सियासत

उत्तराखंड पहुंची आरक्षण पर आध्यादेश की आग। आंदोलन से भाजपा की बढी मुश्किल

कृष्णा बिष्ट

आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस प्रकार केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश लाकर फैसले को पलट दिया, उस से पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ जो माहौल बना है उसकी आग उत्तराखंड में भी पहुंच गई है।
 इसी कड़ी में आज हल्द्वानी में अखिल भारतीय समानता मंच के बैनर तले लगभग आठ से दस हज़ार लोगों के भारी जन समूह ने आरक्षण विरोधी रैली निकाल बीजेपी सरकार की नीतियों पर आक्रोश व्यक्त किया व आगामी चुनाव में बीजेपी को सबक सिखाने का संकल्प लिया है, हल्द्वानी में यह पहला मौका है कि जब किसी भी गैर राजनीतिक मंच के बैनर तले किसी व्यवस्था के खिलाफ इतनी बड़ी तादाद में स्वेच्छा से लोग लामबंद हुए हों ।
इस मंच से जुड़े लोगों का कहना था कि समाज के पिछड़े वर्गों के लिए संविधान में मात्र 10 वर्षों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, किंतु तत्कालीन सरकारों द्वारा अपने वोट बैक की राजनीति के खातिर जाति आधारित आरक्षण की अवधि की समय सीमा को आज तक बढ़ते रहे जिसे बढ़ते-बढ़ते आज लगभग 67 वर्ष हो चुके हैं लेकिन इन 67 वर्षों में इस जातिगत आरक्षण का लाभ कुछ खास परिवारों द्वारा खुद तो पीढ़ी दर पीढ़ी लिया जाता रहा है किन्तु समाज के निम्नतम स्तर के लोगों तक इसे पहुंचने नहीं दिया जा रहा है, चूंकि गरीबी जाति देख कर नहीं आती, आरक्षण का आधार जातिगत किए जाने से जहां सामान्य वर्ग के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजगार हतोत्साहित हो रहे हैं, वहीं कर्मचारी कुंठित व उत्साहहीन होते जा रहे हैं, जिससे समाज में जातिवाद की खाई बड़ी तेजी से और भी अधिक चौड़ी होती जा रही है,
इस रैली में शामिल कई लोगों का मानना था कि यह एस.सी./ एस.टी. एक्ट महज सवर्णों पर अत्याचार के लिए है, अधिकांश मामलों में दोष भावना से ग्रसित होकर झूठे आरोप लगाकर मुकदमे दर्ज हो रहे हैं व निर्दोष सवर्णों को जेल में डाल दिया जा रहा है।
इन्हीं अन्याय पूर्ण कार भाइयों का संज्ञान लेते हुए जब माननीय उच्च न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी से पूर्ण डी.एस.पी. स्तर के अधिकारी से जांच के उपरांत कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है, परंतु बीजेपी सरकार द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी करते हुए एक्ट को संशोधित कर दिया गया जिस के कारण पुनः सवर्णों का उत्पीड़न होना प्रारंभ हो गया है ।
इस पूरी रैली के दौरान एक और बड़ी ही रोचक चीज देखने में आई जहां इस रैली का आह्वान अखिल भारतीय समानता मंच द्वारा किया गया था, किंतु अपार जनसमूह को देख कुछ और गैर राजनीतिक दल बहती गंगा में डुबकी लगाने के उद्देश्य से इस रैली को समर्थन देने की घोषणा करते हुए अपने अपने बैनर लेकर इस रैली में शामिल हो गए और खुद को मीडिया के कैमरों के हिसाब से एडजस्ट करते रहे ।
आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस प्रकार केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश लाकर फैसले को पलट दिया, उस से पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ जो माहौल बना है उसकी आग उत्तराखंड में भी पहुंच गई है।
 इसी कड़ी में आज हल्द्वानी में अखिल भारतीय समानता मंच के बैनर तले लगभग आठ से दस हज़ार लोगों के भारी जन समूह ने आरक्षण विरोधी रैली निकाल बीजेपी सरकार की नीतियों पर आक्रोष व्यक्त किया व आगामी चुनाव में बीजेपी को सबक सिखाने का संकल्प लिया है, हल्द्वानी में यह पहला मौका है कि जब किसी भी गैर राजनीतिक मंच के बैनर तले किसी व्यवस्था के खिलाफ इतनी बड़ी तादाद में स्वेच्छा से लोग लामबंद हुए हों ।
इस मंच से जुड़े लोगों का कहना था कि समाज के पिछड़े वर्गों के लिए संविधान में मात्र 10 वर्षों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, किंतु तत्कालीन सरकारों द्वारा अपने वोट बैक की राजनीति के खातिर जाति आधारित आरक्षण की अवधि की समय सीमा को आज तक बढ़ते रहे जिसे बढ़ते-बढ़ते आज लगभग 67 वर्ष हो चुके हैं लेकिन इन 67 वर्षों में इस जातिगत आरक्षण का लाभ कुछ खास परिवारों द्वारा खुद तो पीढ़ी दर पीढ़ी लिया जाता रहा है किन्तु समाज के निम्नतम स्तर के लोगों तक इसे पहुंचने नहीं दिया जा रहा है, चूंकि गरीबी जाति देख कर नहीं आती, आरक्षण का आधार जातिगत किए जाने से जहां सामान्य वर्ग के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजगार हतोत्साहित हो रहे हैं, वहीं कर्मचारी कुंठित व उत्साहहीन होते जा रहे हैं, जिससे समाज में जातिवाद की खाई बड़ी तेजी से और भी अधिक चौड़ी होती जा रही है,
इस रैली में शामिल कई लोगों का मानना था कि यह एस0.सी./ एस.टी. एक्ट महज सवर्णों पर अत्याचार के लिए है, अधिकांश मामलों में दोष भावना से ग्रसित होकर झूठे आरोप लगाकर मुकदमे दर्ज हो रहे हैं व निर्दोष सवर्णों को जेल में डाल दिया जा रहा है इन्हीं अन्याय पूर्ण कार भाइयों का संज्ञान लेते हुए जब माननीय उच्च न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी से पूर्ण डी.एस.पी. स्तर के अधिकारी से जांच के उपरांत कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है, परंतु बीजेपी सरकार द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी करते हुए एक्ट को संशोधित कर दिया गया जिस के कारण पुनः सवर्णों का उत्पीड़न होना प्रारंभ हो गया है ।
इस पूरी रैली के दौरान एक और बड़ी ही रोचक चीज देखने में आई जहां इस रैली का आह्वान अखिल भारतीय समानता मंच द्वारा किया गया था, किंतु अपार जनसमूह को देख कुछ और गैर राजनीतिक दल बहती गंगा में डुबकी लगाने के उद्देश्य से इस रैली को समर्थन देने की घोषणा करते हुए अपने अपने बैनर लेकर इस रैली में शामिल हो गए और खुद को मीडिया के कैमरों के हिसाब से एडजस्ट करते रहे ।

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