एक्सक्लूसिव राजकाज

वार्षिक परीक्षा के बाद भी मासिक टेस्टः नाराज शिक्षक संगठन

वार्षिक परीक्षा के बाद भी मासिक टेस्ट को लेकर शिक्षक संगठन ने उठाए सवाल।
राजकीय शिक्षक संघ ने जताया विरोध ।
पत्र जारी कर परीक्षा का बहिष्कार करने के दिये निर्देश।
गिरीश गैरोला।
सूबे में सरकारी शिक्षा व्यवस्था एक प्रयोगशाला बनकर रह गई है। नित नए प्रयोगों आजमाए जाने से  उसे स्कूलों में  अमल में लाने वाले परेशान हो गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा शासन स्तर से जारी निर्देश के बाद प्रत्येक स्कूलों में 3 महीनों में होने वाले टेस्ट के स्थान पर प्रति महीने मासिक टेस्ट की व्यवस्था कराई गई है।
 जिसके लिए प्रश्न पत्र बाहर से मंगाए जा रहे हैं।  सूत्रों की माने तो पांच प्रश्न पत्र जो बाहर से बनकर मुख्य शिक्षा अधिकारी के कार्यालय तक पहुंच रहे हैं, उन्हें बाजार दुकानों पर फोटो स्टेट करने के बाद जिले के  सभी स्कूलों में भेजा जा रहा है। बाजार में फ़ोटोस्टेट के बाद प्रश्नपत्र की गोपनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों कि कार्य क्षमता पर कोई शक है अथवा वे इसके लायक नही? आलम यह है कि स्कूलों में बोर्ड परीक्षाओं को छोड़कर सभी कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। इसके बावजूद उसी कक्षा में फिर से मासिक टेस्ट दिलाया जाना कहां तक वाजिब है! यदि टेस्ट हो भी जाए तो इनका मूल्यांकन करने के लिए शिक्षक कैसे मिलेंगे ?  क्योंकि आगामी बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए सभी स्कूलों से शिक्षकों को बोर्ड ड्यूटी के लिए रिलीव किया जाना है। ऐसे में इस मासिक परीक्षा का कोई औचित्य समझ से परे है।
माध्यमिक शिक्षक संगठन ने पत्र जारी कर इस आदेश का विरोध किया है। साथ ही सभी स्कूलों को दिशा निर्देश देते हुए परीक्षा नही कराने के निर्देश जारी किए है।
वही जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिश्चंद्र आर्य ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग द्वारा ये प्रयोग किया गया था, जिसे अब कक्षा तीन से आठ तक ही कराया जा रहा है। इसके अलावा जिन महीनों में प्री बोर्ड और बोर्ड की परीक्षा होनी है, उन महीनों में यह परीक्षाएं नहीं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि नए सत्र अप्रैल से दिसंबर -जनवरी  तक की ये मासिक परीक्षायें करायी जा सकेंगी।
राजकीय शिक्षक संघ के द्वारा विरोधस्वरूप मासिक परीक्षा न कराए जाने के निर्णय से मुख्य शिक्षा अधिकारी ने अनभिज्ञता प्रकट की। हालांकि राजकीय कीर्ति इंटर कॉलेज उत्तरकाशी में अभी भी छात्रों को इस परीक्षा में भाग लेते हुए देखा गया। जबकि उनकी उस कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं।

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