पहाड़ों की हकीकत

अधिकारियों की लापरवाही से नवोदय की प्रवेश परीक्षा से वंचित छात्र

नीरज उत्तराखंडी

उत्तरकाशी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की लापरवाही तथा गैरजिम्मेदार रवैये के चलते दो दर्जन से अधिक छात्रों को जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा से वंचित रहने का मामला प्रकाश में आया है।आक्रोशित अभिभावकों ने लापरवाह अधिकारी तथा कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्र के करीब आधा दर्जन प्राथमिक विद्यालय के 26 बच्चे अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा देने से वंचित रहे ग्ए। इन बच्चों के आवेदन पत्र खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय में धूल फाॅक रहे है। इस मामले मे खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय एवं नवोदय विद्यालय प्रशासन एक दूसरे की गलती बता कर मामले से अपना पल्लू झाड़ रहे है। इन बच्चों के आवेदन नवोदय विद्यालय तक पहुँचाने की जिम्मेदारी किसकी है यह तो जांच का विषय है, लेकिन फिलहाल ये बच्चे प्रवेश परीक्षा देने से वंचित रह गए हैं। जिसको लेकर अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले की जांच कर दोषियो के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय उदकोटी, समाधि मठ,मांडिया एवं जीनियस पब्लिक स्कूल पुरोला के 26बच्चों के आवेदन नवोदय विद्यालय तक ही नही पहुँच पाए। ये सभी आवेदन यहाँ खंडशिक्षाधिकारी कार्यालय में धूल फाॅक रहे है। जवाहर नवोदय विद्यालय द्वारा इस वर्ष कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा हेतु आवेदन पत्र ऑन लाइन एवं ऑफ लाइन मांगे गए थे। आवेदन पत्र की अंतिम तिथि 15दिसम्बर2018 तक रखी गई थी। उपरोक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापको ने 5दिसम्बर तक खंडशिक्षाधिकारी कार्यालय में आवेदन पत्र जमा कर दिए थे जिसकी कि खंडशिक्षाधिकारी कार्यालय द्वारा बाकायदा रीसिविंग भी दी गई है लेकिन खंडशिक्षाधिकारी कार्यालय से मात्र आठ किमी की दूरी पर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय धुनगिर में चार माह तक भी ये आवेदन पत्र नहीं पहुँच पाए। शुक्रवार को कुछ बच्चों को प्रवेश पत्र न मिलने पर इसकी भनक लगी कि 26आवेदन पत्र यहाँ खंडशिक्षाधिकारी कार्यालय में ही धूल फाॅक रहे है। बच्चों के अभिभावकों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है अभिभावक जगवीर सिंह, धीरपाल सिंह, वीरेंद्र सिंह, विजय कुमार ने बताया कि नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा हेतु इन बच्चो ने रात दिन मेहनत की थी लेकिन कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों के गैर जिम्मेदारी के कारण ये बच्चे परीक्षा देने से वंचित रह गए है।
इस संबंध में खंड शिक्षाधिकारी चतर सिंह चौहान का कहना कि आवेदन पत्र ले जाने की जिम्मेदारी नवोदय विद्यालय की है। नवोदय विद्यालय के प्राचार्य पीएस रावत ने बताया कि विद्यालय से उनका प्रतिनिधि खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय गया था, लेकिन उन्होंने कोई भी आवेदन पत्र नहीं दिया। अभिभावकों ने जिलाधिकारी से मामले की जांच कर दोषियो के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

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