एक्सक्लूसिव खुलासा

खुलासा : राजाजी पार्क के अधिकारी ही बने जंगल के दुश्मन

अनुज नेगी, पौड़ी 
राजाजी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट में वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से कानून को ताक पर रखकर रात भर धड़ल्ले से चलाई जा रही है,जेसीबी मशीनें
पौड़ी।जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक के राजाजी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के बफर जोन में कानून ताक पर रखकर आधी रात को जेसीबी मशीनों से धड़ल्ले से नाली खुदान का कार्य किया जा रहा है।जिसके कारण वन्यजीवों को खतरा बना हुआ है।
यमकेश्वर ब्लॉक के घटुघाट-खैरखाल में एक निजी कंम्पनी व वन विभाग के अधिकारियों की मनमानी के चलते राजाजी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के बफर जोन में वन्यजीवों को आए दिन हादसे का शिकार होना पड़ रहा है ,लेकिन वन विभाग व प्रशासन भी आंखें मूंदे हुए है।
देखिए वीडियो

राजाजी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के गौहरी रेंज के अंतर्गत  खैरखाल-घटुघाट बफर जोन में एक निजी संचार कंपनी ने अपने ओएफसी लाइन बिछाने के लिए वन विभाग क्षेत्र में आधी रात को पूरी सड़क जेसीबी मशीन से खोद डाली है,जबकि रिजर्व फॉरेस्ट(वन्यजीव क्षेत्र) के बफर जोन में किसी भी प्रकार निर्माण कार्य य अन्य कार्य करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है,और जेसीबी मशीन प्रतिबंधित है।
बावजूद इसके राजाजी टाइगर रिर्जव फॉरेस्ट में कंपनी ने रातों रात कई किलोमीटर सड़क को खोदकर टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के वन्यजीवों को खतरा बना दिया है।  बावजूद इसके जिम्मेदार वन विभाग सोया हुआ है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि खैरखाल-घटुघाट क्षेत्र में अधिक मात्रा में वन्यजीव की गतिविधियों की गुंजाइश होती है,और गर्मियों में वन्यजीव पानी के लिए रात में नदियों का रूख करते है।
 इस मामले में जब पर्वतजन ने टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के गोहरी रेंज के क्षेत्रधिकारी दिनेश चंद्र उनियाल से इसकी शिकायत की तो दिनेश चंद्र उनियाल का कहना ,था यह क्षेत्र बफर जोन का है,और इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य हो सकता है,और निजी कंपनी के ठेकेदार को इस क्षेत्र में कार्य करने से मना कर दिया है।
जबकि वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से राजाजी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के गोहरी रेंज के घटुघाट-खैरखाल क्षेत्र में आज भी आधी रात को धड़ल्ले से जेसीबी मशीनों से खुदाई की जा रही है,और वन विभाग के आला अधिकारी कुम्भकर्ण की नींद सोया है,और बफर जोन का हवाला दे रहा है।
क्या होता है बफर जोन
अधिनियम के मुताबिक, बफर जोन उन इलाकों को कहा जाता है जो बाघों के रिहायशी या अंदरूनी इलाकों के आसपास होते हैं, जहां कभी कभी बाघ आ जाते हैं और जहां मानवीय गतिविधियों की भी गुंजाइश होती है। और बफर जोन में किसी भी प्रकार का विकास कार्य कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है।
क्या कहते हैं राजाजी टाइगर रिजर्व के डारेक्टर बी के पात्रो
राजाजी टाइगर रिजर्व के डारेक्टर पी के पात्रो का कहना है, वन विभाग की ओर से जाँच टीम भेज दी गई है,निजी कंपनी के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी और उनकी मशीनों को जब्त किया जायेगा।

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