनी शिकायत वापस भी ले ली थी। किन्तु बड़कोट प्रभारी एसडीएम अनुराग आर्य ने बताया कि इसी तरह के अन्य मामले में पालिका  क्षेत्र में नाम दर्ज करने और दूसरी जगह पर नाम नही होने के झूठे शपथ पत्र देने के आरोप में उक्त व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जा चुके है। जबकि जसोदा राणा के मामले में पंचायत निर्वाचन नामावली के बाद विधान सभा नामावली में उनका नाम कहा दर्ज था और इस दौरान दूसरे स्थान से उनका नाम काटा गया या नही इसकी जांच तहसीलदार से कराई जा रही है। जिसके बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग को जबाब दिया जा सकेगा।
फिलहाल हाल ही में बीजेपी में शामिल हुई जसोदा राणा ने पालिका अध्यक्ष पद पर खुद की दावेदारी के लिए आरक्षण का ऐसा अस्त्र चलाया कि विरोधियों की मेहनत बेकार चली गई किन्तु इस अस्त्र के प्रभाव से गुस्साए सभी विरोधी एकजुट होकर जसोदा के किले में सेंध लगाने की पूरी तैयारी में जुट गए हैं।

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