एक्सक्लूसिव पहाड़ों की हकीकत

कैसे बनेगा पैग: दारू है पर पानी नही ।

यात्रा मार्ग पर दारू तो उपलब्ध पर पानी की बनी हुई है किल्लत।
गिरीश गैरोला
चार धाम यात्रा मार्ग पर गंगोत्री,  यमनोत्री दर्शन के बाद केदारनाथ मार्ग पर धौंत्री में शराब की सरकारी दुकान  तो मौजूद है,पर पेयजल की आज भी किल्लत बनी हुई है। शौकीन लोगों से सोडा से पीने की अपेक्षा करने वाली सरकार पेयजल के लिए कई कागजी घोड़े दौड़ाने में मस्त है। आलम  ये है कि देश दुनिया की प्यास बुझाने वाली गंगा और यमुना के मायके में लोगों के हलक ठंडे पानी की बजाय अंग्रेजी शराब से तर हो रहे हैं।
मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग चार धाम यात्रा के बहाने पहाड़ों का रुख कर रहे हैं वहीं गर्मियों में अतिरिक्त आने वाले इन मेहमानों के लिए जल संस्थान आग लगने पर कुंआ खोदने जैसी कार्यवाही करता नजर आता है। हर वर्ष यात्रियों और पर्यटकों की तादाद को देखते हुए विभाग के चेहरे पर चिंता की लकीरें जरूर दिखाई देती हैं किन्तु यात्रा काल समाप्त होते ही फिर पुरानी मस्ती शुरू हो जाती है।
चार धाम यात्रा में यमनोत्री गंगोत्री दर्शन के बाद यात्री लंबगांव मार्ग से केदारनाथ का रुख करते हैं। टिहरी झील निर्माण के बाद इस तरफ यात्रियों का दबाव बढ़ा है, किन्तु यात्री सुविधा जस की तस है। इस दौरान यात्री चौरंगीखाल और धौंत्री होते हुए टिहरी जनपद में प्रवेश करते हुए रुद्रप्रयाग जनपद के केदारनाथ तक पहुंचते हैं। यात्रा व्यवस्थाओं  की बात करें तो धौंत्री में सरकारी शराब की दुकान तो समय पर खोल दी गयी थी, किन्तु पीने के पानी की अभी भी किल्लत बनी हुई है।
 धौंत्री व्यापार मंडल के अध्यक्ष  फूल सिंह रावत ने बताया कि धौंत्री बाजार में यात्रा मार्ग और धौंत्री पल्ला गांव जो शिरी ग्राम सभा का हिस्सा है, में विगत कई दिनों से पानी की किल्लत बनी हुई है।
 गांव के ही लाखी सिंह रावत, प्यार सिंह , सुंदर सिंह, रतन सिंह बिष्ट, सोहन लाल, राजेश लाल, धन सिंह ने बताया कि वर्षो पूर्व खुरमुला तोक से पानी के स्रोत से गांव के लिए पेयजल योजना तैयार की गई थी। किन्तु विगत 6 महीने से लाइन में पानी नही आ रहा है। विभाग पानी के बिल तो भेजता है पर कभी देखभाल करने नही आता।
 कई बार खुद ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से पानी की लाइन ठीक की, किन्तु कुछ दिन बाद फिर ढाक के तीन पात। गांव में करीब 50 परिवार रहते हैं, जिन्हें जलकुर नदी और प्राकृतिक श्रोतों से पानी ढो कर लाना पड़ता है।
 खुद के लिए तो किसी तरह ले आओ, किन्तु जानवरों के लिए पानी ढोने में पूरा दिन निकल जाता है।  ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी फिटर तीन दिन पहले गांव में आया तो था किंतु बिना कुछ कहे वापस चला गया ।
जल संस्थान के अवर अभियंता  एसएस भंडारी से फोन पर सम्पर्क नही हो पाया किन्तु सूत्रों की माने तो  पर्वतजन टीम के आने की सूचना पर विभाग ने बचन सिंह, चैत सिंह और कुंवर सिंह जो स्थानीय फीटर है, को मौके पर रिपोर्ट देने के लिए भेजा गया है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर विभाग अगली कार्यवाही करेगा।
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