पहाड़ों की हकीकत

विभाग की लापरवाही से पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण

नीरज उत्तराखंडी

जनपद उत्तरकाशी के विकास खण्ड मोरी के धारा गांव में  क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन की मरम्मत न होने से पेयजल आपूर्ति ठप है जिससे गांव के 80 परिवार  पेयजल संकट  से जूझ रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार अस्सी के दशक में  बेरगा जलस्रोत लगभग 2किमी  लम्बी धारा  पेयजल योजना का निर्माण किया गया तथा जल संस्थान  द्वारा इस पेयजल योजना पर  वर्ष 2004पुनर्निर्माण पर 90हजार  2005में  विस्तारीकरण  पर 80हजार तथा वर्ष 2013-14में मरम्मत के नाम 1लाख रूपये खर्च किये गये । लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते  यह लाइन वर्तमान समय में बदहाल पडी है। पाइपलाइन जगह-जगह टूट चुकी  है। जगह-जगह पानी  का रिसाव हो रहा है। जिससे  पेयजल आपूर्ति  ठप है। ग्रामीणों  को  जल स्रोत से पीठ पर पानी  ढो कर लाना पड़ रहा है  ग्रामीणों का कहना  है  जीर्ण-शीर्ण पाइपलाइन को दुरूस्त करने की विभाग कोई  सुध नहीं  ले रहा है।

यही हाल  अग्नि प्रभावित गांव  सावणी में  निवास करने वाले 24 परिवारों  के है पेयजल आपूर्ति ठप होने से ग्रामीण महिलाएं 400 मीटर दूरी से पानी  ढोने को मजबूर  है। प्राप्त जानकारी के अनुसार  विकास खण्ड मोरी  द्वारा  कुराई जल स्रोत से करीब 1 किमी लम्बी एकल पेयजल योजना बिछाई गई तथा  ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2008-9 में मरम्मत के नाम पर लाखों रूपये खर्च किये गये, लेकिन  आपदा से क्षतिग्रस्त होने के बाद पेयजल लाइन में  पानी  नहीं  चला। पाइपलाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। सावणी गांव में  अग्नि कांड की  घटना  के दौरान जिला प्रशासन की फटकार के बाद  कुछ  समय के लिए  जुगाड़ के माध्यम से पेयजल आपूर्ति बहाल कर दी थी, लेकिन आजकल  फिर आया राम गया राम वाली कहावत ही साबित हो रही है। ग्रामीण महिलाओं का आधा दिन  तो पानी  ढोने में  ही बीत रहा है।

जल संस्थान की लापरवाही की एक ओर बानगी और देखिए मोरी बाजार में लाखो रूपये की लागत से बिछाई गई दो पेयजल योजनाएं भी बाजार वासियों की प्यास तो नहीं बुझा पाई लेकिन ठेकेदारों तथा विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारियों के लिए कामधेनु जरूर बन गई है ।

बताते चले कि मोरी  निवास करने वाली 2000 की जनसंख्या की पेयजल की आवश्यकता की पूर्ति के लिए चगांणू पेयजल स्रोत से 195-96 में  लगभग 5 किमी  लम्बी पेयजल योजना तथा ननौरा खड्ड से 3किमी की पेयजल योजना का निर्माण किया गया ।लेकिन  विभाग की लापरवाही एवं  कारगुजरियो के चलते  बाजार में आये दिन  पेयजल संकट मुंह बाये खडा रहता है ।जिससे  होटल व्यवसायियों तथा भवन स्वामियों किराये में  रह रहे विद्यार्थियों को खासी फजीहत झेलनी पडती है । विभाग की लापरवाही  का इससे बडा उदाहरण क्या  हो सकता  है कि विभाग ने ननौरा खड्ड से विना स्टोर टैंक तथा फिल्टर सिस्टम लगाए सीधे खड्ड से पाइपलाइन टेप की है जिससे खड्ड की सारी गंदगी नलों के माध्यम से घरों तक पहुंच  रही है। विशेष कर बरसात में या वर्षा होने पर नलों  में  गंदा पानी  आता है जिससे उपभोक्ता के  स्वास्थ्य के पर बुरा असर पड़ता है तथा अनेक जल जनित रोगों से जूझ रहे है विभाग की लापरवाही जनता के स्वास्थ्य पर भारी पड़  रही है। वर्तमान समय में  पाइपलाइनें जगह-जगह लीकेज हो रही है उचित देखभाल के अभाव में  पेयजल आपूर्ति ठप है। विभाग पेयजल आपूर्ति करने से ज्यादा विना पानी  पिलाएं पेयजल विल भेजकर विल की धनराशि  वसूली में  दे रहा है।

इस संबंध में जब जल संस्थान के सहायक अभियंता एसएस रावत से उनके मोबाइल नंबर पर पर उनका पक्ष जानने के लिए सम्पर्क किया गया तो मोबाइल बंद मिला जिस कारण उनसे सम्पर्क नहीं हो सकता।

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